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    ब्रिटेन से व्यापार...बिहार के उद्योगों को होगा दोहरा लाभ, इन फसलों का निर्यात बढ़ेगा

    भारत और ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समझौते से बिहार के उद्योगों को दोहरा लाभ होगा। स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलेगा और ब्रिटेन से आयात सस्ता होगा। बिहार के खाद्य उत्पादों जैसे मखाना लीची की मांग बढ़ेगी क्योंकि कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम होगा। इस समझौते से रोजगार सृजन और युवा सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा जिससे राज्य का आर्थिक विकास होगा। निर्यात बढ़ने से प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

    By Nalini Ranjan Edited By: Rajesh KumarUpdated: Sun, 27 Jul 2025 12:08 PM (IST)
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    भारत और ब्रिटेन के मुक्त व्यापार समझौते से बिहार के उद्योगों को दोहरा लाभ होगा। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, पटना। ब्रिटेन के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते से औद्योगिक क्षेत्र पर दोहरा लाभ होने की उम्मीद है। इससे जहां स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलेगा, वहीं ब्रिटेन से कई चीजों के आयात के कारण स्थानीय लोगों को कीमतों में राहत मिलेगी।

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    बिहार की बात करें तो यहां के खाद्य उत्पादों की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। इससे आम, लीची, मखाना, कतरनी चावल से लेकर चावल की कई किस्मों के साथ-साथ सिलाव का खाजा, मनेर की लड्डी आदि उत्पादों की मांग बढ़ेगी।

    समझौते के अनुसार ब्रिटेन में कृषि उत्पादों पर 95 प्रतिशत आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे इन चीजों की मांग बढ़ेगी। बीआइए के अध्यक्ष केपीएस केसरी और पूर्व अध्यक्ष राम लाल खेतान का कहना है कि इस समझौते का बेहतर असर होगा।

    इससे वैश्विक स्तर पर स्थानीय चीजों की मांग बढ़ेगी। क्योंकि बिहार में 80 प्रतिशत मखाना का उत्पादन होता है। हस्तशिल्प में मधुबनी पेंटिंग, सिक्की कला, भागलपुरी सिल्क की जड़ें बिहार में हैं। इससे यहां के लोगों की आय बढ़ेगी।

    बीआईए के उपाध्यक्ष आशीष रोहतगी का कहना है कि उद्योग मंत्रालय द्वारा जून 2025 में जारी निर्यात आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में 17283 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ। यह 2023-2024 की तुलना में 638 करोड़ रुपये अधिक है।

    रोज़गार सृजन, युवा सशक्तिकरण का भी आधार 

    सीआईआई बिहार के अध्यक्ष गौरव साह का कहना है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) न केवल एक व्यावसायिक साझेदारी है, बल्कि यह रोज़गार सृजन, युवा सशक्तिकरण का भी आधार बनेगा। यह भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के विकास का एक सशक्त माध्यम है।

    भारतीय उद्योग इसे समावेशी और सतत आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानता है। बिहार राज्य व्यापार संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने कहा कि वहाँ से ऑटोमोबाइल, सॉफ्टवेयर, ई-कॉमर्स, शिक्षा, व्यावसायिक सेवाओं में भी निवेश बढ़ेगा।

    निर्यात से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी

    एसोचैम बिहार के अध्यक्ष विवेक साह ने कहा कि एफडीए का स्थानीय औद्योगिक क्षेत्र पर दोहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। इससे यहां के लोगों को फ़ायदा होगा क्योंकि यहां से खाद्य उत्पाद, स्थानीय निर्माण सामग्री, कपड़ा, जूते, कृषि उत्पाद, हस्तशिल्प वस्तुओं का निर्यात बढ़ेगा। इससे यहां अवसर भी बढ़ेंगे।

    दूसरी ओर, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों में ब्रिटेन से आयात से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। इससे यहाँ के एमएसएमई पर दबाव पड़ सकता है।