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    SEBI ने टोबैको केस में Dalmia ग्रुप के चेयरमैन संजय डालमिया पर गिराई गाज, बाजार से किया बैन; जुर्माना भी लगाया

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 02:32 PM (IST)

    SEBI ने डालमिया ग्रुप के चेयरमैन संजय डालमिया के खिलाफ आदेश पारित किया है। आदेश के अनुसार संजय को दो साल के लिए शेयर मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके साथ उन पर सेबी ने 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सेबी ने इस केस में और लोगों के भी खिलाफ फैसला सुनाया है।

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    SEBI ने टोबैको केस में Dalmia गुप के चेयरमैन संजय डालमिया पर गिराई गाज, बाजार से किया बैन

    नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI गोल्डन टोबैको लिमिटेड केस में एक नया आदेश पारित किया है। सेबी ने डालमिया ग्रुप के चेयरमैन संजय डालमिया के खिलाफ आदेश पारित किया है। GTL केस में वर्षों से धन के दुरुपयोग और वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है।

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    शुक्रवार को जारी यह आदेश कंपनी और उसके प्रमुख अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर संपत्ति के दुरुपयोग, गलत बयानों और खुलासों में चूक की विस्तृत जांच के बाद आया है। सेबी ने संजय डालमिया को बाजार से प्रतिबंधित कर दिया और जुर्माना भी लगाया।

    SEBI ने संजय डालमिया को बाजार से 2 साल के लिए किया प्रतिबंधित

    सेबी ने अपने आदेश में GTL के प्रवर्तक संजय डालमिया को दो साल की अवधि के लिए प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया। नियामक ने धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार व्यवहार निषेध विनियमों और लिस्टिंग दायित्व एवं प्रकटीकरण विनियमों के उल्लंघन के लिए उन पर 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

    इसके अलावा सेबी ने अनुराग डालमिया को डेढ़ साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है और उन पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। आदेश में जीटीएल के पूर्व निदेशक अशोक कुमार जोशी का भी नाम भी शामिल है। उन्हें एक साल के लिए बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है और उन पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

    क्या है पूरा मामला

    SEBI के आदेश के अनुसार, GTL ने वित्त वर्ष 2010 से वित्त वर्ष 2015 की अवधि के दौरान अपनी सहायक कंपनी जीआरआईएल को Loan और अग्रिम के रूप में 175.17 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए और अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इसे बकाया दिखाया। सेबी ने आरोप लगाया कि कुल अग्रिम में से केवल 36 करोड़ रुपये ही वापस किए गए और शेष धनराशि जीआरआईएल से प्रवर्तक-संबंधित संस्थाओं में स्थानांतरित कर दी गई।

    सेबी ने आरोप लगाया कि जीटीएल के प्रवर्तकों और निदेशकों ने शेयरधारकों को उचित जानकारी दिए बिना कंपनी की प्रमुख भूमि परिसंपत्तियों से संबंधित समझौते किए।

    इनमें भूमि की बिक्री या पट्टे के लिए तीसरे पक्षों के साथ किए गए समझौते शामिल थे, जो या तो कंपनी के सर्वोत्तम हित में नहीं किए गए थे या जिनका स्टॉक एक्सचेंजों के समक्ष पारदर्शी रूप से खुलासा नहीं किया गया था।

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