Delhi UER 2: दिल्ली में यूईआर-2 पर टोल के विरोध में पंचायत, आंदोलन की बनेगी रणनीति
यूईआर-2 पर टोल टैक्स के विरोध में आज पंचायत होगी जिसमें आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। पंचायत में खाप आरडब्ल्यूए और आसपास के गांवों के लोग शामिल होंगे। ग्रामीण दिल्ली में टोल टैक्स के खिलाफ हैं क्योंकि यह उनकी जमीन पर बना है और उनसे ही टैक्स वसूला जा रहा है। वे टोल को फ्री करने की मांग कर रहे हैं।

जागरण संवाददाता, बाहरी दिल्ली। यूईआर-2 पर बने दिल्ली के पहले टोल प्लाजा (मुंडका-बक्करवाला) को लेकर खाप व सामाजिक संगठनों की ओर से रविवार को आहूत पंचायत की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा के पास होने वाली इस पंचायत में बाहरी दिल्ली के गांवों, खाप, आरडब्ल्यूए समेत विभिन्न संगठनों के नुमाइंदे टोल हटाने को लेकर प्रस्तावित आंदोलन की रणनीति को अंतिम रूप देंगे। खाप नेताओं के अलावा युवा संगठन 360 दिल्ली-एनसीआर के नेता-कार्यकर्ता दिनभर क्षेत्र में सक्रिय रहे और ग्रामीणों को कल हाेने वाली पंचायत का निमंत्रण दिया।
मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा के विरोध आसपास के ग्रामीणों ने 27 अगस्त को विरोध-प्रदर्शन किया था और कुछ समय के लिए टोल को फ्री कर दिया गया था। ग्रामीणोें का कहना था कि दिल्ली के भीतर कहीं टोल नहीं है। यही नहीं, इस टोल पर लिया जाने वाला टैक्स सर्वाधिक है। आसपास के गांव के लोगों से टोल नहीं लिया जाना चाहिए।
मुंडका के विधायक गजेंद्र दराल ने प्रदर्शनकारियों से बात की और आसपास के गांव के लोगों से टोल वसूली के मसले पर मंत्री व एनएचएआइ के अधिकारियों से बात करने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों ने 30 अगस्त तक समय दिया था और अगले दिन पंचायत के आयोजन की बात कही थी।
शनिवार को प्रस्तावित पंचायत को लेकर खाप नेता, युवा संगठन 360 दिल्ली-एनसीआर के नेता-कार्यकर्ता, आरडब्ल्यूए व अन्य संगठनों ने लोगों ने जन संपर्क किया। खाप नेता राम कुमार सोलंकी ने बताया कि सुरहेडा-18, ढासा-12, कराला-17, टीकरी-5 आदि तपों के माध्यम से लोगों से संपर्क किया गया है।
इस कार्य में कई सामाजिक संगठन, आरडब्लयूए भी लगे हैं। युवा संगठन 360 से जुड़े नेता विजय मान ने बताया कि कल की पंचायत का मंच पूरी तरह से सामाजिक होगा, अगर गांव के लोगों के समर्थन में कोई राजनीतिक व्यक्ति आना चाहता है तो आ सकता है। लेकिन, इस मंच पर राजनीतिक बातें करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
मा.जगबीर सिंह ने कहा कि दिल्ली में जितने भी बने हैं वे सीमा पर हैं। यह दिल्ली की सीमा के भीतर बनाया गया है। आसपास के गांव के लोगों से टोल वसूली गलत है। यहां के लोगों ने यूईआर-2 के लिए अपनी जमीन दी हैं।
ग्रामीण बोले, हमारी जमीन पर बना यूईआर, अब हमसे ही टोल टैक्स
यूईआर के लिए सरकार ने हमारी जमीन कौड़ियों के भाव ली है। अब हमसे ही भारी-भरकम टोल टैक्स वसूला जा रहा है। यह सरासर गलत है और गांव के लोगों के लिए टोल फ्री होना ही चाहिए। दिल्ली की सीमा के भीतर टोल नहीं लिया जाना चाहिए।
ज्ञानेंद्र सिंह, रानीखेड़ा
हमारे यहां से बक्करवाल केवल चार-पांच किलोमीटर दूर है। हमें शादी और रिश्तेदारी के लिए बक्करवाला भी जाना पड़ता है, नज़फगढ़ भी जाना पड़ता है। हर दूसरे-तीसरे दिन आना-जाना रहता है, हम लोग कितनी बार टोल देंगे।
देवेंद्र कुमार, रानीखेड़ा
दिल्ली में कहीं भी टोल टैक्स नहीं है और यह पहला टोल टैक्स है, जिसे यहां नहीं होना चाहिए। अगर है, तो हमारे दस से पंद्रह किलोमीटर की सीमा के सभी गांवों का टोल फ्री होना चाहिए। जैसा कि अन्य राज्यों में आसपास के गांवों को छूट दी जाती है।
हवा सिंह, मुबारकपुर
दिल्ली में टोल होना ही नहीं चाहिए। आसपास के रोड खराब है और मजबूरन यूईआर-2 से नजफगढ़ की ओर जाना पड़ता है तो टोल देना पड़ेगा। जबकि हमारा गांव टोल से चार से पांच किलोमीटर के दायरे में है।
उमेद सिंह, रानीखेड़ा
हमें उम्मीद थी कि जब यह हाइवे बनेगा और हमें सुविधा मिलेगी। लेकिन सरकार ने भारी-भरकम टोल लगा दिया। हमारी जमीन इतनी सस्ती ली और अब हमसे ही मोटा टोल टैक्स लिया जा रहा है। यह टोल टैक्स खत्म होना चाहिए।
बिजेंद्र, मुबारकपुर
मैं मुंडका गांव का निवासी हूं और मेरे गांव से करीबन एक से दो किलोमीटर की दूरी पर टोल प्लाजा है। मैं कैब ड्राइवर हूं और मुझे बक्करवाला और बापरौला की ओर जाना होता है। ऐसे में मुझे हर बार टैक्स देना पड़ता है। मेरा इतना वेतन नहीं है कि रोजाना इतना टोल दे सकूं। इसलिए यह टोल माफ होना चाहिए।
अरुण, मुंडका
टोल बार्डर पर लगाया जाता है, लेकिन यह पहला टोल है जो दिल्ली के अंदर गांवों के बीच बनाया गया है। अगर किसी को मुंडका से बक्करवाला जाना हो तो उसे 235 रुपये का टोल देना होगा। जबकि मुंडका से बक्करवाला की दूरी दो किलोमीटर भी नहीं है। यह टोल खत्म होना चाहिए।
पुनीत, ग्रामवासी, रानीखेड़ा
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