गौतम गंभीर की याचिका पर दिल्ली HC ने सुरक्षित रखा फैसला, दवा जमाखोरी मामले में राहत की मांग
दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम गंभीर और उनके फाउंडेशन की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा जिसमें कोरोना काल में दवाओं की जमाखोरी के आरोपों वाली एफआईआर रद्द करने की मांग की गई है। अदालत ने गंभीर और दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनीं। यह याचिका गंभीर उनकी मां और पत्नी ने दायर की थी जिसमें ट्रायल कोर्ट के समन और आपराधिक शिकायत को चुनौती दी गई है।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान दवाओं की जमाखोरी और बिना लाइसेंस के वितरण के आरोपों से जुड़े प्राथमिकी को रद करने की मांग वाली भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर, उनके फाउंडेशन और उसके सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित रख लिया। अदालत ने गौतम गंभीर व दिल्ली पुलिस की की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
आपराधिक शिकायत को भी चुनौती दी
यह याचिका गौतम गंभीर फाउंडेशन, गौतम गंभीर, उनकी मां सीमा गंभीर और पत्नी नताशा गंभीर द्वारा 2021 में दायर की गई थी। उन्होंने मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित समन आदेश और उनके खिलाफ आपराधिक शिकायत को भी चुनौती दी है।
सितंबर 2021 में एक समन्वय पीठ ने गंभीर और अन्य के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
गंभीर और अन्य ने हाल ही में एक नया आवेदन दायर कर न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की पीठ द्वारा नौ अप्रैल को पारित उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसमें ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर लगी रोक हटाई गई थी।
आरोप में प्राथमिकी कराई
दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रक ने गौतम गंभीर फाउंडेशन, उसके न्यासियों और सीईओ के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम-1940 के प्रविधानों का उल्लंघन करने के आरोप में प्राथमिकी कराई थी।
गौतम के अलावा आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायकों प्रवीण कुमार और इमरान हुसैन के खिलाफ भी इसी तरह के आरोपों को लेकर मुकदमा चलाया गया था।
जांच दल ने गौतम गंभीर और तत्कालीन आप विधायकों के खिलाफ मुफ्त चिकित्सा शिविर आयोजित करते समय कोरोना महामारी की दवाओं और औषधियों की जमाखोरी और अवैध रूप से भंडारण करने के विशिष्ट आरोपों के संबंध में जांच की थी।
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