'मणिमहेश झील की तरफ से आया सैलाब देख कांप गई रूह' ...हड़सर में लंगर का मिटा नामोनिशान, श्रद्धालुओं ने सुनाई आपबीती
Manimahesh yatra मणिमहेश यात्रा के दौरान भारी वर्षा और बादल फटने से आई आपदा में फंसे श्रद्धालुओं ने अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि डल झील में सैलाब आने से तबाही मची और वे मुश्किल से हड़सर तक पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उनकी मदद की। श्रद्धालुओं ने यात्रा में सुरक्षा बढ़ाने और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की अपील की।

संवाद सहयोगी, चंबा। Manimahesh Flood, जब श्री मणिमहेश से भारी वर्षा व बादल फटने से आपदा आई तो हम वहीं थे। मणिमहेश से बहने वाले नाले का जलस्तर एकदम से इतना बढ़ गया कि निचली तरफ तबाही मच गई। मणिमहेश डल झील की ओर से अचानक सैलाब आ गया। यह मंजर देखकर हमारी रूह कांप गई। मन में कई तरह के सवाल उठने लगे।
जब थोड़े से हालात सही हुए तो हमने गौरीकुंड से नीचे उतरने का निर्णय लिया। इसके बाद हम बड़ी मुश्किल से धन्छो तक पहुंचे। इस संकट की घड़ी में हम किसी तरह बचकर हड़सर व भरमौर तक पहुंचना चाहते थे। यह आपबीती पठानकोट व अमृतसर से मणिमहेश यात्रा से वापस लौटे श्रद्धालुओं ने सुनाई।
श्रद्धालुओं ने बताया कि जब धन्छो से नीचे हड़सर की ओर उतरने लगे, तब तक रात हो चुकी थी। इस दौरान प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की कोई भी मदद उपलब्ध नहीं थी। हम जंगल से होते हुए हड़सर की तरफ बढ़ रहे थे। इस दौरान यह भय भी सता रहा था कि कहीं पहाड़ी से पत्थर न आ जाएं या भूस्खलन न हो। हम किसी तरह से रात के करीब 11 बजे तक हड़सर पहुंचने में कामयाब हो गए।
हड़सर में बह गया था लंगर
हड़सर के करीब एक किलोमीटर के दायरे में ही प्रशासन व पुलिस की ओर से सहायता उपलब्ध थी। इस आपदा में इतनी भारी तबाही मची है कि कई लंगरों व दुकानों का नामोनिशान तक नहीं बचा है। हड़सर में जिस स्थान पर लंगर लगता है, वहां के ऊपर से पानी बह रहा था। इस स्थान पर सब कुछ बह गया था।
स्थानीय लोगों ने की मदद
इसके बाद स्थानीय लोगों की ओर से हमारी मदद की गई। उन्होंने हमें घर में रखा तथा खाना खिलाया। कुछ लंगर लगे थे, उनमें भी लोग खाना खा रहे थे। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे बहुत दिनों के बाद हम घर वापस जा रहे हैं। अपने स्वजनों के साथ मिलेंगे तथा अपने घरों में सुरक्षित रहेंगे।
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जिंदगी में ऐसा मंजर कभी नहीं देखा
जब यह आपदा आई तो हम मणिमहेश में थे। यह मंजर इतना भयानक था कि हमारी रूह तक कांप गई। हम बहुत मुश्किल से हड़सर तक पहुंचे हैं। धन्छो से हड़सर तक कोई भी सहायता नहीं मिली। भरमौर से हम पैदल आए हैं। मार्ग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुके हैं। मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा मंजर कभी नहीं देखा था। भगवान की दया से हम सुरक्षित पहुंचे हैं। मणिमहेश यात्रा में सुरक्षा व प्रबंधों को और कड़ा करने की जरूरत है, ताकि यदि आपदा आए भी तो लोगों को अपनी जान का खतरा न हो।
-अजय कुमार, पठानकोट।
भगावान ऐसा मंजर दोबारा न दिखाए
लोगों ने अपने घरों में ठहराया व खाना भी दिया। हम बहुत मुश्किल से सुरक्षित पहुंचे हैं। कभी किसी स्थान पर मार्ग सही मिला तो वहां से लोगों के निजी वाहन में लिफ्ट ले लेते। फिर एक या दो किलोमीटर के बाद उतरना पड़ा। इसके बाद फिर से पैदल चलना पड़ा। जब तक हमें बस नहीं मिली, तब तक अधिकतर पैदल ही सफर करना पड़ा। भगवान से यही प्रार्थना है कि इस तरह का मंजर कभी दोबारा न दिखाए।
-संदीप कुमार, पठानकोट।
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धार्मिक स्थलों की पवित्रता भंग न हो
मैंने मणिमहेश यात्रा में इस बार जो हालात देखे हैं, उसे देखकर रूह कांप गई है। प्रशासन ने अपनी तरफ से बहुत कुछ किया है। लेकिन, हालातों को सामान्य करने को लेकर और तीव्रता दिखानी होगी। प्रशासन से अपील है कि जब भी यात्रा शुरू हो तो शराब पर रोक होनी चाहिए। लोग मंदिरों में शराब लेकर जा रहे थे। इससे पवित्र स्थलों की पवित्रता भंग हो रही थी। स्थानीय लोगों ने हमारी मदद की, ऐसे में हमें बहुत अच्छा लगा। हम अपने वाहन भरमौर में ही छोड़कर आए हैं। मार्ग बहाल होने में काफी समय लगेगा। बहाल होने के बाद वाहन वापस ले जाएंगे। जो लोग भी शेष बचे हैं, उन्हें जल्द रेस्क्यू किया जाए।
-पवन कुमार, अमृतसर।
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