जलापूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका, योजनाओं को प्रभावी बनाने में मददगार
एनआईटी पटना में ग्राम पंचायत विकास योजना पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई जिसका उद्देश्य ग्रामीण विकास में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका को बढ़ाना है। कार्यक्रम में ‘हर घर नल का जल’ योजना पर चर्चा हुई जिसमें प्रत्येक घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन ऊर्जा संसाधन और ई-कचरे के प्रबंधन पर भी विचार व्यक्त किए जिसका उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना है।

जागरण संवाददाता, पटना। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), पटना में शनिवार को 'ग्राम पंचायत विकास योजना' पर एक दिवसीय ओरिएंटेशन बैठक सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला संस्थान के निदेशक प्रो. पीके जैन के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम उन्नत भारत अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि बिहार में उच्च शिक्षा संस्थान अब ग्रामीण विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भागीदार बन रहे हैं।
कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न सहभागी संस्थानों के समन्वयक एकत्र हुए और ग्राम पंचायतों को विकास की धुरी बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में पीएचईडी के मुख्य अभियंता मनोज कुमार मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘हर घर नल का जल’ के माध्यम से राज्य के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि जल आपूर्ति के साथ उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।
इस दिशा में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तकनीकी संस्थान जल शुद्धिकरण, जल संरक्षण एवं सतत प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में शोध एवं नवाचार के माध्यम से समाज को नई दिशा प्रदान करेंगे।
प्लानिंग एंड डेवलपमेंट के डीन प्रो. संजीव सिन्हा ने ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से जल प्रबंधन, ऊर्जा संसाधन, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में नवाचार और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया और विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान द्वारा प्रदान किए गए तकनीकी परामर्श और शोध आधारित सुझाव पंचायत स्तर पर योजनाओं को और अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी बनाएंगे।
आईआईटी दिल्ली के परियोजना निदेशक प्रो. पीके सिंह ने ऑनलाइन जुड़कर अभियान की व्यापकता और इसकी ग्रामीण भारत में संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। देश की चुनौतियों का समाधान खोजने और समाज को नई दिशा देने में उनका योगदान अनिवार्य है।
शिक्षण संस्थानों को अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से ग्रामीण भारत के सतत विकास में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआइआरडीपीआर), हैदराबाद के प्रो. आर. रमेश ने ग्राम पंचायत विकास योजना विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने आनलाइन संबोधन योजनाओं की व्यवहारिक बारीकियों को विस्तार से साझा किया और प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर समग्र विकास तभी संभव है जब योजनाएं स्थानीय आवश्यकताओं और समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर आधारित हों।
विशेषज्ञ अभिषेक कुमार ने ई-वेस्ट टू वेल्थ विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार इलेक्ट्रानिक कचरे का सही प्रबंधन न केवल पर्यावरणीय संकट को कम कर सकता है, बल्कि रोजगार सृजन के नए अवसर भी प्रदान कर सकता है।
समापन सत्र में रीजनल को- आर्डिनेटर, डा. ओम जी शुक्ला ने कहा कि संवाद को अब ठोस कार्ययोजना में बदलने का समय आ गया है। यह कार्यशाला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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