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    रसोई में कैंसर का खतरा... धूम्रपान से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है आपकी रसोई

    पीएम 2.5 वायु प्रदूषकों की तीव्रता और फेफड़ों के कैंसर के बीच सीधा संबंध दिखाई देता है। बिहार के ग्रामीण घरों की रसोइयों में पीएम 2.5 की मात्रा चौंकाने वाली 1000 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक पाई गई जबकि डब्ल्यूएचओ का स्वीकार्य मानक सिर्फ 25 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है।

    By Akshay Pandey Edited By: Radha Krishna Updated: Fri, 22 Aug 2025 07:23 PM (IST)
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    आद्री और महावीर कैंसर संस्थान द्वारा किए गए शोध में सामने आई जानकारी

    जागरण संवाददाता, पटना। फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से धूम्रपान से होता है। यह धारणा गलत है, क्योंकि पटना के महावीर कैंसर संस्थान अस्पताल में 1,637 गैर-धूम्रपान करने वाली महिलाओं को इससे पीड़ित पाया गया है। एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (आद्री) के सेंटर फार स्टडीज आन एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट (सीसेक) की शोध प्रमुख डा. मौसुमी गुप्ता ने शुक्रवार को यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया, जो आद्री और महावीर कैंसर संस्थान द्वारा किए गए शोध से सामने आया है। उनके व्याख्यान का विषय बिहार में गैर-धूम्रपान करने वाली महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की वर्तमान स्थिति पर आधारित था।

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    डा. मौसुमी गुप्ता ने बताया कि यह अध्ययन वर्ष 2015 से 2023 तक के मरीजों पर किया गया और इनमें से अधिकांश घरेलू वायु प्रदूषण के संपर्क में थे। पीएम 2.5 वायु प्रदूषकों की तीव्रता और फेफड़ों के कैंसर के बीच सीधा संबंध दिखाई देता है। बिहार के ग्रामीण घरों की रसोइयों में पीएम 2.5 की मात्रा चौंकाने वाली 1000 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से अधिक पाई गई, जबकि डब्ल्यूएचओ का स्वीकार्य मानक सिर्फ 25 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है।

    उन्होंने यह भी बताया कि 41 से 60 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं बिहार में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में सबसे अधिक ग्रसित हैं। इसका कारण खाना पकाने के तेल से निकलने वाला धुआं या बायोमास ईंधन का धुआं हो सकता है। इसका समाधान हवादार रसोईघर हो सकता है।

    फेफड़ों के कैंसर से पीएम 2.5 के इस संबंध की पुष्टि महावीर कैंसर संस्थान के अनुसंधान प्रमुख प्रो. डा. अशोक घोष ने भी की। उन्होंने विश्व में सामान्य रूप से और विशेषकर बिहार में वायु प्रदूषण की मौजूदा चिंताजनक स्थिति को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने बताया कि भारत विश्व का तीसरा सबसे प्रदूषित देश है और वायु प्रदूषण इसका प्रमुख कारण है।

    वायु प्रदूषण के कारण प्रतिवर्ष 8.1 मिलियन लोगों की मृत्यु होती है, जो कोविड-19 के भयावह चरम प्रभाव के जैसा है। उन्होंने लोगों से नागरिकों के रूप में सीधे भाग लेकर इस समस्या का समाधान करने की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया। इस दौरान डा. अश्मिता गुप्ता, डा. सुनील कुमार गुप्ता, डा. अभिनव श्रीवास्तव और डा. अरुण कुमार, डा. नवीन कुमार तथा आद्री की डा. संचिता महापात्रा उपस्थित थीं।