अंधा नहीं बहरा था OP Nayyar का इश्क, आशा ताई से जुड़ा था नाम, पसंद नहीं थी लता दीदी का आवाज
ओपी नैयर, जिनका जन्म 16 जनवरी 1928 को लाहौर में हुआ था, बॉलीवुड के प्रसिद्ध संगीतकार जो अपने गानों के लिए आज भी याद किए जाते हैं। उनकी निजी जिंदगी भी ...और पढ़ें

आशा भोंसले के दीवाने थे ओपी नैयर (फोटो- एक्स)
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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। जब भी बॉलीवुड में खुशी के गीत सुनने का मन करता है तो कानों में ओपी नैयर की आवाज गूंजने लगती है। उनकी रचनाओं में कुछ ऐसा है जो आपको मुस्कुराने और गुनगुनाने पर मजबूर कर देती हैं ओपी नैयर ने गीता दत्त और मोहम्मद रफी के लिए कई सारे ड्यूएट सॉन्ग लिखे।
ऑल इंडिया रेडियो से की थी शुरुआत
ओंकार प्रसाद नैयर का जन्म 16 जनवरी 1928 को लाहौर में हुआ था। संगीत के प्रति जुनूनी इस युवक ने ऑल इंडिया रेडियो, लाहौर के लिए गाना गाया और थोड़ा बहुत फिल्मों में भी काम किया। हैरानी की बात है कि ओपी के बारे में इंटरनेट पर ज्यादा जानकारी नहीं है। जो थोड़ी-बहुत जानकारी उपलब्ध है, वह भी तथ्यों से मेल नहीं खाती। उदाहरण के लिए, ऐसा माना जाता है कि उन्होंने 17 वर्ष की आयु में संगीत निर्देशक सी.एच. आत्मा के मार्गदर्शन में 'प्रीतम आन मिलो' की रचना की थी। हालांकि, यह भी सुनने में आता है कि सी.एच. आत्मा के इस गीत (जो 1943 में रिकॉर्ड किया गया था) के बोल ओपी की पत्नी सरोज मोहिनी ने लिखे थे।
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फिलहाल आज हम ओपी नैयर के संगीत के बजाए उनकी लव लाइफ पर चर्चा करेंगे। एक समय था जब ओ पी नैयर आशा भोंसले के प्रेम में थे। हालांकि आशा भोसले के साथ उनके रिश्ते ने उनकी जिंदगी को झकझोरकर रख दिया। उसके बाद न तो वो अपने परिवार के रहे और न ही आशा भोसले के हो पाए।
चार बच्चों के पिता थे ओपी नैयर
मामला तो इतना बढ़ गया था कि शादीशुदा और चार बच्चों के पिता होने के बावजूद ओपीनैयर आशा भोंसले के प्यार में पागल थे। नैयर साहब ने खुद भी इंटरव्यू में कहा था,'ये तो सुना था कि लंव इज ब्लाइंड, लेकिन मेरे मामले में लव ब्लाइंड के अलावा डीफ यानी बहरा भी था क्योंकि आशा की आवाज के अलावा मैं और कोई आवाज सुन नहीं पाता था।' यही कारण था कि उन्होंने शमशाद बेगम और गीता दत्त से खुद को किनारे कर लिया था।
एक तरफ जहां आशा भोसले के लिए ओपी नैयर दीवाने थे और उन्हें अपनी पलकों पर बिठाकर रखते थे,वहीं उनकी बहन लता मंगेशकर से उन्होंने एक भी गाना नहीं गवाया। उनका कहना था कि जो आवाज उन्हें चाहिए थी वो लता में नहीं थी।

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