पटना के इंजीनियर को म्यांमार से सुरक्षित वापस लाया गया, पुलिस और दूतावास की संयुक्त कार्रवाई
पटना पुलिस में छानबीन के बाद सही लोकेशन पता भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के समन्वित प्रयास से उसे सुरक्षित मुक्त करा लिया है। उसे भारत वापस लाया गया है। पुलिस को यह सफलता तीन महीनों की गहन अनुसंधान और दूतावास स्तर पर सतत संपर्क के परिणामस्वरूप मिली। इस मामले में पुलिस में सुनिल कुमार को गिरफ्तार किया है जो सीतामढ़ी का निवासी है।

जागरण संवाददाता, पटना। विदेश में नौकरी का झांसा देकर दानापुर के कम्प्यूटर साइंस इंजीनियर सचिन कुमार सिंह को म्यांमार (बर्मा) में बंधक बनाया गया था। पटना पुलिस में छानबीन के बाद सही लोकेशन पता भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के समन्वित प्रयास से उसे सुरक्षित मुक्त करा लिया है। उसे भारत वापस लाया गया है। पुलिस को यह सफलता तीन महीनों की गहन अनुसंधान और दूतावास स्तर पर सतत संपर्क के परिणामस्वरूप मिली। इस मामले में पुलिस में सुनिल कुमार को गिरफ्तार किया है, जो सीतामढ़ी का निवासी है।
बीते 26 जून को दानापुर कैंप निवासी मीना देवी ने दानापुर थाने में पुत्र सचिन कुमार सिंह के म्यांमार में बंधक बनाए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। सचिन पेशे से कंप्यूटर साइंस इंजीनियर हैं, जिन्हें नेपाल निवासी एजेंट धर्मेन्द्र चौधरी द्वारा विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर म्यांमार बुलाया गया। धर्मेन्द्र ने 12 लाख रुपये के वार्षिक पैकेज और वर्क वीजा दिलाने का भरोसा दिलाया था।
बैंकाक से सड़क मार्ग से होते हुए ले गए थे म्यांमार
सचिन को पटना से कोलकाता, वहां से बैंकाक और आगे लगभग 12 घंटे की सड़क यात्रा के बाद म्यांमार ले जाया गया। शुरू में सहाय ग्रुप कंपनी में काम मिला, लेकिन तीन महीने बाद उन्हें स्थानीय साइबर स्कैम सेंटर में बंधक बना लिया गया। उनका मोबाइल व पासपोर्ट छीन लिया गया और जबरन स्कैम का काम करने के लिए प्रताड़ित किया गया। इलेक्ट्रिक करंट और मारपीट की गई।
फिरौती की रकम नहीं देने पर अंग बेचने की दी जा रही थी धमकी
साहिल कुमार सिंह (बंधक के भाई) से 5000 डालर की फिरौती की मांग करते हुए धमकी दी गई कि पैसे न देने पर सचिन के शरीर के अंग बेच दिए जाएंगे। इधर मामला संज्ञान में आते ही सिटी एसपी पश्चिमी भानु प्रताप सिंह ने एसआईटी का गठन किया। खुद इस केस की मानिटरिंग कर रहे थे।
अभियुक्तों की खोज में सुनिल को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद साइबर, आर्थिक अपराध इकाई, पीएमओ और विदेश मंत्रालय से पत्राचार किया गया। साथ ही म्यांमार स्थित भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क बना रहा।
दूतावास ने सचिन को सुरक्षित मिलिट्री कैंप में पहुंचाया
दूतावास ने सचिन को जुलाई में स्थानीय मिलिट्री कैंप में सुरक्षित पहुंचाया। 27-08-25 को भारतीय दूतावास की मदद से सचिन को दिल्ली भेज दिया गया। पटना पुलिस ने दिल्ली पहुंचकर सचिन को बरामद किया और उनके परिजनों को सौंप दिया।
कई आरोपितों के खिलाफ जांच कर रही है पुलिस
प्रमुख अभियुक्तों में सुनिल कुमार के साथ ही धर्मेन्द्र चौधरी और जितेन्द्र चौधरी (जिला-सरलाही, नेपाल), एवं सहाय ग्रुप कंपनी के एचआर तथा उनके संपर्क सूत्रों की भी जांच जारी है।
पीड़ित ने बताई आपबीती
पुलिस पूछताछ में सचिन ने बताया कि जिस वीजा पर वे गए थे वह केवल टूरिस्ट वीजा था। म्यांमार में उनके साथ बंधक बनाकर मारपीट व शोषण हुआ और साइबर स्कैम सेंटर में जबरन काम कराया गया। पटना पुलिस और दूतावास की मदद से वे सकुशल अपने घर लौट पाए।
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