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    तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रख ग्रेटर कैलाश में बुजुर्ग महिला से 7 करोड़ ठगे, बच्चों से भी न करने दी बात; तुड़वाई एफडी

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 09:28 PM (IST)

    दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश पार्ट-एक में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला से सात करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई। जालसाजों ने उन्हें तीन दिन तक 'डिजिटल अरेस ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्मक तस्वीर।

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    मुहम्मद रईस, दक्षिणी दिल्ली। ग्रेटर कैलाश पार्ट-एक में अकेली रह रही 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला से सात करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने उन्हें तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा। दो एफडी तुड़वाने के लिए विवश किया। इस तरह जालसाजों ने अलग-अलग खातों में लगभग सात करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।

    पीड़िता की शिकायत पर साइबर सेल (आईएफएसओ) ने संबंधित धारा में केस दर्जकर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, मामले में कोई भी गिरफ्तारी नहीं की गई है। पांच दिन पहले सीआर पार्क थाना क्षेत्र स्थित ग्रेटर कैलाश पार्ट-दो में एनआरआइ बुजुर्ग दंपती को 18 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 14.85 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया था।

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि बुजुर्ग महिला ग्रेटर कैलाश इलाके में अकेली रहती है। उसका परिवार फर्नीचर के कारोबार से जुड़ा हुआ है। महिला का बेटा ऑस्ट्रेलिया और बेटी गुरुग्राम में रहती है।

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि उसके पास पांच जनवरी को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और कहा कि गत दिनों महिला के नाम पर एक सिम कार्ड जारी कराया गया है। इस सिम कार्ड का इस्तेमाल मनी लांड्रिंग और दूसरे गैरकानूनी कामों के लिए किया गया है।

    यह भी पढ़ें- दिल्ली में 78 साल की बुजुर्ग को 10 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 2.20 करोड़, पांच साइबर ठग दबोचे

    दो दिनों तक महिला हर बात से इनकार करती रही और जालसाजों पर विश्वास नहीं किया। फिर उन्होंने उसे गिरफ्तार करने की धमकी दी और उस पर मनी लांड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। आरोपित ने बुजुर्ग को वीडियो काल पर लेकर उसके काॅल को अपने साथियों के साथ जोड़ा। आरोपित के साथियों ने भी बुजुर्ग को धमकाया और डराया। आरोपितों ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजने की बात कहीं, जिस पर महिला ने बताया कि वह अकेली रहती है और उसके घर में कोई नहीं है।

    जालसाजों ने इसी बात कर फायदा उठाया और महिला को तीन दिन तक वीडियो काॅल पर रखा। आरोपित महिला की हर गतिविधियों पर नजर रखते थे। बुजुर्ग ने अपने बच्चों से बात करने के लिए कहा तो उन्होंने उसे बताया कि वह डिजिटल अरेस्ट हैं और गिरफ्तारी के दौरान बच्चों से बात करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

    दूसरे फोन के जरिए ट्रांसफर कराते रहे पैसे

    पुलिस अधिकारी के मुताबिक बुजुर्ग महिला के पास दूसरा फोन उपलब्ध था। आरोपितों ने इसी फोन की मदद से बुजुर्ग को उनके बताए गए अकाउंट में पैसा ट्रांसफर करने के लिए कहा। पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला के अकाउंट से नौ जनवरी से 12 जनवरी के बीच तीन बड़े ट्रांजैक्शन किए गए। उसने इन तीन ट्रांजैक्शन में चार करोड़ रुपये, 1.30 करोड़ रुपये और 1.60 करोड़ रुपये भेजे। महिला ने यह पैसे भेजने के लिए अपने बैंक अकाउंट और दो फिक्स्ड डिपाॅजिट से पैसे निकाले।

    बच्चों ने स्पेशल सेल से किया संपर्क

    पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को महिला के बच्चों ने खुद उससे संपर्क किया। बच्चों से बात करने के दौरान महिला ने उन्हें आपबीती सुनाई। इसके बाद बच्चों ने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में संपर्क किया और शिकायत दी। स्पेशल सेल की आइएफएसओ यूनिट में एफआईआर दर्ज की गई है।

