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    DU Admission 2025-26: डीयू में सिम्युलेटेड रैंक से खुलेगा एडमिशन का गणित, आज शाम को होगी जारी

    Updated: Tue, 15 Jul 2025 10:59 AM (IST)

    DU Admission 2025 दिल्ली विश्वविद्यालय स्नातक दाखिले के लिए संभावित रैंक जारी करेगा जिससे छात्रों को कॉलेज और कोर्स चयन में मदद मिलेगी। छात्र 15-16 जुलाई को अपनी प्राथमिकताएं बदल सकेंगे। पहली सीट आवंटन सूची 19 जुलाई को जारी होगी। यह प्रक्रिया छात्रों को बेहतर निर्णय लेने और दाखिला प्रक्रिया को छात्रहितकारी बनाने के लिए है।

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    रैंक के आधार पर छात्र दोबारा वरीयताओं को बदल सकेंगे

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। DU Admission 2025 : दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक दाखिले की दौड़ में शामिल लाखों छात्रों के लिए मंगलवार का दिन अहम होने जा रहा है। विश्वविद्यालय आज शाम पांच बजे कॉमन सीट एलोकेशन सिस्टम (सीएसएएस) पोर्टल पर छात्रों की सिम्युलेटेड रैंक (संभावित रैंक) जारी करेगा। इससे छात्रों को अपने मनपसंद कॉलेज और कोर्स में प्रवेश की संभावना का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि सिम्युलेटेड रैंकिंग से छात्रों को यह रणनीति बनाने में सहूलियत होगी कि कहां उनकी सीट पक्की हो सकती है और किस विकल्प को प्राथमिकता देनी चाहिए।

    71 हजार से अधिक स्नातक सीटों पर होना है दाखिला

    डीयू प्रशासन के अनुसार, यह रैंक छात्रों की ओर से भरी गई कॉलेज व कोर्स की वरीयताओं के आधार पर उनके डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होगी। हालांकि, यह केवल संभावित रैंक है और सीट आवंटन की कोई गारंटी नहीं देगी।

    डीयू में इस बार 71 हजार से अधिक स्नातक सीटों पर दाखिला होना है। छात्रों ने अपनी कॉलेज व कोर्स की वरीयताएं आठ से 14 जुलाई के बीच भरी थीं। जिन छात्रों ने अपनी प्राथमिकताओं को सेव नहीं किया, उनकी वरीयताएं आटो-लाक हो गई हैं। अब 15 और 16 जुलाई को विश्वविद्यालय सुधार विंडो खोलेगा, जिसमें छात्र अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकेंगे।

    पहली आवंटन सूची 19 जुलाई को

    सिम्युलेटेड रैंक के बाद विश्वविद्यालय 19 जुलाई शाम पांच बजे पहली सीट एलोकेशन लिस्ट जारी करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया छात्रों को भावनात्मक रूप से भी तैयार करती है कि उनकी वास्तविक स्थिति क्या है और किस कॉलेज व कोर्स की सीट तक पहुंच संभव है।

    डीयू प्रशासन का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने और दाखिला प्रणाली को अधिक छात्रहितकारी बनाने के लिए की गई है। इससे दाखिले की दौड़ में अनिश्चितता कम होगी और छात्र विवेकपूर्ण निर्णय ले सकेंगे।