गमलों में उगाएं मेथी-पालक से लेकर नींबू-अनार तक... पलवल के एग्री एक्सपर्ट का मंत्र कितना सटिक?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक के अनुसार, पौष्टिक आहार के लिए फल और सब्जियां जरूरी हैं। शहरों में जगह कम होने के कारण, नवीनतम तकनीक से आंगन या छत पर गमलों में सब्जियां उगाई जा सकती हैं। बाजार की सब्जियां जहरीली हो सकती हैं, इसलिए घर पर जैविक सब्जियां उगाना बेहतर है। गमलों में रेत, मिट्टी और खाद भरकर, उचित धूप और पानी देकर कई प्रकार की सब्जियां और फल उगाए जा सकते हैं। इससे स्वास्थ्य और पैसे दोनों की बचत होगी।

गमले में सब्जियां उगाने की विधि बताते डा महावीर मलिक। जागरण
जागरण संवाददाता, पलवल। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट डॉ. महावीर सिंह मलिक ने कहा कि पौष्टिक डाइट में फल और सब्जियां बहुत ज़रूरी हैं। इनमें मौजूद विटामिन, न्यूट्रिएंट्स, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। शहरों और गांवों में खेती की ज़मीन कम होती जा रही है। इसलिए, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी अपनाकर हम अपने आंगन और गमलों में ताज़ी सब्जियां उगा सकते हैं। अगर आंगन छोटा है, तो छत पर गमलों में भी पौष्टिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
बाज़ार से खरीदी गई सब्जियां कभी-कभी जहरीली हो सकती हैं क्योंकि सब्जी उगाने वाले पैदावार बढ़ाने के लिए ज़हरीले केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए, हम आसानी से अपने आंगन में या अपने घरों की खुली छत पर ऑर्गेनिक सब्जियां और फल उगा सकते हैं। एग्रीकल्चर एक्सपर्ट डॉ. मलिक ने आगे बताया कि सब्जियां छत पर गमलों में या बड़े, मोटे पॉलीथीन बैग में उगाई जा सकती हैं।
स्टोरेज की जगह के हिसाब से, गमले लगभग दो से चार फीट ऊंचे होने चाहिए। गमलों या बैग को ऐसी जगह पर रखें जहां धूप आती हो। गमलों में सब्जियां लगाने से पहले, गमले के नीचे बने छेद में पत्थर का एक छोटा टुकड़ा रख दें ताकि ज़्यादा पानी निकल जाए। अगर गड्ढा बंद हो गया, तो पौधों की जड़ें सड़ जाएंगी। साथ ही, पॉलीथीन बैग के तले में छोटे-छोटे छेद करें ताकि पानी अंदर जा सके। इन गमलों में बराबर मात्रा में रेत, खेत की मिट्टी, गोबर की खाद या केंचुआ खाद भरें। गमले का ऊपरी हिस्सा 2 से 3 सेंटीमीटर खाली छोड़ दें।
गमलों को ऐसी जगह रखें जहां धूप, छांव और हवा आसानी से आ सके। गमलों में सब्जियां बोने या लगाने के बाद, उन्हें हल्की सिंचाई दें और फिर ज़रूरत के हिसाब से पानी और ऑर्गेनिक खाद या बायोफर्टिलाइज़र डालें। इसी तरह, छत पर मेथी, धनिया, कुल्फा, पालक, मूली, टमाटर, बैंगन, पत्तागोभी, मिर्च, करेला, कद्दू वगैरह सब्जियां और फूलों के गमले लगाए जा सकते हैं, और बड़े गमलों में अनार, नींबू, पपीता, अमरूद, अंगूर वगैरह जैसे छोटे फल वाले पौधे भी लगाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि गांव हो या शहर, घर का आंगन छोटा भी हो तो भी घर की छत पर गमलों में सब्जियां उगाकर अपनी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। इस तरह उगाई गई सब्जियां ताजी, केमिकल-फ्री, स्वादिष्ट, फायदेमंद और पौष्टिक होती हैं। महिलाएं भी घर पर सब्जियां उगाने में अपना पूरा सहयोग दे सकती हैं। इससे खाली समय का सदुपयोग किया जा सकता है और जरूरत के हिसाब से ताजी सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
इससे घर के बच्चों का सामान्य ज्ञान भी बढ़ेगा और पैसे और सेहत दोनों की बचत होगी। किचन और बाथरूम के पानी का भी सही इस्तेमाल होगा। उन्होंने छत पर गमलों में उगाई गई सब्जियों को देखकर जैविक रोग नियंत्रण के उपाय भी बताए।

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