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    क्या आप भी सोचते हैं हम 'Left' साइड ही क्यों ड्राइव करते हैं? वजह जानकर हैरान रह जाएंगे

    Updated: Thu, 08 Jan 2026 03:07 PM (IST)

    भारत में सड़क पर बाईं ओर गाड़ी चलाने की परंपरा ब्रिटिश शासन की देन है। अंग्रेजों ने अपनी 'लेफ्ट-साइड' प्रणाली यहां लागू की थी, क्योंकि वे दाएं हाथ से ...और पढ़ें

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    भारत में बाईं ओर क्यों चलती हैं गाड़ियां? (Picture Credit- AI Generated)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त हमारा ध्यान अक्सर सिग्नल्स और गड्ढों पर तो रहता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इंडिया में हमेशा सड़क के 'Left Side' ही क्यों ड्राइव किया जाता है? जबकि अमेरिका जैसे देशों में दाईं ओर ड्राइविंग होती है?

    यह सिर्फ कोई रैंडम नियम नहीं है, बल्कि इतिहास, सुरक्षा और व्यावहारिकता का मिला-जुला गणित है। इसके पीछे की वजह बेहद खास है और शायद आप इससे अनजान हैं। आइये, आज आपको इसके पीछे की असली कहानी बताते हैं।

    अंग्रेजी हुकूमत और पुरानी परंपराएं

    भारत में बाईं ओर यानी लेफ्ट साइड ड्राइविंग की नींव ब्रिटिश शासन के दौरान पड़ी थी। ब्रिटेन में गाड़ियों के आने से बहुत पहले, घुड़सवारी के समय से ही बाईं ओर चलने का नियम था। ऐसा इसलिए था, क्योंकि उस समय तलवार या चाबुक चलाने के लिए ज्यादातर लोग दाएं हाथ (Right-handed) इस्तेमाल करते थे। ऐसे में बाईं ओर चलने से उनका दाहिना हाथ (Right Hand) फ्री रहता था।

    जब अंग्रेजों ने भारत में सड़कें, रेलवे और यातायात के नियम बनाए, तो उन्होंने अपनी इसी 'लेफ्ट-साइड' सिस्टम को यहां भी लागू किया। पूरे भारत में एक समान नियम रखने के लिए इसे कड़ाई से पालन कराया गया।

    आजादी के बाद क्यों नहीं बदला नियम?

    भारत में लेफ्ट साइड गाड़ी चलाने का नियम कहां से आया, यह तो आप जान गए, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर 1947 में आजादी मिलने के बाद भी इस नियम को बदला क्यों नहीं गया? आजादी के बाद भारत के पास मौका था कि वह नियम बदल सके, लेकिन सरकार ने पुराना नियम ही जारी रखा। इसके पीछे कुछ व्यावहारिक कारण थे, जो निम्न थे:

    • बड़ा खर्चा: अगर हम 'राइट साइड ड्राइविंग' का नियम अपनाते, तो रातों-रात पूरे देश के रोड साइन, सिग्नल और चौराहों को बदलना पड़ता। इससे बड़ा खर्चा होता।
    • बदलनी पड़ती गाड़ियां: लाखों गाड़ियों (बसों, ट्रकों) के स्टीयरिंग सिस्टम को बदलना पड़ता और करोड़ों ड्राइवरों को दोबारा ट्रेनिंग देनी पड़ती।

    एक नए और विकासशील देश के लिए यह बदलाव न सिर्फ महंगा था, बल्कि इससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती थी। इसलिए इस नियम को बदला नहीं गया होगा।

    सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी लेफ्ट साइड ड्राइविंग

    तकनीकी रूप से, जिन देशों में सड़क के बाईं ओर गाड़ी चलाई जाती है, वहां गाड़ियों का स्टीयरिंग व्हील दाईं ओर (Right-hand drive) होता है। यह व्यवस्था भारत के लिए एकदम सही है क्योंकि:

    • ड्राइवर सड़क के बीच की तरफ बैठता है, जिससे सामने से आ रहे ट्रैफिक को देखना आसान हो जाता है। 
    • भारत जैसे देश में संकरी सड़कों पर, जहां बैलगाड़ी, पैदल यात्री और साइकिल सवार भी चलते हैं, वहां ओवरटेक करते समय ड्राइवर को बेहतर विजिबिलिटी मिलती है।

    पड़ोसी देशों के साथ तालमेल

    भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका भी ब्रिटिश प्रभाव के कारण लेफ्ट साइड ही ड्राइव करते हैं। अगर भारत यह नियम बदल देता, तो सीमा पार व्यापार और गाड़ियों की आवाजाही में बहुत दिक्कतें आएंगी। मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत भी इसे कानूनी रूप से अनिवार्य रखा गया है।

    इन देशों में भी होती है लेफ्ट साइड ड्राइविंग

    सड़कों के लेफ्ट साइड ड्राइव करने वाला सिर्फ भारत इकलौता देश नहीं है, बल्कि दुनिया की एक बड़ी आबादी बाईं ओर ड्राइव करती है। इसमें ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और इंडोनेशिया जैसे कई प्रमुख देश शामिल हैं।

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