Sports Scholarship: यूपी और हरियाणा की तुलना में दिल्ली के खिलाड़ी कम पा रहे स्कॉलरशिप, पलायन कर रही 'प्रतिभा'
दिल्ली के खिलाड़ी बेहतर स्कॉलरशिप और सुविधाओं की कमी के कारण अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बावजूद दिल्ली सरकार से प्रोत्साहन न मिलने के कारण एथलीट राजस्थान यूपी और हरियाणा से खेल रहे हैं। जहां उन्हें बेहतर सुविधाएं और अधिक स्कॉलरशिप दी जाती हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। दिल्ली के खिलाड़ी आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन उनके हुनर और मेहनत को दिल्ली सरकार से वैसा प्रोत्साहन नहीं मिल रहा, जैसा मिलना चाहिए। नतीजा यह है कि कई होनहार खिलाड़ी दिल्ली छोड़कर उन राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर सुविधाएं और अधिक स्कॉलरशिप दी जाती हैं।
स्कॉलरशिप देने में हरियाणा और यूपी आगे
दिल्ली में राष्ट्रीय पदक विजेताओं को स्वर्ण पदक पर केवल एक लाख रुपये, रजत पर 75 हजार रुपये और कांस्य पदक पर 50 हजार रुपये मिलते हैं। इसके विपरीत राजस्थान में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः पांच लाख, तीन लाख और दो लाख रुपये मिलते हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में यह राशि क्रमशः तीन लाख, दो लाख और एक लाख रुपये है। हरियाणा की स्कॉलरशिप भी दिल्ली से अधिक है।
इन्हें नहीं मिली आर्थिक सहायता
हाल ही में पेरिस ग्रां प्री में कीर्ति ने कांस्य, सुजित एमएस ने दो कांस्य, और निधि मिश्रा ने शॉट पुट व डिस्कस थ्रो में रजत और कांस्य पदक जीते, लेकिन दिल्ली सरकार की ओर से इन्हें कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई।
खिलाड़ियों के बयान
"हम एक महीने पहले विदेश से पदक जीतकर लौटे हैं, लेकिन कोई सम्मान या सहायता राशि नहीं मिली। अब मैं दूसरे राज्य से खेलने को मजबूर हूं।"
- कीर्ति
"दिल्ली में अब खेलना मुश्किल हो गया है। न सम्मान मिलता है, न प्रोत्साहन। मेरा खेलने और दौड़ने का खर्चा बहुत अधिक है। ऐसे में अगर इनामी राशि नहीं मिलेगी तो मैं उत्तर प्रदेश जाऊंगा।"
- सुजित एमएस
"परिवार ने कठिनाइयों के बावजूद खेल के लिए प्रेरित किया, लेकिन सरकार से न के बराबर सहायता मिलती है। इससे डाइट और ट्रेनिंग की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पातीं।"
- निधि
ये खिलाड़ी छोड़ चुके हैं दिल्ली
दिव्यांग एथलीट नीरज यादव ने डिस्कस थ्रो में एशियाई पदक जीता, लेकिन अब वह उत्तर प्रदेश से खेलते हैं, क्योंकि दिल्ली से उन्हें न तो कोई नौकरी मिली और न ही आर्थिक मदद। इसके अलावा वंतिका अग्रवाल, अंकुर धामा, ऋचा मिश्रा, चारू मिश्रा, मदन और विजय तोमर जैसे कई खिलाड़ी भी अब दिल्ली छोड़ चुके हैं।
कई बार तो पदक जीतने के बाद भी नहीं मिलता इनाम
जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कोच अमरजीत एथलीट और पैरा एथलीट को प्रशिक्षण देते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में खिलाड़ियों को अन्य राज्यों की तुलना में बहुत कम आर्थिक मदद मिलती है। कई बार तो पदक जीतने के बावजूद कोई इनाम तक नहीं दिया जाता।
यह देखकर दुख होता है कि जिन खिलाड़ियों को हम ट्रेनिंग देते हैं, वे सुविधाओं की कमी के कारण दिल्ली छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि दिल्ली सरकार खिलाड़ियों को सम्मान, सुविधाएं और आर्थिक सहायता दें ताकि दिल्ली के प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपने ही राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए देश को गौरवान्वित करें।
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