Budget 2026: बजट में स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा तोहफा? सरकार से 'सस्ते कर्ज' की उठी मांग
बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बधान के अनुसार, आगामी बजट में पूंजीगत खर्च 12-12.50 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ने की उम्मीद है, साथ ही अगले साल 9% जीडी ...और पढ़ें

नई दिल्ली। बैंक आफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री सोनल बधान ने कहा है कि आगामी बजट में अगले साल के नौ प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का लक्ष्य तय किया जा सकता है। साथ ही पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर 12-12.50 लाख करोड़ रुपये किए जाने की उम्मीद है। एक साक्षात्कार में सोनल ने कहा, हमें उम्मीद है कि सरकार चालू वित्त वर्ष में अपने राजकोषीय घाटे के 4.4 फीसदी लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी। जहां तक अगले वित्त वर्ष यानी 2026-27 की बात है तो राजकोषीय घाटे को 30-40 आधार अंक कम करके इसे 4-4.1 फीसदी किया जा सकता है।
चालू वित्त वर्ष के दौरान सरकार नवंबर तक बजट लक्ष्य का लगभग 60 प्रतिशत खर्च कर चुकी है। एक और ध्यान देने वाली जानकारी अगले साल के लिए नामिनल जीडीपी (बाजार दरों पर) का अनुमान है। उम्मीद की जा रही है कि यह नंबर लगभग 10 प्रतिशत होगा। उन्होंने कहा कि आयकर और अप्रत्यक्ष करों में किसी तरह के कटौती की संभावना नहीं है, क्योंकि पिछले साल के बजट और जीएसटी दरों को संशोधित करने से उन चिंताओं को काफी हद तक दूर कर दिया गया है।
बैंक आफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री ने बताया कि बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच आने वाले बजट में एमएसएमई और निर्यात आधारित सेक्टर को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है। पिछले साल कस्टम ड्यूटी स्लैब घटाकर आठ कर दिए गए थे। अनुपालन को आसान बनाने के लिए भी कदम उठाए गए थे।
इस साल इसमें और संशोधन किया जा सकता है और कच्चे माल पर सीमा शुल्क में कमी की जा सकती है, जिससे औसत सीमा शुल्क दर और कम हो जाएगी। उन्होंने बताया कि एमएसएमई और निर्यातकों के लिए इंटरेस्ट सबवेंशन स्कीम (ब्याज अनुदान योजना) का भी एलान किया जा सकता है। 2026 में मौद्रिक नीति समिति के अनुमान पर बैंक आफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की आखिरी बैठक में आरबीआइ वृद्धि को और बढ़ावा देने के लिए रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती कर सकती है।
स्टार्टअप्स बोले-कर्ज तक आसान पहुंच सुनिश्चित करे सरकार
सभी क्षेत्रों के स्टार्टअप्स ने सरकार से आगामी बजट में शुरुआती उद्यम को मदद करने और लंबे समय तक वृद्धि को बनाए रखने के लिए इंसेंटिव, कर्ज तक आसान पहुंच और आसान अनुपालन नियमों का एलान करने की अपील की है। उद्यमियों ने कहा कि कई सरकारी स्कीमें पहले से लागू हैं, लेकिन उन्हें लागू करने में कमियां हैं। खासकर फं¨डग तक पहुंच, कराधान और नियामकीय अनुपालन नए स्टार्टअप के लिए चुनौती बनी हुई है।

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