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    इस बार 14 दिनों का होगा पितृ पक्ष, अगस्त्य मुनि के तर्पण बाद होगी शुरुआत; जानें विधि-विधान

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 09:12 AM (IST)

    भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को अगस्त्य मुनि का तर्पण किया जाएगा और पितृपक्ष आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होगा। इस बार पितृपक्ष 14 दिनों का होगा क्योंकि नवमी तिथि का क्षय हो रहा है। पितृपक्ष में पिंडदान और तर्पण से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पितरों को जल और तिल से तर्पण करने से उनकी आत्मा तृप्त होती है।

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    इस साल 14 दिनों का होगा पितृ पक्ष

    जागरण संवाददाता, पटना। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा सात सितंबर रविवार को अगस्त्य मुनि को खीरा, सुपाड़ी से सनातन धर्मावलंबी तर्पण करेंगे। आश्विन कृष्ण प्रतिपदा आठ सितंबर सोमवार से पितृपक्ष आरंभ हो जाएगा।

    श्रद्धालु पितृपक्ष के दौरान पिंडदान व तर्पण कर पितरों से आशीष प्राप्त करेंगे। इस बार पितृपक्ष में नवमी तिथि के क्षय होने से पितृपक्ष 14 दिनों का होगा।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों को जब जल और तिल से पितृपक्ष से तर्पण किया जाता है, तब उनकी आत्मा तृप्त होती है।

    ज्योतिष आचार्य पंडित राकेश झा ने धार्मिक ग्रंथों के हवाले से बताया कि पितपृक्ष में पिता, पितामह, प्रपितामाह तथा मातृपक्ष में माता, पितामही, प्रपितामही के अलावा नाना पक्ष में मातामह , प्रमातामह, वृद्ध प्रमातामह वहीं नानी पक्ष में मातामही, प्रमातामही, वृद्ध प्रमातामही के साथ अन्य सभी स्वर्ग वासी, संगे संबंधियों का गोत्र एवं नाम लेकर तर्पण किया जाता है। श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण समस्त कामनाओं से हमें तृप्त करते हैं।

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    21 सितंबर को होगा पितृ विसर्जन

    आश्विन कृष्ण प्रतिपदा आठ सितंबर सोमवार से 21 सितंबर आश्विन कृष्ण अमावस्या रविवार तक पितृपक्ष रहेगा। 20 सितंबर शनिवार को पितृपक्ष का चतुर्दशी तिथि है।

    इस दिन शस्त्रादि से मृत्यु को प्राप्त हुए पितरों का श्राद्ध किया जाएगा। इसके बाद 21 सितंबर रविवार को अमावस्या तिथि में स्नान-दान सहित सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध एवं पितृ विसर्जन महालया पर्व के रूप में संपन्न होगा।

    इस तिथि को अमावस्या सूर्योदय से लेकर देर रात 12:28 बजे तक है। इसीलिए सर्वपितृ का तर्पण 21 सितंबर को करते हुए ब्राह्मण भोजन कराकर पितरों की विदाई किया जाएगा।

    इस तिथि को करें तर्पण व श्राद्ध

    जिन लोगों की मृत्यु के दिन की सही जानकारी ज्ञात न हो उनका श्राद्ध अमावस्या तिथि को करना चाहिए। अकाल मृत्य़ु होने पर भी अमावस्या के दिन ही श्राद्ध करना चाहिए।

    जिसने आत्महत्या की हो, या जिनकी हत्या हुई हो ऐसे लोगों का श्राद्ध चतुर्थी तिथि को किया जाना चाहिए। पति जीवित हो और पत्नी की मृत्यु हो गई हो, तो उनकी श्राद्ध नवमी तिथि को करना चाहिए।

    साधु एवं सन्यासियों का श्राद्ध एकादशी तिथि को किया जाता है। बाकि सभी का उनकी तिथि के अनुसार किया जाता है।

    समर्पण से तर्पण दिलाएगी पितृ ऋण से मुक्ति

    श्राद्ध को ही पितरों का यज्ञ कहा जाता है। शास्त्रों में पितृ ऋण, देव ऋण और गुरु ऋण बताए गए हैं। पितृपक्ष में अपने पितरों को श्रद्धा सुमन अर्पित करनी चाहिए।

    पितृपक्ष में जल और तिल से तर्पण करना शुभ होता है। इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म और दान-तर्पण से पितरो को तृप्ति मिलती है।

    वे खुश होकर अपने वंशजों को सुखी और संपन्न जीवन का आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म करने की परंपरा हमारी संस्कृति विरासत है। पितृों तक केवल दान ही नहीं बल्कि हमारे भाव भी पहुंचते है।

    एक नजर में पितृपक्ष

    अगस्त्य ऋषि तर्पण- शनिवार 7 सितंबर

    पितृपक्ष आरंभ (प्रतिपदा) - रविवार 8 सितंबर

    चतुर्थी श्राद्ध - गुरुवार 11 सितंबर

    मातृ नवमी - सोमवार 15 सितंबर

    इंदिरा एकादशी- बुधवार 17 सितंबर

    चतुर्दशी श्राद्ध- शनिवार 20 सितंबर

    अमावस्या, महालया व सर्वपितृ विसर्जन - रविवार 21 सितंबर