ITR Filing 2025 करने से पहले समझें ड्यू डेट और लास्ट डेट में अंतर, नहीं तो चुकाना पड़ सकता है भारी जुर्माना
ITR Filing 2025 में अब 20 दिन का समय भी नहीं रह गया है। ऐसे में टैक्सपेयर अब जल्द से जल्द आईटीआर फाइल करना चाहते हैं ताकि अंतिम समय में होने वाली भागदौड़ से बचा जा सके। अगर आप भी आईटीआर फाइल कर रहे हैं तो इससे पहले समझ लें कि ड्यू डेट और लास्ट डेट में क्या अंतर है। बहुत से लोग इसे समझने में गलती कर बैठते हैं।

नई दिल्ली। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR Filing 2025) फाइल करने की तारीख नजदीक आ रही है। इस बार आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर (ITR Filing 2025 Last date) है, हालांकि ये इसकी लास्ट डेट नहीं है। बहुत से लोगों को कन्फ्यूजन रहती है कि 15 सितंबर 2025 आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख है, लेकिन ऐसा नहीं है।
15 सितंबर आईटीआर फाइलिंग करने की ड्यू डेट है। चलिए आज समझते हैं कि ड्यू डेट और लास्ट डेट में क्या अंतर होता है।
ड्यू डेट और लास्ट डेट में अंतर
ड्यू डेट वे तारीख है, जिसमें अगर टैक्सपेयर आईटीआर फाइल करता है, तो उसे कोई पेनल्टी नहीं देनी पड़ती।
- इस बार आईटीआर फाइल करने की ड्यू डेट 15 सितंबर 2025 रखी गई है।
- वहीं आईटीआर फाइल करने की लास्ट लेट 31 दिसंबर 2025 है। इसका मतलब है कि आप इस तारीख के बाद आईटीआर नहीं भर सकते।
अब जानते हैं कि अगर किसी ने ड्यू डेट (15 सितंबर) के बाद और लास्ट डेट (31 दिसंबर) से पहले आईटीआर फाइल किया, तो उसे कितना जुर्माना भरना पड़ सकता है।
कितना लगेगा जुर्माना?
- अगर किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उसे 5000 रुपये की लेट फीस देनी होगी।
- अगर यहीं टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से कम है, तो उसे 1000 रुपये लेट फीस के रूप में देने होंगे।
समय पर क्यों भरना चाहिए ITR?
अगर आईटीआर फाइल समय रहते हो जाए, तो टैक्सपेयर भारी जुर्माने से बच सकता है। वहीं जल्दबाजी में होने वाली गलतियां भी नहीं होती। समय पर आईटीआर फाइल करने से आप आराम से हर एक प्रोसेस को क्रोस चेक कर सकते हैं, ताकि रिफंड मिलने में परेशानी न हो।
इसके साथ ही अगर आप ड्यू डेट (15 सितंबर) के बाद आईटीआर फाइल करते हैं, तो रिफंड का ब्याज भी कम हो सकता है।
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