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    West Champaran : पिपरासी में किसके संरक्षण में चल रहा अवैध खनन? विधायक ने डीएम से की शिकायत

    By Tufani Chaudhary Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Sun, 30 Nov 2025 07:55 PM (IST)

    पश्चिम चंपारण के पिपरासी में अवैध खनन का मामला सामने आया है। विधायक ने जिलाधिकारी से शिकायत करते हुए पूछा है कि किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार चल रहा है। उन्होंने खनन माफिया पर नियमों के उल्लंघन और सरकार को राजस्व नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। विधायक ने डीएम से तत्काल हस्तक्षेप और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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    खनन स्थल पर लगे ट्रक । सौ इंटरनेट 

    संवाद सहयोगी, बगहा (पश्चिम चंपारण) । पिपरासी थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित स्थल से बालू खनन किया जा रहा है। इस संबंध में वाल्मीकिनगर के नव निर्वाचित विधायक सुरेंद्र प्रसाद ने डीएम, एसडीएम सहित अन्य पदाधिकारियों से शिकायत करते हुए प्रतिबंधित क्षेत्र से बालू खनन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की मांग किया है।

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    प्रतिबंधित क्षेत्र में किया जा बालू खनन 

    विधायक श्री प्रसाद ने बताया कि उनके द्वारा क्षेत्र भ्रमण के दौरान जानकारी मिली थी कि बालू खनन करने वालों के द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में जेसीबी लगाकर बालू खनन किया जा रहा है। जिसके बाद उन्होंने संभावित स्थल का जायजा लिया तो पाया कि जिस जगह पर खनन विभाग के द्वारा बालू खनन का आदेश जारी किया है। उस जगह पर किसी प्रकार का खनन नहीं हो रहा है।

    प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहे खनन का वीडियो ग्राफी भी कराया गया

    संवेदक के द्वारा गंडक नदी से होने वाली तबाही से बचने के लिए गाइड बांध के नीचे से जेसीबी लगाकर खनन कराया जा रहा है। जिससे बांध को खतरा तो है ही साथ ही बांध के अंदर बसे गांवों पर भी बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकती है।

    इस संबंध में उनके द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में हो रहे खनन का वीडियो ग्राफी भी कराया गया है। पिपरासी प्रखंड में बालू खनन को लेकर पहले से ही दिल्ली की टीम के द्वारा कई बार जांच भी किया गया है। उस प्रखंड में नीलामी होने वाले बालू घाट पर कभी भी खनन नहीं होता है। नीलामी लेने वाले संवेदक के द्वारा प्रति साल प्रतिबंधित क्षेत्र से ही बालू की निकासी कराई जाती है।

    जर्जर लोहिया पुल से खतरा

    चौतरवा। मझौवा पंचायत अंतर्गत हरहा नदी पर बना लोहिया पुल के जर्जर हो जाने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मझौवा के पूर्व मुखिया जय नारायण शाही, बबलू कुमार मिश्र, राम बाबू यादव, संजय सहनी आदि ने बताया कि आजादी के पूर्व अंग्रेजों के द्वारा उक्त पुल का निर्माण कराया गया था।

    पिछले तीन वर्षों से उसकी हालत जर्जर हो गई है। हल्के वाहन तो आसानी से पार कर जाते हैं परंतु भारी वाहनों के लिए परेशानी है। अब जबकि गन्ना सत्र आरंभ हो गया है। गन्ना लदा बैल गाड़ी तो पार कर जाता है। हालांकि पुल से पार करने पर पुल में कम्पन होने लगता है। परंतु गन्ना लदा ट्रैक्टर ट्रेलर को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

    उक्त पुल का रेलिंग लगभग दो वर्ष पूर्व से ही टूटा हुआ है। ग्रामीण लोहे के रेलिंग के स्थान पर बांस को बांध कर अस्थाई कामचलाऊ बनाए हैं। इस संदर्भ में ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराने की गुहार लगाई है।