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    Cloud Burst: 'सन्नाटे और त्रासदी की लकीरें...' उत्तरकाशी का क्षेत्र जहां हुई थी 'राम तेरी गंगा मैली' की शूटिंग

    हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड बेहद खूबसूरत पहाड़ी प्रदेश है। 5 अगस्त को यहां आई जल प्रलय ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया। सड़क से लोगों की कनेक्टिविटी कट गई जिसकी वजह से उन तक राहत सामग्री पहुंचाने में और भी ज्यादा दिक्कत हो रही है। वही हर्षिल धराली 1985 में एक खूबसूरत गांव था जहां राम तेरी गंगा मैली की शूटिंग हुई थी।

    By Surabhi Shukla Edited By: Surabhi Shukla Updated: Fri, 08 Aug 2025 04:28 PM (IST)
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    राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी (फोटो-इंस्टाग्राम)

    एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। साल 1985 में राज कपूर एक फिल्म लेकर आए थे, फिल्म का नाम था 'राम तेरी गंगा मैली'। इस फिल्म में मंदाकिनी और राजीव कपूर ने लीड रोल निभाया था। मूवी को इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 'ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर'का दर्जा दिया गया।

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    कहां हुई है फिल्म की शूटिंग?

    इस फिल्म का एक बहुत ही पॉपुलर गाना है 'हुस्न पहाड़ों का,ओ साईबा' जिसे अपनी आवाज से सजाया था लता मंगेशकर और सुरेश वाडकर ने। सेब के बाग,सरसों के खेतों और भागीरथी के तटों पर फिल्माए गए इस गीत को जिस तरह से फिल्माया गया उसे काफी ज्यादा पसंद किया गया। इसकी शूटिंग धराली में हुई थी। वही धराली घाटी जो आज सन्नाटे और शोक में डूबी हुई है।

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    आंखों में बसी है घाटी की सुंदरता

    उत्तरकाशी जिले में बसा एक खूबसूरत गांव, धराली राज कपूर की कहानी कहने की कला का केंद्र था। फिल्म में दिखाए गए दृश्य इस फिल्म की पहचान थे जो घाटी की सुंदरता को लोगों की आंखों में बसने के लिए मजबूर कर देते थे। यहीं पर मंदाकिनी ने मासूम पहाड़ी लड़की गंगा के रूप में, घाटियों में विचरण किया, झरनों में नहाया और प्रेम और वियोग की एक कहानी को जीवंत किया।

    मंदाकिनी के परिधान करते हैं कनेक्ट

    तिलागढ़ में फिल्माया गया फिल्म का गाना तुझ बुलाएं ये मेरी बाहें और उनका प्रतिष्ठित सफेद साड़ी वाला सीन आज भी लोगों की स्मृतियों में है। ये इतना ज्यादा पॉपुलर हुआ कि इसे 'मंदाकिनी फॉल्स' के नाम से जाना जाने लगा। गाने में उनके द्वारा पहने गए पारंपरिक गढ़वाली परिधान और रवाईं आभूषणों का मिश्रण इस क्षेत्र की गहरी सांस्कृतिक आत्मा को प्रतिबिम्बित करते थे।

    कब आया था कुदरत का कहर

    फिल्म में दिखाया गया हर्षिल डाकघर, जिसमें एक सीन में गंगा "नरेन" नाम का अर्थ पूछती है, पर्यटकों की पसंदीदा जगह बनी हुई है। इसी तरह सूर्यकुंड झरना, जीएमवीएन गेस्ट हाउस और भैरव घाटी भी पर्यटकों की पसंदीदा जगह है। ये सभी कभी जीवन से भरपूर थे और अब प्रकृति के प्रकोप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। 5 अगस्त को धराली में आए कुदरत के कहर ने सब कुछ डुबो दिया।

    इस तूफानी सैलाब ने कई घर दफन कर दिए तो कई तेज बहाव में बह गए। इस जल प्रलय में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और अभी भी कई लोगों के लापता होने की खबर है।

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