राधा अष्टमी पर मणिमहेश नहीं पहुंच सके श्रद्धालु तो चौगान में की पूजा, बिलखते हुए बोले- श्रद्धाभाव से ही मणिमहेश आएं
Manimahesh Yatra इस वर्ष राधा अष्टमी पर चंबा चौगान में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। भारी बारिश के कारण मणिमहेश यात्रा बाधित होने से श्रद्धालुओं ने चौगान में ही छड़ी की पूजा की। जम्मू से आने वाली छड़ियां डल झील तक नहीं पहुंच पाईं जिससे श्रद्धालु भावुक हो गए।

जागरण संवाददाता, चंबा। Manimahesh Yatra, राधा अष्टमी पर इस बार चंबा चौगान इतिहास का गवाह बना। जम्मू के भद्रवाह व अन्य क्षेत्रों से आने वाली छड़ियां राधा अष्टमी पर मणिमहेश की डल झील तक नहीं पहुंच पाईं। गत दिनों भारी बारिश के कारण यात्रा मार्ग सहित चंबा-भरमौर सड़क बंद होने से यात्रा पर रोक लगाई गई है। इस कारण कई दिन से चंबा चौगान में यात्रा पर जाने की अनुमति का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं ने यहीं पर पूजन कर वापसी की राह पकड़ ली।
श्रद्धालुओं ने चौगान में रखी पवित्र छड़ियों की परिक्रमा कर भगवान शिव से आशीर्वाद मांगा। उस क्षण चौगान में उमड़ी हजारों की भीड़ की आंखों से आंसू छलक पड़े, परंपरा टूटने का दर्द था, लेकिन आस्था ने चौगान को ही मणिमहेश बना दिया।
चंबा चौगान में पूजा करते मणिमहेश न जा पाने वाले श्रद्धालु... pic.twitter.com/i8oYt9DBKk
— Rajesh Sharma (@sharmanews778) August 30, 2025
श्रद्धालुओं का मानना है कि मणिमहेश डल पर सफाई व नीति नियम का पालन न करने से यह आपदा आई है। रोते हुए श्रद्धालु बोले कि सच्चे श्रद्धाभाव से ही मणिमहेश आएं व साफ-सफाई और नीति नियम का पालन जरूर करें।
चंबा चौगान से निभाई परंपरा, किया पूजन
चंबा चौगान के विशाल मैदान में इस वर्ष राधाष्टमी पर एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। सदियों पुरानी परंपरा के तहत राधाष्टमी पर मणिमहेश डल झील में छड़ी दल द्वारा डल तोड़ने की रस्म अदा की जाती थी। लेकिन इन्हें पहली बार यह परंपरा चंबा चौगान में ही पूरी करनी पड़ी। हालांकि भरमौर संचुई के शिव चेलों ने डल तोड़ने की परंपरा का निर्वहन किया है। श्रद्धालुओं और साधुओं ने चौगान में रखी छड़ियों की परिक्रमा कर भगवान शिव से प्रार्थना की और यहीं से पूजन-अर्चन कर परंपरा निभाई।
पहली बार मणिमहेश नहीं पहुंची छड़ी यात्रा
इतिहास के पन्नों में यह पहला अवसर है, जब जम्मू और डोडा से आने वाली कोई भी छड़ी मणिमहेश नहीं पहुंच पाई। प्राकृतिक आपदा और मार्ग बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को इस बार चौगान में ही रस्म निभानी पड़ी। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था का तेज तो था, लेकिन आंखों में आंसुओं का सैलाब भी उमड़ रहा था।
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चौगान बना आस्था का डल
चौगान में हजारों श्रद्धालु हर हर महादेव के उद्घोष के साथ मौजूद रहे। परिक्रमा करते समय हर कोई भावुक हो उठा। श्रद्धालु कहते नजर आए कि भले ही डल तक पहुंच न सके, लेकिन भगवान शिव हर जगह विद्यमान हैं। चौगान ही आज मणिमहेश डल बन गया है।
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श्रद्धालुओं का दर्द और भक्ति
अनेक श्रद्धालु इस परंपरा को चौगान में निभाते देख भावुक हो गए। कुछ की आंखों से अश्रुधार बह निकली। श्रद्धालुओं का कहना था कि जीवन में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि छड़ियां डल तक न पहुंच पाईं। लेकिन आस्था इतनी प्रबल रही कि सभी ने चौगान को ही पवित्र तीर्थ मानकर भगवान शिव को नमन किया।
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