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    विदेशी एजेंसी ने माना भारत का लोहा! FY26 में धमाकेदार विकास की कर दी भविष्यवाणी

    S&P ग्लोबल ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है, जो सामान्य मॉनसून, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और मजबूत घरेलू मांग पर आधारित है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति का अनुमान भी 6.5% है। रिपोर्ट में FY26 में खुदरा महंगाई 3.7% रहने की उम्मीद है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता जैसे जोखिम बने हुए हैं। S&P के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत में घरेलू मांग के कारण सबसे मजबूत प्रदर्शन कर रहा है।  

    By Ashish Kushwaha Edited By: Ashish Kushwaha Updated: Tue, 24 Jun 2025 08:41 PM (IST)
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    मॉनसून सामान्य, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और घरेलू मांग बनी रहेगी मजबूती की वजह

    नई दिल्ली। भारत की आर्थिक तस्वीर और बेहतर होती दिख रही है। रेटिंग एजेंसी S&P Global ने वित्त वर्ष 2025–26 (FY26) के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.5% कर दिया है। यह पहले के अनुमान से 0.2% अधिक है। एजेंसी ने यह संशोधन सामान्य मॉनसून की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और घरेलू मांग में मजबूती के आधार पर किया है।

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    यह अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के 6.5% ग्रोथ अनुमान के साथ मेल खाता है।

    • S&P ने FY26 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ बढ़ाकर 6.5% की।
    • मॉनसून सामान्य रहने, तेल की कीमत घटने और ग्रामीण मांग से उम्मीदें बढ़ीं।
    • MPC का भी 6.5% ग्रोथ का अनुमान, ग्रामीण गतिविधियों और सरकारी निवेश से मजबूती।
    • FY26 में खुदरा महंगाई 3.7% पर रह सकती है, खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में राहत।
    • भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता खतरा बने हुए।

     

    मॉनसून और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनी ताकत

    S&P ने कहा है कि सामान्य दक्षिण-पश्चिम मानसून से कृषि उत्पादन को सपोर्ट मिलेगा, जिससे ग्रामीण खपत और मांग में तेजी आने की उम्मीद है। इसके अलावा, सरकार की तरफ से इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेक्स (पूंजीगत निवेश) पर जोर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती देगा।

    महंगाई में राहत, लेकिन कोर इंफ्लेशन बना जोखिम

    रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2025 में खुदरा महंगाई (CPI) 75 महीनों के निचले स्तर 2.82% पर आ गई है। MPC ने FY26 के लिए महंगाई दर का अनुमान 3.7% लगाया है, जो वैश्विक ऊर्जा और खाद्य कीमतों में गिरावट के कारण है। हालांकि, कोर इंफ्लेशन में हल्की बढ़ोतरी जोखिम बनी हुई है।

    वैश्विक जोखिम और व्यापार असमंजस

    रिपोर्ट में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार नीतियों की अनिश्चितता और मौसम आधारित जोखिमों को प्रमुख नकारात्मक कारक बताया गया है। खासकर अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और ब्रिटेन के साथ FTA समझौते में देरी जैसी बातें चुनौती बनी हुई हैं।

    एशिया-पैसिफिक में भारत का प्रदर्शन सबसे मजबूत

    S&P ने एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की समीक्षा में कहा कि भारत जैसी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं घरेलू मांग के दम पर वैश्विक दबावों से काफी हद तक बची हुई हैं। वहीं चीन जैसे निर्यात-निर्भर देशों पर अमेरिकी टैरिफ और कमजोर आयात की वजह से असर दिख रहा है।