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    Budget 2026 : वेनुजुएला जैसे बढ़ रहे कई भूराजनीतिक जोखिम! क्या इस बीच भारत बजट 2026 में बढ़ाएगा रक्षा खर्च?

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 07:27 PM (IST)

    वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और महाशक्तियों की खींचतान के कारण भारत के रक्षा खर्च में वृद्धि की संभावना है। बजट 2026 में रक्षा आवंटन में 20-25% की बढ़ोतरी ...और पढ़ें

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    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और महाशक्तियों के बीच खींचतान ने एक बार फिर हथियारों की दौड़ तेज कर दी है। रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-वेनेजुएला संकट और ईरान व ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक रुख ने वैश्विक जोखिमों को उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इस बदलते परिदृश्य के बीच, भारत के आगामी केंद्रीय बजट 2026 में रक्षा खर्च में भारी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत न केवल बाहरी खतरों बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए भी अपना रक्षा कोष बढ़ा सकता है।

    वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका का आक्रामक रुख

    हाल ही में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस घटनाक्रम ने आशंका पैदा कर दी है कि क्या चीन भी ताइवान को लेकर कोई ऐसा ही कदम उठा सकता है?

    इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, "चीन ताइवान को लैटिन अमेरिका में अमेरिकी व्यवहार के चश्मे से नहीं देखता। बीजिंग के लिए ताइवान संप्रभुता का मुद्दा है, जो क्षेत्रीय सैन्य संतुलन और अमेरिकी गठबंधनों की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है।" हालांकि, वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई वाशिंगटन की निर्णायक क्षमता का संकेत जरूर देती है।

    क्या भारत बढ़ाएगा अपना रक्षा बजट?

    भारत के लिए चुनौतियां द्वि-आयामी हैं। एक ओर चीन की तेजी से बढ़ती सैन्य ताकत है, तो दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ लगी सीमाओं पर निरंतर चौकसी की जरूरत।

    बजट 2026 से जुड़ी प्रमुख संभावनाएं

    1. पिछले साल सरकार ने रक्षा के लिए ₹6.8 लाख करोड़ आवंटित किए थे।
    2. भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए इस साल इसमें 20% से 25% तक की वृद्धि संभव है।
    3. करीब ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक की राशि केवल सेना के आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद पर खर्च हो सकती है।
    4. ड्रोन, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष युद्ध जैसी नई तकनीकों पर निवेश बढ़ने की उम्मीद है।

    रक्षा खर्च के पीछे का 'फाइव-पॉइंट फ्रेमवर्क'

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का रक्षा बजट इन 5 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित होगा

    • चीन को दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती के रूप में देखना।
    • चीन और पाकिस्तान के साथ 'टू-फ्रंट' युद्ध की तैयारी।
    • 'मेक इन इंडिया' के तहत हथियारों का स्वदेशीकरण।
    • हिंद महासागर में नौसैनिक विस्तार।
    • तकनीक-आधारित युद्ध क्षमता (ड्रोन, स्पेस और साइबर) का विकास।

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