टैक्स डिफाल्टरों का निगम को 291 करोड़ का ‘झटका’, एक लाख से ज्यादा बकाये वाले 29 हजार से अधिक
गुरुग्राम नगर निगम 29 हजार से ज़्यादा प्रॉपर्टी टैक्स डिफाल्टरों के चलते 291 करोड़ रुपये से ज़्यादा के बकाया से जूझ रहा है। निगम की ढिलाई के कारण खजाना खाली होता जा रहा है। डिफाल्टरों पर कार्रवाई न होने और वसूली में गिरावट से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। आयुक्त प्रदीप दहिया ने डिफाल्टरों को नोटिस भेजने और कार्रवाई की बात कही है।

संदीप रतन, गुरग्राम। नगर निगम गुरुग्राम पर प्राॅपर्टी टैक्स डिफाल्टरों के बकाया का बोझ बढ़ता जा रहा है। 29 हजार 191 डिफाल्टरों पर 291 करोड़ 91 लाख रुपये बकाया है। निगम खजाना खाली होता जा रहा है, लेकिन इसे भरने के लिए निगम ने न तो इन टैक्स डिफाल्टराें से रिकवरी की है और न इनकी संपत्तियों को नीलाम किया जा रहा है। सिर्फ नोटिस भेजकर खानापूर्ति की जा रही है।
खास बात यह है कि एक लाख रुपये बकाया वाले ही 29 हजार 191 प्राॅपर्टी टैक्स डिफाल्टर हैं, इससे कम बकाया वाले डिफाल्टरों की संख्या भी हजाराें में है। नगर निगम के खजाने में सिर्फ 450 करोड़ रुपये ही बचे हैं और सालाना खर्च इससे दोगुना है। अगर यही स्थिति रही तो कर्मचारियों के लिए वेतन का भी संकट हो सकता है।
टैक्स न देने वालों पर होगी कार्रवाई
शहर में सात लाख से ज्यादा प्राॅपर्टी विभिन्न श्रेणी की है। औसतन सालाना प्राॅपर्टी टैक्स की रिकवरी 250 से 280 करोड़ रुपये है। अगर डिफाल्टरों से टैक्स की समय पर रिकवरी हो तो यह यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। टैक्स से होने वाली आय से शहर में कई तरह के विकास कार्य करवाए जा सकते हैं। इस संबंध में नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया का कहना है कि प्राॅपर्टी टैक्स डिफाल्टरों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। जो टैक्स जमा नहीं कराएंगे, उन पर कार्रवाई होगी।
रिकवरी में आई 16 प्रतिशत की गिरावट
प्रदेश की अगर बात करें तो सभी निकायों में प्राॅपर्टी टैक्स से आय पिछले साल की तुलना में घट गई है। गुरुग्राम निगम में भी टैक्स के साथ अन्य स्त्रातों से भी आय कम हो गई। प्रदेश में वर्ष 2023-24 में प्राॅपर्टी टैक्स की जहां कुल रिकवरी 563.36 करोड़ रुपये रही थी, वहीं 2024-25 में यह घटकर 475.09 करोड़ रुपये पर आ गई। यह कुल मिलाकर 16 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
प्राॅपर्टी टैक्स निकायों की आय मुख्य स्त्रोत है और इससे निकायों का खजाना भरता है। हालांकि विज्ञापन फीस, स्टांप ड्यूटी, तहबाजारी सहित अन्य माध्यमों से भी निकायों को आय होती है, लेकिन सबसे ज्यादा आय प्राॅपर्टी टैक्स से होती है। इस आय में गिरावट आने से शहरी विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं और निकायों को सरकारी फंड पर आश्रित होना पड़ेगा।
16.37 करोड़ रुपये कम टैक्स मिला
टैक्स रिकवरी में गिरावट का सबसे बड़ा कारण टैक्स की वसूली समय पर नहीं होने, बकाएदारों को नोटिस नहीं भेजने और डिफाल्टरों की संपत्ति को सील नहीं करना है। गुरुग्राम नगर नगर निगम को पिछले वर्ष की तुलना में 16.37 करोड़ रुपये कम टैक्स मिला है। वित्त वर्ष 2023-24 में गुरुग्राम निगम में टैक्स की रिकवरी 278.49 करोड़ रुपये हुई थी, वहीं 2024-25 में यह घटकर 262.12 करोड़ रह गई।
गुरुग्राम में कुल संपत्तियां : श्रेणीवार विवरण
- श्रेणी - संख्या
- रिहायशी - 4,37,111
- व्यावसायिक - 92,457
- औद्योगिक - 6,561
- संस्थानिक - 4,408
- खाली प्लाट - 1,11,361
- विशेष श्रेणी - 6,138
- मिश्रित उपयोग - 34,136
- कृषि - 13,430
- कुल - 7,05602
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