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    Madhabi Puri Buch: पूर्व सेबी चीफ माधबी बुच के खिलाफ कोर्ट ने दिया FIR का आदेश, तो SEBI ने कह दी ये बात

    SEBI ने मुंबई अदालत के आदेश के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की घोषणा की है जिसमें पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और अन्य अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। शिकायतकर्ता ने सेबी और बीएसई के अधिकारियों पर धोखाधड़ी और नियमों की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। SEBI ने इसे बेबुनियाद और आदतन मुकदमा बताया है और न्यायालय के आदेश को चुनौती देने की बात कही।

    By Jagran News Edited By: Chandan Kumar Updated: Sun, 02 Mar 2025 09:50 PM (IST)
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    मुंबई अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए SEBI कानूनी कदम उठाएगी।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व सेबी चीफ माधबी पूरी बुच समेत 5 लोगों पर FIR दर्ज करने के मुंबई अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए SEBI कानूनी कदम उठाएगी। सेबी ने इस बाबत बयान जारी कर कहा है कि वह कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी।

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    बता दें मुंबई की एसीबी अदालत ने सेबी की पूर्व अध्यक्ष माधवी पुरी बुच , तीन वर्तमान पूर्णकालिक सदस्यों और बीएसई के दो अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

    सेबी ने बयान में क्या कहा?

    रविवार को जारी एक बयान में पूंजी बाजार नियामक संस्था ने कहा कि शिकायतकर्ता "बेबुनियाद और आदतन मुकदमे दर्ज" करने वाले है और सेबी आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाएगी।

    बता दें इस माधबी पुरी बुच के खिलाफ शिकायत करने वाले शिकायतकर्ता एक स्थानीय पत्रकार हैं। शिकायतकर्ता ने माधबी पुरी बुच समेत 5 लोगों पर शेयर बाजार में धोखाधड़ी और नियमों की हीलाहवाली के आरोप लगाए हैं।

    "आवेदक को बेबुनियाद और आदतन मुकदमेबाज़ के रूप में जाना जाता है, जिसके पिछले आवेदनों को न्यायालय ने खारिज कर दिया था और कुछ मामलों में जुर्माना भी लगाया था। सेबी इस आदेश को चुनौती देने के लिए उचित कानूनी कदम उठाएगा और सभी मामलों में उचित विनियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।" SEBI का बयान

    सेबी के बयान में कहा गया है, "ये अधिकारी संबंधित समय पर अपने-अपने पदों पर नहीं थे, फिर भी अदालत ने बिना कोई नोटिस जारी किए या सेबी को तथ्य रिकॉर्ड पर रखने का कोई अवसर दिए बिना FIR की इजाजत दे दी।"

    अदालत ने आदेश में क्या कहा?

    अदालत के आदेश में कहा गया है, "आरोप नियामक प्राधिकरणों, विशेष रूप से भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की सक्रिय मिलीभगत से स्टॉक एक्सचेंज में एक कंपनी की धोखाधड़ी से सूचीबद्धता से संबंधित हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि सेबी के अधिकारी अपने वैधानिक कर्तव्य में विफल रहे, बाजार में हेरफेर की सुविधा दी और निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करने वाली कंपनी की लिस्टिंग की अनुमति देकर कॉर्पोरेट धोखाधड़ी को सक्षम बनाया।"

    शिकायतकर्ता ने क्या लगाए आरोप?

    शिकायतकर्ता ने अपने आरोप में कहा है कि एक कंपनी को 1992 के सेबी अधिनियम और उसके तहत नियमों और विनियमों के अनुपालन के बिना स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग की गई थी। आरोप में कहा गया है कि इस लिस्टिंग में नियामक एजेंसियां, खास तौर से सेबी की सक्रिय मिलीभगत रही है।

    शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सेबी के अधिकारियों अपनी वैधानिक जिम्मेदारी निभाने में नाकामयाब रहे हैं। आरोप लगाया गया कि सेबी ने बाजार में हेरफेर को शह दिया और एक ऐसे कंपनी को लिस्टिंग की इजाजत दिया जो तय मानदंडों को पूरा नहीं करती थी।

    शिकायतकर्ता के इन आरोपों को कोर्ट ने भी अपने आदेशों में जिक्र किया है। शिकायतकर्ता ने कहा कि पुलिस स्टेशन और संबंधित नियामक निकायों से कई बार संपर्क करने के बावजूद, उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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