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    39.50 लाख की ठगी... मास्टरमाइंड समेत तीन दबोचे, पूछताछ में उगलेंगे बड़े राज

    Updated: Tue, 26 Aug 2025 02:11 PM (IST)

    क्राइम ब्रांच ने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर 39.50 लाख रुपये की ठगी करने वाले तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये जालसाज लोगों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगते थे। पुलिस ने आरोपियों के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है और अन्य साथियों की तलाश जारी है। मुख्य आरोपी दीपू के कहने पर ही बैंक खाता खोला गया था जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए किया गया था।

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    39.50 लाख ठगने वाले मास्टरमाइंड समेत तीन गिरफ्तार।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करके उच्च रिटर्न कमाने का लालच देकर व्यक्ति से 39.50 लाख ठगने वाले मास्टमाइंड समेत तीन जालसाजों को क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तार किया है। आरोपी गिरोह बड़े ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी रैकेट का हिस्सा थे।

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    वहीं, गिरफ्तार आरोपितों की पहचान पहाड़गंज के कृष्ण कुमार उर्फ मोनू, गोपालपुर के दीपू और जीटीबी एन्क्लेव के मोहम्मद इरफान शेख के रूप में हुई है। पुलिस इनसे पूछताछ कर गिरोह में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश में जुटी है।

    उपायुक्त आदित्य गौतम के मुताबिक, महेंद्रू एन्क्लेव के शिकायतकर्ता स्टेशनरी की दुकान के मालिक के साथ एक धोखाधड़ी वाले प्लेटफार्म के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करके उच्च रिटर्न कमाने के बहाने 39.50 लाख की ठगी की गई थी।

    वहीं, जांच के दौरान, आरएस मैनेजमेंट सर्विसेज नामक एक फर्म के नाम पर करोल बाग के आइडीएफसी बैंक में एक प्राथमिक खाता पाया गया। उसी खाते में पीड़ित के 17 फरवरी को ठगी गई राशि से 10 लाख रुपये जमा किए गए थे और यह कम से कम नौ साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से जुड़ा था।

    पुलिस जांच में खाताधारक कृष्ण कुमार निकला जो फरार था और पुलिस से बचने के लिए बार-बार अपना घर और मोबाइल नंबर बदल रहा था। उसे पकड़ने के लिए एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख में और इंस्पेक्टर सुभाष कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया और टीम ने 20 अगस्त को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर 21 अगस्त को दीपू को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

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    वहीं, पूछताछ में पता चला कि दीपू के निर्देश पर ही यह आपराधिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला खाता खोला गया था।

    ऐसे करते थे जालसाजी

    दीपू अपने सहयोगियों अरविंद और इरफान के साथ मिलकर खाताधारकों को यह विश्वास दिलाता था कि उनके खातों में आने वाला धन गेमिंग से होगा। इसके जरिए वह म्यूल कार्पोरेट बैंक खातों (आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने खाते) की व्यवस्था करता था।

    अरविंद साइबर धोखेबाजों से संपर्क बनाए रखता था, जो इन खातों के माध्यम से ठगी का पैसा भेजते थे। इरफान खाताधारकों पर नजर रखता था। अरविंद पहले से ही साइबर वेस्ट थाने के मामले में न्यायिक हिरासत में है, जबकि इरफान को पुलिस ने पहाड़गंज से गिरफ्तार किया।