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    दिल्ली में खिलाड़ियों की समस्याओं को क्यों किया जाता है नजरअंदाज? सामने आई चौंकाने वाली वजह

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 04:55 PM (IST)

    दिल्ली में स्वतंत्र खेल मंत्रालय न होने से खिलाड़ियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग के अधीन खेल होने से नीतियों का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता जिससे खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति और प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं में कमी आती है। खिलाड़ियों का कहना है कि मंत्रालय होने से उनकी आवाज सरकार तक पहुंचेगी और वे बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

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    दिल्ली में स्वतंत्र खेल मंत्रालय न होने से खिलाड़ियों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। फाइल फोटो

    लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में स्वतंत्र खेल मंत्रालय न होने से खिलाड़ियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यहां खेलों से जुड़ी सभी योजनाएँ और नीतियाँ शिक्षा विभाग के अधीन संचालित होती हैं।

    खिलाड़ियों का कहना है कि शिक्षा विभाग की प्राथमिकता खेल नहीं, बल्कि शिक्षा संबंधी नीतियां हैं, जिसके कारण केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार, दोनों द्वारा लाई गई नई खेल नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता। जब कोई भी नीति या योजना समय पर ज़मीनी स्तर पर लागू नहीं होती, तो सबसे बड़ा नुकसान उन्हें ही उठाना पड़ता है।

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    छात्रवृत्ति, प्रशिक्षण सुविधाएँ, आधुनिक उपकरण, मैदान और कोचिंग स्टाफ जैसी बुनियादी ज़रूरतें समय पर न मिलने से खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखार नहीं पाते। यही वजह है कि राजधानी जैसे बड़े शहर के खिलाड़ी अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाते हैं।

    दिल्ली में खेल मंत्रालय न होने से खिलाड़ियों की समस्याएं सीधे सरकार तक नहीं पहुंच पातीं। विभागीय अधिकारी खेल संबंधी मुद्दों को उतनी गंभीरता से नहीं लेते जितनी ज़रूरत है। कई बार खिलाड़ियों को छोटी-छोटी बातों के लिए भी महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं। नतीजतन, कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बीच में ही हार मानकर अपना खेल करियर छोड़ देते हैं।

    दिल्ली के सुशांत ने कहा कि स्वतंत्र खेल मंत्रालय बनने से खिलाड़ियों की समस्याएं सीधे संबंधित अधिकारियों और मंत्रियों तक पहुंच सकेंगी। इससे खिलाड़ियों को समय पर छात्रवृत्ति, खेल सुविधाएं और प्रशिक्षण शिविर उपलब्ध कराना आसान हो जाएगा। साथ ही, इससे खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में भी मदद मिलेगी।

    राष्ट्रीय स्तर पर एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले तुषार मन्ना ने कहा कि खिलाड़ियों के सामने सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब उन्हें प्रायोजक ढूंढना पड़ता है।

    दिल्ली में खेल मंत्रालय न होने के कारण प्रायोजक तक पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाता है। अगर मंत्रालय होता, तो खिलाड़ियों की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचती। साथ ही, खिलाड़ी राज्यों को छोड़ने को मजबूर होते हैं।

    दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने छात्रवृत्ति योजना भी शुरू की है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि अलग खेल मंत्रालय बनाना दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। यह निर्णय केवल गृह मंत्रालय के अधीन है। सूद ने कहा कि हमारी प्राथमिकता खिलाड़ियों के लिए एक मज़बूत माहौल तैयार करना है ताकि वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

    शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया कि खिलाड़ियों को सुविधाएं, संसाधन और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सबसे ज़्यादा इनामी राशि भी दे रही है।

    एथलेटिक्स कोच अमरजीत का मानना ​​है कि दिल्ली के खिलाड़ियों की प्रतिभा किसी भी अन्य राज्य से कम नहीं है, लेकिन खेल मंत्रालय न होने के कारण न तो योजनाएँ बन पाती हैं और न ही खेलों का दीर्घकालिक विकास हो पाता है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिल्ली छोड़कर हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं।