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    इस गुजराती ने अमेरिका में FIR को बना लिया कारोबार, 10 साल में कमाए लाखों डॉलर, ऐसे सामने आया मामला

    Updated: Fri, 18 Jul 2025 06:59 PM (IST)

    U-Visa Fraud in US अमेरिका के लुइसियाना प्रांत में वीजा घोटाले का खुलासा हुआ है। इसमें भारतीय मूल के चंद्रकांत पटेल समेत 4 पुलिस अधिकारी शामिल हैं। चंद्रकांत और एक पुलिस अधिकारी की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि वह रॉबरी की फर्जी FIR करवाकर भारतीयों को वीजा दिलाता था। पटेल ने अमेरिका के U-Visa में एक लूपहोल खोजा था जिसका वह फायदा उठाता था।

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    चंद्रकांत पटेल को 10 साल तक की जेल हो सकती है।

    नई दिल्ली| US Immigration Scam : क्या कोई व्यक्ति FIR को बिजनेस बना सकता है? तो आपका जवाब होगा नहीं। लेकिन अगर हम आपको बताएं कि भारतीय मूल के एक व्यक्ति ने FIR को ना सिर्फ "बिजनेस मॉडल" बनाया, बल्कि 10 साल तक "कारोबार" भी किया। और लाखों डॉलर भी छाप डाले। चौंकिए मत, यह सच है। मामला अमेरिका के लुइसियाना प्रांत का है। जहां भारतीय मूल के कारोबारी चंद्रकांत पटेल (Chandrakant Patel) ने अमेरिका के वीजा कानून (US Visa Scam) में एक लूपहोल ढूंढ लिया था।

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    इसके मुताबिक, चंद्रकांत फर्जी FIR करवाता और उनमें विक्टिम के तौर पर किसी भारतीय का नाम डलवाता। इन एफआईआर में लिखा जाता कि वह व्यक्ति अमेरिकी में गंभीर अपराध का शिकार हुआ है। इसके बाद चंद्रकांत वही एफआईआर भारत में उन लोगों को बेच देता जो अमेरिका आने का सपना देख रहे होते थे।

    बदले में हर एफआईआर के लिए 5 से 7 हजार डॉलर वसूल जाते। हालांकि, मामले मेें दिलचस्प मोड़ तब आया, जब चंद्रकांत एक ईमानदार अफसर के हत्थे चढ़ गया। जिसके बाद पुलिस ने चंद्रकांत को गिरफ्तार किया। साथ ही उसका साथ देने वाले चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया और एक पुलिसकर्मी की पत्नी को भी हिरासत में ले लिया।

    पुलिस ने बताया कि पटेल ने 10 साल में लाखों डॉलर कमाए और करीब 25 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति बना डाली। लुइसियाना के पश्चिमी जिले के कार्यवाहक अमेरिकी अटॉर्नी अलेक्जेंडर सी वैन हुक ने बताया कि चंद्रकात पटेल के ऊपर फर्जी रॉबरी यानी डकैती दिखाकर सैकड़ों भारतीयों को वीजा दिलाने में मदद की है। चंद्रकांत दो स्टोर और एक फास्टफूट रेस्टोरेंट का मालिक है। पुलिस ने उसके ऊपर 62 से ज्यादा मामले दर्ज किए हैं।

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    क्या है U-Visa, जिसका उठाया फायदा?

    अमेरिका के कानून के मुताबिक, अगर अमेरिका में कोई व्यक्ति किसी अपराध का शिकार होता है तो उसे U-Visa दिया जाता है। मामले में पीड़ित से मिलने के लिए उसके परिवार और रिश्तेदारों को आसानी से वीजा मिल जाता है। खास बात यह है कि किसी मामले में अगर केस लंबा चलता है, तो ग्रीन कार्ड और नागरिकता तक की राह खुल जाती है।

    पटेल ने U-Visa के इसी लूपहोल 'बिजनेस' बना लिया था। और उसका यह मॉडल कई लोगों के लिए अमेरिका आने का "शॉर्टकट" बन गया था, जो अब धोखाधड़ी का बड़ा मामला बन चुका है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि पटेल भी इसी लूपहोल के चलते अमेरिका पहुंचा था। जिसे बाद में उसने धंधा बना लिया। 

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    कैसे खुला मामला?

    ये मामला तब उजागर हुआ, जब तीन शहरों के चारों पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर हुआ और पटेल ने एक ईमानदार पुलिस चीफ को रिश्वत देने की कोशिश की। जिसके बाद उस अफसर ने रिश्वत देने के बजाय पूरा मामला एफबीआई को बता दिया। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट में सिर्फ पुलिस अफसर ही नहीं, उनकी पत्नियां भी शामिल थीं।

    फिर मामले की छानबीन की गई तो जांच एजेंसियों को ऐसे दर्जनों मामले मिले, जिनमें किसी तरह का अपराध हुआ ही नहीं था। लेकिन FIR में 'अपराध' और 'विक्टिम' लिखकर भारत से लोगों को बुलाया गया। जिसके बाद इस केस ने कई और सवाल खड़े कर दिए। 

    जैसे- भारतीय झूठे दस्तावेज के सहारे अमेरिका कैसे पहुंचे? क्या भारत में कोई सिंडिकेट एक्टिव है? और क्या क्या अमेरिका की इमिग्रेशन प्रणाली इतनी आसान है कि एक FIR पर नागरिकता मिल सकती है?

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    10 साल की जेल और 2.15 करोड़ का जुर्माना

    लुइसियाना के पश्चिमी जिले के कार्यवाहक अमेरिकी अटॉर्नी अलेक्जेंडर सी वैन हुक ने बताया किइन आरोपों में साजिश, आव्रजन धोखाधड़ी, डकैती, मेल फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग शामिल हैं। आरोपियों को 15 जुलाई को गिरफ्तार किया गया। अगर ये आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें साजिश रचने के लिए पांच साल तक की जेल हो सकती है।

    साथ ही, वीजा धोखाधड़ी के लिए 10 साल और मेल फ्रॉड के लिए 20 साल तक जे हो सकती है। पटेल को रिश्वतखोरी के लिए भी 10 साल तक की जेल हो सकती है। इतना ही नहीं उसे हर मामले में 2,50,000 डॉलर (2.15 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। 

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