विचार: युवाओं को ट्रेनिंग दें कंपनियां
भारत में युवाओं में कौशल की कमी उन्हें बेरोजगार और कम वेतन वाली नौकरियों में फंसा रही है, जिससे उत्पादकता और आर्थिक विकास बाधित हो रहा है।
HighLights
कौशल की कमी से युवा बेरोजगार और कम वेतन वाली नौकरियों में।
उत्पादकता घटती है, कंपनियां नई तकनीक अपनाने में पीछे रहती हैं।
कंपनियों को युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देना आवश्यक है।
डॉ. विकास सिंह। भारत में हुनर या कौशल की कमी सिर्फ युवाओं को बेरोजगार ही नहीं बना रही है, बल्कि उन्हें कम कमाई वाली नौकरियों में फंसाकर रख रही है। यह समस्या सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ने के रास्ते को बंद कर रही है। हुनर की इस कमी का सबसे बड़ा असर उत्पादकता पर पड़ता है। जब एक मजदूर आधुनिक मशीनों को नहीं चला पाता या डिजिटल सिस्टम को नहीं समझ पाता, तो वह कम समय में कम काम कर पाता है। इससे कंपनियां नई तकनीक अपनाने में पीछे रह जाती हैं और ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पातीं।
नीति आयोग के आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ थोड़े से ही स्नातक अपनी पढ़ाई के हिसाब से नौकरियां पा रहे हैं। लाखों छात्र बिना किसी व्यावहारिक अनुभव के डिग्री हासिल कर रहे हैं। इस वजह से कंपनियों को उन्हें फिर से सिखाना पड़ता है, जिससे देश के समय और पैसे दोनों का नुकसान होता है। पहली नौकरी इंसान का पूरा भविष्य तय करती है। अगर कोई युवा शुरुआत में ही अच्छा काम और हुनर सीख लेता है, तो आगे चलकर उसकी तनख्वाह और ओहदा दोनों बढ़ते हैं। लेकिन जब किसी को बिना हुनर वाली कम वेतन की नौकरी मिलती है, तो वह उसी में फंसा रह जाता है।
अमीर परिवारों के बच्चे दूसरी पढ़ाई या इंटर्नशिप करके बेहतर मौके तलाश सकते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के युवाओं के लिए मजबूरी में मिली यह नौकरी एक जाल बन जाती है। वे सालों तक उसी कम तनख्वाह में काम करने को मजबूर रहते हैं, जिससे समाज में असमानता बढ़ती है। विश्व बैंक के अनुसार भारत के कुल बेरोजगारों में बड़ी संख्या युवाओं की है, जबकि दूसरी तरफ कंपनियां सही हुनर वाले लोग न मिलने का रोना रोती हैं।
कंपनियां अपनी योजनाएं टाल देती हैं और युवा अपनी क्षमता से नीचे काम करने को मजबूर हैं। सरकार ने कागजी डिग्रियां और प्रमाणपत्र बांटने पर काफी पैसा खर्च किया है, लेकिन केवल सर्टिफिकेट से उत्पादकता नहीं बढ़ती। असली फायदा तब है जब ट्रेनिंग देने के बाद युवाओं को सही काम और बेहतर वेतन मिले। जर्मनी जैसे देशों की तरह भारत में भी कंपनियों को युवाओं को ट्रेनिंग देनी चाहिए। केवल डिग्रियां बांटने से देश की आर्थिक तरक्की नहीं हो सकती, बल्कि युवाओं को सही हुनर देकर ही उनकी और देश की कमाई बढ़ाई जा सकती है।
(लेखक समग्र विकास विशेषज्ञ हैं)











