'यह हिचकिचाने का समय नहीं, बल्कि....' 1973 में वित्त मंत्री ने क्यों कहा था ऐसा? ये है भारत के Black Budget की पूरी कहानी
यह लेख बताता है कि तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण द्वारा प्रस्तुत 1973-74 के बजट को भारत का 'काला बजट' (Black Budget History) क्यों कहा जाता है ...और पढ़ें

1973 के बजट को कहा जाता है ब्लैक बजट
नई दिल्ली। पिछले साल केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 50.65 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। मगर क्या आप जानते हैं कि साल 1973 में भारत का बजट कितना बड़ा था? उस साल तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण ने 4,831 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। 1973 के बजट को काला बजट (Black Budget 1973) भी कहा जाता है। मगर क्यों, आइए जानते हैं।
ये रहे हैं खास बजट
मनमोहन सिंह ने 1991 में लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन और ग्लोबलाइजेशन की शुरुआत की। उस बजट ने लाइसेंस राज खत्म करके भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया। वहीं पी. चिदंबरम के बजट को टैक्सपेयर्स को मिली राहत के लिए "ड्रीम बजट" कहा गया, क्योंकि उन्होंने पर्सनल और कॉर्पोरेट टैक्स कम किया।
लेकिन इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में 1973-74 के बजट को भारतीय आर्थिक इतिहास में "ब्लैक बजट" के नाम से जाना जाता है।
क्यों कहलाता है ब्लैक बजट?
तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण द्वारा पेश किए गए 1973 के बजट को 550 करोड़ रुपये के भारी राजकोषीय घाटे के कारण ब्लैक बजट कहा गया। यह एक बड़ा आंकड़ा था जिसने देश की आर्थिक चुनौतियों को उजागर किया।
राजकोषीय घाटा सरकार की कुल आय और कुल खर्च के बीच का अंतर होता है और किसी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत को दर्शाता है। अधिक बजट घाटा देश की अर्थव्यवस्था के मुश्किल में होने का संकेत देता है। इसलिए, 550 करोड़ रुपये का बजट घाटा उस समय एक बड़ा मुद्दा बन गया था।
कई वजहों से अर्थव्यवस्था को लगा था झटका?
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध ने भारत के संसाधनों को नुकसान पहुंचाया था। युद्ध के बाद के खर्चे भी बड़ी चुनौती थे, जिसमें 1 करोड़ से ज्यादा शरणार्थियों के पुनर्वास का काम शामिल था। इसने सरकारी खजाने पर बहुत ज्यादा बोझ डाला।
वहीं रक्षा खर्च 1972 के 1408 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से बढ़कर 1,600 करोड़ रुपये हो गया था। इनके अलावा 1972 का सूखा, जो दशकों में सबसे खराब था, ने कृषि क्षेत्र को बहुत तगड़ा नुकसान पहुंचाया और ग्रामीण इलाकों में खाने की कमी हो गयी थी। भारत के शहरी इलाकों में बिजली की कमी हुई और बेरोजगारी में भी बढ़ोतरी हुई।
तब यशवंतराव चव्हाण ने संसद में कहा था: "यह हिचकिचाने का समय नहीं है, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए साहसिक कदम उठाने का समय है।"
सोर्स - India Budget

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।