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    किचन से 'क्लाउड' तक भर रहीं आत्मनिर्भरता की उड़ान, पटना की महिलाएं ऑनलाइन कर रहीं कमाई

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 10:35 AM (IST)

    पटना की महिलाएं क्लाउड किचन के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। घर में बने स्वादिष्ट भोजन को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेचकर वे शहर भर में अपनी पहचान बना रही हैं। अम्मा जैसे कई महिलाएं 350 से अधिक ऑर्डर प्रतिदिन पूरा कर रही हैं। क्लाउड किचन महिलाओं को स्वतंत्रता और आर्थिक मजबूती प्रदान कर रहा है।

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    किचन से 'क्लाउड' तक भर रहीं आत्मनिर्भरता की उड़ान

    सोनाली दुबे, पटना। जब हुनर हो तो उसे स्वरोजगार का जरिया क्यों न बनाया जाए। पटना की महिलाएं अब यही कर रही हैं। घर के किचन में बन रही दाल-पूरी, खिचड़ी, पराठे और सब्जियों की खुशबू अब क्लाउड किचन के जरिये पूरे शहर तक पहुंच रही है।

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    कभी घर और परिवार तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के सहारे सैकड़ों लोगों तक अपने स्वाद का जादू बिखेर रही हैं।

    बोरिंग रोड से 65 वर्षीय देवानी देवी, जिन्हें लोग प्यार से अम्मा कहते हैं, इस क्षेत्र की मिसाल बन चुकी हैं। अम्मा पिछले 15 सालों से लोगों के लिए खाना बना रही हैं। पहले उनका हास्टल था, जहां 90 छात्रों के लिए टिफिन तैयार करती थीं।

    दिल्ली जाने के बाद 2023 में बेटे की सलाह से उन्हें क्लाउड किचन के फायदे समझ आए और उन्होंने बच्चों की मदद से क्लाउड किचन शुरू किया। शुरुआत में मुश्किल से दो आर्डर आते थे, लेकिन विश्वास था कि मेहनत रंग लाएगी।

    धीरे-धीरे उनके देसी स्वाद ने लोगों का दिल जीत लिया। आज अम्मा रोजाना 350 से अधिक आर्डर पूरे करती हैं। कुल मिलाकर 150 से अधिक आइटम उनके मेन्यू में शामिल हैं। अम्मा ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ 18 लोगों को रोजगार भी दिया है।

    अम्मा कहती हैं, लोग कहते थे इस उम्र में आराम करो, लेकिन मुझे अपना हुनर आगे बढ़ाना था। उम्र मायने नहीं रखती, हौसला होना चाहिए। आज मैं स्विगी और जोमैटो पर रजिस्टर्ड हूं व्यस्त रहना मेरे लिए एक आशीर्वाद है। उनकी बनाई नेनुआ-चने की सब्जी,लौकी की सब्जी दाल-पूरी और खीर, घुघनी-चूरा प्रसिद्ध हैं।

    शुन्य तेल वाले पराठों का स्वाद

    पाटलिपुत्र कालोनी की अंजना कुमारी ने भी अपने घर की रसोई को स्वरोजगार का माध्यम बनाया। पति के निधन के बाद भतीजे सार्थक की मदद से 2023 में उन्होंने क्लाउड किचन शुरू किया।

    उनकी खासियत है शुन्य तेल वाले पराठे जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं के बीच ये लोकप्रिय हो रहे हैं।अंजना कहती हैं, मैं आर्डर के हिसाब से खुद को तैयार रखती हूं। ग्राहकों का विश्वास और प्यार ही मेरी असली ताकत है।

    गुजिया व गोंद के लड्डू है खास

    पाटलिपुत्र कालोनी की सुनीता सर्राफ पिछले पांच साल से अपने बनाए हुए गुजिया, अनर्सा, ठेकुआ, निमकी और लिट्टी-चोखा से लेकर साउथ इंडियन व्यंजन तक परोस रही हैं।

    उनकी शुरुआत तब हुई जब कुछ मेहमानों ने उनके बनाए गुजिया व गोंद के लड्डू खाकर कहा कि उनका स्वाद अलग है और इसे बिजनेस में बदला जा सकता है। धीरे-धीरे, वह घर पर ही तरह-तरह के व्यंजन बनाकर लोगों तक पहुंचाने लगीं।

    अब वह मुंडन, जन्मदिन पार्टियों, सरकारी दफ्तरों, किटी पार्टियों और आस-पास की सोसायटियों के आर्डर पूरे करती हैं। कहती हैं, त्योहारी सीजन में मिठाइयों के आर्डर सबसे अधिक आते हैं।

    नार्थ एस के पुरी की कुमकुम सहाय 2016 से क्लाउड किचन चला रही हैं। उनका मेन्यू पूरी तरह घरेलू है। उनकी स्पेशल डिश कद्दू का खीर और आटे का हलवा है।

    शुरुआत में उनके पास सिर्फ चार आर्डर आते थे। वे खुद हाथों में पोस्टर लेकर प्रचार करती थीं। लेकिन मेहनत रंग लाई और आज वे रोजाना 40–50 आर्डर करती हैं। उनका खाना सचिवालय जाता है।

    उनकी थाली की कीमत 150 है। आज वह सात महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। कुमकुम कहती हैं, मन में लगन हो तो कोई भी बाधा काम में नहीं आ सकती। आज मैं पूरी तरह स्वतंत्र और आत्मनिर्भर हूं।

    आप भी शुरू कर सकती हैं क्लाउड किचन

    अगर आपको खाना पकाने का शौक है तो घर बैठे भी आप अपना बिजनेस शुरू कर सकती हैं और सबसे आसान तरीका है क्लाउड किचन। इसमें आपको किसी बड़े रेस्टोरेंट या दुकान खोलने की जरूरत नहीं होती। आप अपने ही किचन से शुरुआत कर सकती हैं।

    सबसे पहले आपको यह तय करना होगा कि आप किस तरह का खाना बनाना चाहती हैं – जैसे बिहारी फूड, साउथ इंडियन, स्नैक्स, या फिर थाली सिस्टम।

    इसके बाद FSSAI लाइसेंस और ऑनलाइन पंजीकरण प्राप्त करें। धीरे-धीरे जैसे-जैसे आर्डर बढ़ने लगेंगे, आप मेन्यू को और बड़ा कर सकती हैं।

    क्लाउड किचन महिलाओं के लिए स्वतंत्रता और पहचान बनाने का महत्वपूर्ण साधन है। सरकार की योजनाएं भी इसमें मदद कर रही हैं। सितंबर से शुरू हो रही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दस हजार तक की सहायता दी जाएगी। इससे वे अपना बिजनेस शुरू कर सकेंगी। हम हर तरह की सहायता प्रदान करते हैं। महिलाओं को खाना पकाने से लेकर पैकेजिंग, ऑनलाइन प्लेटफार्म से जुड़ने और अकाउंट मैनेजमेंट तक, हर चीज का प्रशिक्षण दिया जाता है। अब तक 15 से 20 महिलाएं प्रशिक्षण ले चुकी हैं और सफलतापूर्वक क्लाउड किचन चला रही हैं और अच्छा मुनाफा कमा रही हैं। -साधना झा, कार्यकारी अध्यक्ष, महिला उद्योग संघ