'...अगर ऐसा हो तो मैं आरएसएस के खिलाफ नहीं ' ; छह साल बाद फिर भागवत से मिलने जाएंगे मदनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी जल्द ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलेंगे। जमीयत की बैठक में भागवत की गलतफहमी दूर करने की अपील का स्वागत किया गया। मदनी ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता की पहल जमीनी स्तर पर दिखनी चाहिए। जमीयत ने देश में सांप्रदायिकता और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव पर चिंता व्यक्त की साथ ही असम में मुस्लिम परिवारों के निष्कासन का मुद्दा उठाया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों में हिंदू-मुस्लिम एकता पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जोर के साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत द्वारा दोनों पक्षों से गलतफमियों के दूर करने के आग्रह से माहौल बदलता दिख रहा है।
देश में मुस्लिम समाज के प्रमुख संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की कार्यकारी समिति की बैठक में मोहन भागवत की अपील पर विस्तार से चर्चा हुई है।
जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने स्वागत करते हुए कहा कि इस दिशा में पहल होनी चाहिए तथा यह जमीन पर भी दिखना चाहिए। अगर हिंदू-मुस्लिम के साथ आने की बात हो, तो वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ नहीं हैं।
बैठक में मौजूद एक पदाधिकारी के अनुसार, मदनी ने जोर दिया कि दोनों के बीच गलतफमियों को दूर करने का प्रयास बयानों से आगे कृत्यों में भी आना चाहिए। असम सरकार द्वारा मुस्लिम समाज के घरों को गिराने जैसी घटनाओं पर भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आए।
वैसे, बैठक में जमीयत के शीर्ष नेतृत्व ने तय किया कि मदनी के नेतृत्व में जमीयत का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही इस संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने मोहन भागवत से मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात अगले माह सितंबर में संभव है।
वैसे यह पहली बार नहीं होगा जब भागवत व मदनी मिलेंगे। इसके पूर्व छह वर्ष पहले भागवत के बुलावे पर मदनी उनसे मिलने पहुंचे थे। वर्ष 2019 में तब यह मुलाकात उदासीन आश्रम में संघ के अस्थायी कार्यालय में हुई थी। जिसमें आपसी भाईचारे के लिए साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया गया था।
संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में विज्ञान भवन में तीन दिवसीय संघ के 100 वर्ष-नए क्षितिज संवाद कार्यक्रम में मोहन भागवत ने हिंदू-मुस्लिम के बीच अविश्वास के माहौल को दूर करने की अपील की है।
मौजूदा हालात पर जमीयत ने जताई चिंता
जमीयत की कार्यकारी की बैठक में आरोप लगाया गया कि देश में सांप्रदायिकता, कट्टरता और अशांति बढ़ रही है। अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से मुसलमानों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव तथा मदरसों और मस्जिदों के खिलाफ मुहिम चलाई जा रही है।
खासतौर पर असम में जारी निष्कासन और पचास हजार से अधिक मुस्लिम परिवारों को केवल धर्म के आधार पर बेघर किया गया। अरशद मदनी ने असम मामले में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए देश के मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप की अपील की। गाजा में वहां के निवासियों पर भी चिंता व्यक्त की गई
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