    बुजुर्गों का हाल लेने नहीं पहुंचती पुलिस

    सोसायटियों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की निगरानी की व्यवस्था दिल्ली पुलिस ने कर रखी है। इसके तहत बीट के पुलिसकर्मियों को अपने क्षेत्र में अकेले रहने वाले बुजुर्गों का उनके घर जाकर या फोन पर रोज हाल लेना होता है। पर इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया। तीन दिन तक बुजुर्ग डिजिटल अरेस्ट रही। इस बीच यदि पुलिस उनके घर पहुंचती या फोन करती तो शायद जालसाजों के चंगुल से बच सकती थीं।

    "बुजुर्ग ने तीन से चार दिन में आरोपित को पैसे भेजे हैं। हमने आरोपितों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है। उनके अकाउंट की जानकारी हमारे पास हैं और मामले की जांच की जा रही है। अभी तक की जांच में बैंक अकाउंट नए लग रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि इन अकाउंट का इस्तेमाल किसी और मामले में पहले नहीं किया गया है।"

    -विनीत कुमार, पुलिस उपायुक्त, आईएफएसओ।

    हाल ही में डिजिटल अरेस्ट करके किए गए ठगी के मामले

    • 10 जनवरी 2026: सीआर पार्क थाना क्षेत्र स्थित ग्रेटर कैलाश-दो में एनआरआइ दंपती को 18 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और उनसे 14.85 करोड़ रुपये ठग लिए।
    • दिसंबर 2025: साइबर जालसाजों ने दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर एक 85 साल की महिला को एक महीने तक ''डिजिटल अरेस्ट'' में रखा और उनसे करीब 1.3 करोड़ ठग लिए।
    • नवंबर 2025: स्कैमर्स ने पुलिस अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग व्यक्ति से करीब एक करोड़ ठग लिए और उन्हें और उनकी पत्नी को एक सप्ताह तक डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
    • सितंबर 2025: गुलमोहर पार्क के एक 73 वर्षीय रिटायर्ड बैंकर को मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर जालसाजों ने लगभग एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे 23 करोड़ ठग लिए।
    • मार्च 2025: ग्रेटर कैलश-II के एक 90 वर्षीय बुजुर्ग से टेलीकाम रेगुलेटरी अथारिटी आफ इंडिया और महाराष्ट्र पुलिस के अधिकारी बनकर जालसाजों ने 3.4 करोड़ ठग लिए।
    • अक्टूबर 2024: साउथ वेस्ट दिल्ली के एक बड़े इंस्टीट्यूट में इकोनामिक्स पढ़ाने वाले एक जापानी प्रोफेसर से ला एनफोर्समेंट अधिकारी बनकर जालसाजों ने लगभग सात लाख रुपये ठग लिए।

    बुजुर्गों को डराना आसान इसलिए जालसाज कर रहे टारगेट

    साइबर विशेषज्ञ पवन दुग्गल बताते हैं कि डिजिटल अरेस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अपराध है, जिसमें जालसाज लोगों की सारी जानकारी एआई से हासिल करते हैं। ऐसे में लोगों को कंजूसी और शक की आदत डालनी होगी। जब लोग शक की आदत डालेंगे तो जालसाजों को इन्हें झांसे लेना मुश्किल होगा।

    वहीं, अगर बुजुर्गों के साथ ठगी की बात करें तो बुजुर्गों को टारगेट करना आसान होता है क्योंकि वह जल्दी डर जाते हैं और घबराकर अपनी निजी जानकारी या डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आते हैं और करोड़ों रुपये गंवा देते हैं।

    ऐसे कई मामले हैं जिनमें बुजुर्गों को तकनीकी जानकारी कम होती है और वह डर में आकर झांसे में आए। ऐसे में जरा भी आशंका होते ही फोन डिस्कनेक्ट की आदत डालनी होगी। साइबर अपराध का गोल्डन एज दौर शुरू हो गया है, ऐसे में लोगों को सतर्क, सावधान होना पड़ेगा।

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