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    दिल्ली ZOO में फैला बर्ड फ्लू, दर्शकों के लिए इस दिन तक चिड़ियाघर बंद

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 09:09 AM (IST)

    नई दिल्ली के चिड़ियाघर में बर्ड फ्लू (H5N1) का मामला सामने आने के बाद 30 अगस्त 2025 से इसे अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है। यह फैसला पेंटेड स्टार्क की मौत के बाद लिया गया जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्रशासन ने सभी पक्षियों की निगरानी बढ़ा दी है और कुछ सावधानियां बरती जा रही हैं।

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    चिड़ियाघर में फैला बर्ड फ्लू, अनिश्चितकाल के लिए दर्शकों के लिए किया गया बंद। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के मामले सामने आने के बाद, जन स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजर चिड़ियाघर को 30 अगस्त 2025 से दर्शकों के लिए अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।

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    चिड़ियाघर प्रशासन ने यह कदम पेंटेड स्टार्क (जांघिल) की मौत के बाद उठाया है। जांघिल की मौत के नमूने भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भेजे गए, जहाँ 28 अगस्त 2025 को बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई।

    चिड़ियाघर प्रशासन ने कहा कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए अगले 21 दिन महत्वपूर्ण होंगे। सभी बंदी और प्रवासी पक्षियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और उन्हें अलग रखा जा रहा है। शेर और बाघ के शावकों पर भी विशेष रूप से नज़र रखी जा रही है।

    चूँकि पिछले रिकॉर्ड बताते हैं कि बड़े चिड़ियाघरों में एवियन फ्लू के कारण बाघों की भी मौत हुई है। हाल ही में, दिल्ली चिड़ियाघर में रॉयल बंगाल टाइगर के छह में से पाँच शावकों की संक्रमण और कमजोरी के कारण मौत हो गई।

    चिड़ियाघर के अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा जारी एवियन इन्फ्लूएंजा की तैयारी, नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु कार्य योजना (संशोधित-2021) के दिशा-निर्देशों के तहत तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए चिड़ियाघर में गहन निगरानी, ​​सख्त जैव-सुरक्षा उपाय और विशेष प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं ताकि संक्रमण अन्य पशु-पक्षियों और कर्मचारियों में न फैले। उन्होंने बताया कि फ्लू के नियंत्रण के उपाय घरेलू मुर्गियों के लिए अपनाए गए उपायों के समान ही होंगे। स्वस्थ और गैर-संक्रमित विशेष प्रजातियों को नहीं मारा जाएगा।

    आगंतुकों का प्रवेश तुरंत रोक दिया गया है। अगले 21 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

    बर्ड फ्लू का अब तक तीसरा मामला 

    चिड़ियाघर में अब तक यह तीसरी बार बर्ड फ्लू का मामला सामने आया है। जिसके कारण चिड़ियाघर को बंद करना पड़ा है। चिड़ियाघर में पहली बार बर्ड फ्लू अक्टूबर 2016 में फैला था। जिसके बाद चिड़ियाघर चार महीने के लिए बंद कर दिया गया था। इस दौरान पेंटेड स्टॉर्क, बत्तख और पेलिकन समेत 70 से ज़्यादा पक्षियों की बर्ड फ्लू से मौत हो गई।

    इसके बाद 16 जनवरी 2021 को चिड़ियाघर में एक बार फिर बर्ड फ्लू फैल गया। तब भी चिड़ियाघर को तीन महीने के लिए बंद कर दिया गया था। अब तीसरी बार बर्ड फ्लू फैलने के कारण इसे 30 अगस्त 2025 से अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।

    यह कब बंद हुआ 

    वर्ष कारण अवधि
    2016 एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) अक्टूबर 2016 से जनवरी 2017 तक बंद
    2020 - 2021 कोविड-19 और बर्ड फ्लू मार्च 2020 से अगस्त 2021 तक बंद
    2021 कोविड-19 अप्रैल 2021 में थोड़े समय के लिए खुला, फिर 3.5 महीने के लिए बंद
    2023 जी20 शिखर सम्मेलन 8 से 10 सितंबर तक बंद
    2025 H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा 30 अगस्त से अनिश्चित काल के लिए

    कुल वन्यजीव

    • लगभग 130 प्रजातियों के 1350 पशु और पक्षी
    • स्तनधारी, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से लाए गए सरीसृप और दुर्लभ पक्षी
    • 200 प्रकार के पेड़ और एक विशेष पुस्तकालय जहां आगंतुक वन्यजीवों और पौधों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

    बरती जाएंगी ये सावधानियां 

    • प्रभावित क्षेत्रों को क्वारंटाइन कर दिया गया है।
    • पूरे चिड़ियाघर में सैनिटाइजेशन और निगरानी लागू की गई है।
    • सभी कर्मचारियों को मास्क और दस्ताने पहनने के निर्देश दिए गए हैं।
    • बंदी और प्रवासी पक्षियों की निगरानी और अलगाव।
    • नियमित परीक्षण के लिए पर्यावरण के नमूने (पानी, मिट्टी) लिए जा रहे हैं।
    • हर 15 दिन में कम से कम चार बार नमूना लिया जाएगा।
    • लगातार दो नकारात्मक नमूनों के बाद ही चिड़ियाघर को आगंतुकों के लिए खोलने पर विचार किया जा सकता है।

    बर्ड फ्लू क्या है?

    • एक संक्रामक वायरल रोग, मुख्यतः पक्षियों में।
    • सबसे खतरनाक प्रकार: H5N1
    • फैलता है: संक्रमित पक्षी के मल, पंख और लार से।
    • मनुष्यों में लक्षण: बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में कठिनाई।
    • अगर समय पर इलाज न किया जाए तो जानलेवा भी हो सकता है।