ये 'सरकारी कंपनियां बेच' सरकार खजाने में भर सकती है ₹10 लाख करोड़ का खजाना? CII ने बताया ये मास्टरप्लान!
सीआईआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण का सुझाव दिया है। उनका मास्टरप्लान तीन साल में सरकारी हिस ...और पढ़ें

नई दिल्ली। उद्योग संगठन सीआइआइ ने वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट के लिए सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र का निजीकरण करके संसाधन जुटाने चाहिए। इसके लिए ऐसी रणनीति अपनाई जाए जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी से दक्षता बढ़े, नई प्रौद्योगिकी आए और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत हो। इससे पूंजीगत खर्च और विकास संबंधी जरूरी योजनाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, खासकर जब दुनिया की अर्थव्यवस्था अनिश्चितता से भरी है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) ने केंद्र से तीन साल की अवधि के लिए निजीकरण करने की योजना का एलान करने का आह्वान किया है, जिसमें यह बताया जाए कि इस अवधि के दौरान किन उद्यमों का निजीकरण किया जा सकता है। इसमें तर्क दिया गया कि इस पारदर्शिता से निवेशकों की गहरी भागीदारी और अधिक यथार्थवादी मूल्यांकन और मूल्य निर्धारण को प्रोत्साहन मिलेगा, जो निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने में योगदान देगा।
सीआइआइ ने कहा, 'सरकार चरणबद्ध तरीके से सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसई) में अपनी हिस्सेदारी को शुरू में 51 प्रतिशत तक कम कर सकती है, जिससे वह सबसे बड़ी एकल शेयरधारक बनी रहेगी और बाजार में महत्वपूर्ण मूल्य का प्रवाह होगा। समय के साथ, इस हिस्सेदारी को और कम करके 33 से 26 प्रतिशत के बीच लाया जा सकता है।' सीआइआइ के विश्लेषण के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के 78 सूचीबद्ध उपक्रमों में सरकार की हिस्सेदारी को घटाकर 51 प्रतिशत करने से लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है।
सूचीबद्ध सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में सरकार की हिस्सेदारी को सोच-समझकर 51 प्रतिशत या उससे भी कम करना एक व्यावहारिक कदम होगा और यह रणनीतिक नियंत्रण और मूल्य सृजन के बीच संतुलन बनाता है। विनिवेश से मिलने वाली लगभग 10 लाख करोड़ रुपये की पूंजी सामाजिक ढांचे के विकास को तेज करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगी। -चंद्रजीत बनर्जी, महानिदेशक, सीआइआइ
75 प्रतिशत से कम सरकारी हिस्सेदारी वाले उद्यमों का पहले विनिवेश किया जाए
रोडमैप के पहले दो सालों के दौरान 55 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का विनिवेश किया जाए, जिसमें सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत या उससे कम है। इन उद्यमों में सरकारी हिस्सेदारी घटाने से 4.6 लाख करोड़ रुपये एकत्र होंगे। अगले चरण में 75 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी हिस्सेदारी वाले 23 सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश किया जा सकता है, जिससे 5.4 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। निजीकरण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के चुनने में मांग आधारित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हुए उद्योग संगठन ने कहा कि अभी सरकार बिक्री के लिए किसी खास उद्यम की पहचना करती है और बाद में निवेशकों को बुलाती है। हालांकि, जब वैल्यूएशन नहीं मिलता है तो विनिवेश की प्रक्रिया रुक जाती है। सीआइआइ ने इस क्रम को उलटने का सुझाव दिया, जिसमें पहले निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जाए और फिर उन एंटरप्राइजेज को विनिवेश के लिए चुना जाए। इस तरह का ²ष्टिकोण अपनाने से काम आसान होगा और कीमत बेहतर मिलेगी।

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