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    बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी! कोसी-मेची लिंक परियोजना को लेकर आया अपडेट; सर्वे का काम शुरू

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 10:09 PM (IST)

    Kosi Mechi River Link Project: कोसी-मेची रिवर लिंक प्रोजेक्ट बिहार के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। 6282 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का लक्ष्य बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। 117.50 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से सीमांचल क्षेत्र के 2.14 लाख हेक्टेयर भूमि को लाभ होगा। 

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    कोसी मेची लिंक प्रोजेक्ट। (जागरण)

    संवाद सहयोगी, वीरपुर(सुपौल)। कोसी-मेची रिवर लिंक प्रोजेक्ट बिहार के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। इससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मधेपुरा सहित अन्य सीमावर्ती जिलों में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी और बाढ़ की परेशानी कम होगी।

    यह परियोजना कृषि को नया आयाम देगी और लाखों किसानों को राहत मिलेगी। कोसी-मेची लिंक परियोजना की कुल लंबाई 117.50 किलोमीटर है।

    कोसी-मेची लिंक परियोजना बिहार में कोसी नदी और मेची नदी को जोड़ने की एक परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य अतिरिक्त बाढ़ के पानी को मेची नदी में मोड़कर बाढ़ की समस्या कम करना और सीमांचल क्षेत्र के 2.14 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करना है। इसकी अनुमानित लागत 6282 करोड़ है। जिसे मार्च 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

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    यह परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में, बिहार के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए बनाई गई है। इसके लिए निविदा की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। सर्वे का काम शुरू है। सर्वे उपरांत कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

    बता दें कि कोसी नदी में हर साल बाढ़ आती है। इससे तटबंध के अंदर बसी आबादी प्रभावित होती है। बाढ़ के कारण कई गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। खेत कटकर नदी में मिल जाती है और किसानों की मेहनत और फसल नदी की भेंट चढ़ जाती है। लोगों के घर-नदी की धार में समा जाते हैं। तटबंध के अंदर के लोगों की यह हर साल की पीड़ा है।

    इसे देखते हुए सरकार ने कोसी नदी को मेची से जोड़े जाने की योजना तैयार की। कोसी में आए अधिक पानी को इस लिंक के जरिये मेची नदी में प्रवाहित कर दिया जाएगा जिससे बाढ़ की स्थिति नहीं बनेगी और तटबंध के अंदर के लोग तो सुरक्षित रहेंगे ही साथ ही तटबंध पर भी दबाव नहीं बनेगा जिससे बाहर भी बाढ़ आने का खतरा नहीं रहेगा।

    इसके अलावा इस परियोजना से सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। नये सिंचित क्षेत्र बनेंगे और कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन होगा।

    कोसी-मेची परियोजना को लेकर अभी सर्वे का कार्य कराया जा रहा है। सर्वे उपरांत कार्य को प्रारंभ किया जाएगा।

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    - अनिल कुमार, चीफ इंजीनियर, सिंचाई प्रमंडल सहरसा

    सिल्टेशन बढ़ जाने के कारण भेंगा धार से सिल्ट को हटाने का कार्य किया जाएगा। जिसको लेकर रितिक कंपनी के द्वारा सर्वे का कार्य कराया जा रहा है। सर्वे उपरांत भेंगा धार से बालू निकालने का काम 31 आरडी तक किया जाएगा।

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    - राजेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, सिंचाई प्रमंडल वीरपुर