SBI-HDFC-ICICI बैंक का अमेरिका की S&P ने माना लोहा; बढ़ाई रेटिंग, जानें ग्राहकों को इससे क्या फायदा
अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल (SP Global ratings upgrade) ने भारत के 10 प्रमुख बैंकों और वित्तीय कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में बढ़ोतरी की है जिसमें SBI HDFC बैंक एक्सिस बैंक और ICICI बैंक शामिल हैं। यह कदम भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 18 साल बाद ‘BBB’ करने के बाद आया है।

नई दिल्ली। अमेरिकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी S&P ग्लोबल ने शुक्रवार को भारत के 10 प्रमुख बैंकों और वित्तीय कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग में बढ़ोतरी की है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), HDFC Bank, Axis Bank, ICICI Bank, कोटक महिंद्रा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक समेत बजाज फाइनेंस, टाटा कैपिटल और L&T फाइनेंस शामिल हैं।
यह कदम उस समय आया है जब S&P ने एक दिन पहले ही 18 साल बाद भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को बढ़ाकर ‘BBB’ कर दिया था।
S&P ने कहा कि भारत की वित्तीय संस्थाएं देश की मजबूत आर्थिक विकास दर का लाभ उठाती रहेंगी। घरेलू फोकस और खराब लोन वसूली में सुधार जैसे संरचनात्मक बदलावों से बैंकों की स्थिति और मजबूत हुई है। एजेंसी को उम्मीद है कि अगले 12–24 महीनों में भारतीय बैंक अच्छी एसेट क्वालिटी, बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी और मजबूत कैपिटलाइजेशन बनाए रखेंगे।
S&P का मानना है कि दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) ने भुगतान के तरीके और कानून के पालन में सुधार किया है, जिससे लेनदारों की स्थिति मजबूत हुई है और क्रेडिट कल्चर को बढ़ावा मिला है।
ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?
1. बैंक की मजबूती में इजाफा
उच्च क्रेडिट रेटिंग का मतलब है कि बैंक वित्तीय रूप से ज्यादा स्थिर हैं, जिससे जमाकर्ताओं और निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।
2. बेहतर लोन शर्तों की संभावना
जब बैंकों के उधार लेने की लागत घटती है, तो वे ग्राहकों को सस्ते लोन या होम लोन पर बेहतर ब्याज दर दे सकते हैं (हालांकि यह हर बैंक की नीति पर निर्भर करता है)।
3. निवेशकों और जमाकर्ताओं का भरोसा बढ़ना
मजबूत रेटिंग से बैंक ज्यादा निवेश आकर्षित कर सकते हैं, जिससे ग्राहकों को नए प्रोडक्ट्स और बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं।
4. सेवाओं में सुधार
वित्तीय रूप से मजबूत बैंक टेक्नोलॉजी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और कस्टमर सपोर्ट में ज्यादा निवेश कर सकते हैं।
5. तुरंत ब्याज दरों में बदलाव नहीं
आम बचत खातों या एटीएम फीस जैसी रोज की सेवाओं में तुरंत बदलाव की संभावना कम है। यह बदलाव लंबी अवधि में असर दिखाएंगे।
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