दिल्ली में इस जगह विकसित हुआ बांसेरा पार्क, वीडियो जारी कर लोगों ने की घूमने की अपील; क्या हैं खासियतें?
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने दिल्ली के बांसेरा पार्क का वीडियो साझा किया है जो यमुना किनारे स्थित है। कभी यह जगह कचरे से भरी थी लेकिन अब यहां 30000 बांस के पेड़ हैं। यह पार्क दिल्ली विकास प्राधिकरण के प्रयासों से 18 महीनों में बनकर तैयार हुआ है। यहाँ जलाशय लॉन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। उपराज्यपाल ने लोगों से यहां आने की अपील की है।

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। एलजी वीके सक्सेना ने एक्स पर बांसेरा पार्क का एक वीडियो शेयर कर लोगों से यहां आने की अपील की है। उन्होंने लिखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 तक देश की 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने के विजन से प्रेरित होकर दिल्ली में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
एलजी के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद 28 मई 2022 को सराय काले खां के पास यमुना किनारे स्थित प्रदूषित और बर्बाद हो चुकी जमीन का निरीक्षण किया गया। यहीं से 'बांसेरा यानी बांस हाउस' बनाने का विचार मन में आया। दिल्ली विकास प्राधिकरण के प्रयासों से महज 18 महीनों में इस जगह का कायाकल्प हो गया।
जहां कभी लाखों टन कचरा, मलबा और अतिक्रमण था, वहां अब करीब 30 हजार बांस के पेड़ 30 फीट से भी ऊंचे खड़े हैं। इनके साथ ही देशी पेड़ों, हरी घास, फूलों और जलाशयों से सजा बांसेरा आज दिल्ली का नया पारिस्थितिक और मनोरंजन केंद्र बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाँस के पौधे अन्य पेड़ों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक ऑक्सीजन छोड़ते हैं और मिट्टी की उर्वरता को भी बहाल करते हैं। इस पार्क में मेघालय की प्रसिद्ध "लाकाडोंग हल्दी" और रंग-बिरंगे ट्यूलिप भी खिल रहे हैं। बांसेरा में जलाशय, हरे-भरे लॉन, बच्चों के खेलने का क्षेत्र, पैदल मार्ग, रेस्टोरेंट और संगीतमय फव्वारा जैसी सुविधाएँ तैयार की गई हैं।
यहां पतंगबाज़ी उत्सव, योग सत्र और संगीत संध्या जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। यमुना बाँसेरा की यह अनूठी पहल साबित करती है कि प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पारिस्थितिकी तंत्र का कायाकल्प किया जा सकता है।
उपराज्यपाल ने दिल्ली के लोगों से इस नए पार्क बांसेरा में आने और इसकी हरियाली और शुद्ध वातावरण का अनुभव करने की अपील की है।
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