कैसे बंद हुई Tata Indicom, Docomo ने क्यों छोड़ा साथ, आखिर किस मजबूरी में टाटा ग्रुप ने बेचा टेलिकॉम बिजनेस
साल 2002 में टाटा टेलि सर्विसेज ने भारत में CDMA मोबाइल और फिक्स्ड-लाइन सर्विसेज ऑफर करने के लिए टाटा इंडिकॉम ब्रांड लॉन्च किया था। 2000 के दशक में कंपनी ने देश के ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई। साल 2011 में टाटा इंडिकॉम का डोकोमो ब्रांड में विलय कर दिया गया लेकिन 2017 में टाटा टेलीसर्विसेज अपनी यह टेलिकॉम यूनिट भारती एयरटेल को बेचकर मोबाइल कारोबार से बाहर हो गई।

नई दिल्ली। टाटा समूह (Tata Group Business), भारत का सबसे प्रतिष्ठित और पुराना औद्योगिक घराना है। इस समूह की कुल 30 कंपनियां हैं जो अलग-अलग कारोबार में सक्रिय है। 150 साल के इतिहास में टाटा समूह ने कई बिजनेस में हाथ डाला और इंडस्ट्री में बड़ी पहचान बनाई, लेकिन एक बिजनेस ऐसा भी रहा, जहां टाटा ग्रुप को निराशा का सामना करना पड़ा। यह बिजनेस टेलिकॉम इंडस्ट्री (Tata Group Telecom Company) से जुड़ा था। टाटा इंडिकॉम के बारे में आपने जरूर देखा और सुना होगा, आज से करीब 15 साल पहले टाटा इंडिकॉम, देश की चुनिंदा टेलिकॉम कंपनियों में से एक थी।
लेकिन, आखिर ऐसा क्या हुआ कि इस कंपनी अचानक गुम हो गई। हैरान करने वाली बात है कि टाटा ग्रुप की इस टेलिकॉम कंपनी ने करीब 15 साल तक अपनी सेवाएं दीं, फिर एक वक्त ऐसा आया कि इस कंपनी को बंद करना पड़ा। आइये आपको बताते हैं आखिर टाटा समूह ने इस टेलिकॉम कंपनी को लेकर यह फैसला क्यों लिया?
2002 में आगाज, 2017 में अंत
टाटा टेली सर्विसेज़ ने भारत में CDMA मोबाइल और फिक्स्ड-लाइन सर्विसेज ऑफर करने के लिए टाटा इंडिकॉम ब्रांड लॉन्च किया था। 2002 के आसपास भारतीय बाजार में इस कंपनी ने एंट्री ली। दरअसल, इससे पहले टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड ने 2002 में ह्यूजेस टेलीकॉम का अधिग्रहण किया था, और इसके बाद टाटा इंडिकॉम अस्तित्व में आई।
2000 के दशक में रिलायंस कम्युनिकेशन, भारती एयरटेल और आइडिया जैसे बड़े प्लेयर्स के साथ टाटा इंडिकॉम ने देश के ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई। उस समय बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन व काजोल टाटा इंडिकॉम के ब्रांड एबेंसडर बने और उनके एक एड ने कंपनी को काफी लोकप्रियता दिलाई।
2011 में इंडिकॉम बनी टाटा डोकोमो
2002 से लगातार 8 साल तक मोबाइल सर्विसेज देने के बाद 2011 के आसपास टाटा इंडिकॉम का डोकोमो ब्रांड में विलय कर दिया गया। हालांकि, इससे पहले 2008 में कंपनी जीएसएम सर्विसेज शुरू कर चुकी थी। लेकिन, जापान की कंपनी एनटीटी डोकोमो के साथ साझेदारी के बाद मानों कंपनी के बुरे दिन शुरू हो गए। साल 2014 में डोकोमो ने इस ज्वाइंट वेंचर से बाहर निकलने का फैसला लिया। इसके बाद 2017 में टाटा टेलीसर्विसेज अपनी यह टेलिकॉम यूनिट भारती एयरटेल को बेचकर मोबाइल कारोबार से बाहर हो गई।
क्या रही कंपनी बंद होने की वजह
टाटा इंडिकॉम या टाटा डोकोमो के बाद होने की कुछ खास वजह रहीं। इनमें कंपनी को CDMA सेवाओं में गिरावट, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और महंगी सीडीएमए तकनीक पर निर्भरता के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, जिससे कंपनी के ऊपर भारी कर्ज हो गया व उसकी देनदारियां बढ़ गईं। ऐसे में जीएसएम के साथ कॉम्पिटिशन करने में कंपनी असमर्थता हो गई। बता दें कि टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड, वायर्ड और वायरलेस टेलिकॉम सर्विसेज के कारोबार में लगी हुई है। इस कंपनी का मार्केट कैप करीब 11000 करोड़ रुपये है।
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