Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    राधा अष्टमी पर मणिमहेश नहीं पहुंच सके श्रद्धालु तो चौगान में की पूजा, बिलखते हुए बोले- श्रद्धाभाव से ही मणिमहेश आएं

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 07:25 PM (IST)

    Manimahesh Yatra इस वर्ष राधा अष्टमी पर चंबा चौगान में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। भारी बारिश के कारण मणिमहेश यात्रा बाधित होने से श्रद्धालुओं ने चौगान में ही छड़ी की पूजा की। जम्मू से आने वाली छड़ियां डल झील तक नहीं पहुंच पाईं जिससे श्रद्धालु भावुक हो गए।

    Hero Image
    मणिमहेश न पहुंच पाने पर चंबा चौगान में छड़ी की पूजा करते श्रद्धालु।

    जागरण संवाददाता, चंबा। Manimahesh Yatra, राधा अष्टमी पर इस बार चंबा चौगान इतिहास का गवाह बना। जम्मू के भद्रवाह व अन्य क्षेत्रों से आने वाली छड़ियां राधा अष्टमी पर मणिमहेश की डल झील तक नहीं पहुंच पाईं। गत दिनों भारी बारिश के कारण यात्रा मार्ग सहित चंबा-भरमौर सड़क बंद होने से यात्रा पर रोक लगाई गई है। इस कारण कई दिन से चंबा चौगान में यात्रा पर जाने की अनुमति का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं ने यहीं पर पूजन कर वापसी की राह पकड़ ली। 

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    श्रद्धालुओं ने चौगान में रखी पवित्र छड़ियों की परिक्रमा कर भगवान शिव से आशीर्वाद मांगा। उस क्षण चौगान में उमड़ी हजारों की भीड़ की आंखों से आंसू छलक पड़े, परंपरा टूटने का दर्द था, लेकिन आस्था ने चौगान को ही मणिमहेश बना दिया।

    श्रद्धालुओं का मानना है कि मणिमहेश डल पर सफाई व नीति नियम का पालन न करने से यह आपदा आई है। रोते हुए श्रद्धालु बोले कि सच्चे श्रद्धाभाव से ही मणिमहेश आएं व साफ-सफाई और नीति नियम का पालन जरूर करें। 

    चंबा चौगान से निभाई परंपरा, किया पूजन

    चंबा चौगान के विशाल मैदान में इस वर्ष राधाष्टमी पर एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। सदियों पुरानी परंपरा के तहत राधाष्टमी पर मणिमहेश डल झील में छड़ी दल द्वारा डल तोड़ने की रस्म अदा की जाती थी। लेकिन इन्हें पहली बार यह परंपरा चंबा चौगान में ही पूरी करनी पड़ी। हालांकि भरमौर संचुई के शिव चेलों ने डल तोड़ने की परंपरा का निर्वहन किया है। श्रद्धालुओं और साधुओं ने चौगान में रखी छड़ियों की परिक्रमा कर भगवान शिव से प्रार्थना की और यहीं से पूजन-अर्चन कर परंपरा निभाई।

    पहली बार मणिमहेश नहीं पहुंची छड़ी यात्रा

    इतिहास के पन्नों में यह पहला अवसर है, जब जम्मू और डोडा से आने वाली कोई भी छड़ी मणिमहेश नहीं पहुंच पाई। प्राकृतिक आपदा और मार्ग बंद होने के कारण श्रद्धालुओं को इस बार चौगान में ही रस्म निभानी पड़ी। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था का तेज तो था, लेकिन आंखों में आंसुओं का सैलाब भी उमड़ रहा था।

    यह भी पढ़ें- आपदा में फंस गए मणिमहेश श्रद्धालु तो परवेज अली ने रात 11 बजे खोल दिए कॉलेज के दरवाजे, 200 लोगों के लिए की व्यवस्था

    चौगान बना आस्था का डल

    चौगान में हजारों श्रद्धालु हर हर महादेव के उद्घोष के साथ मौजूद रहे। परिक्रमा करते समय हर कोई भावुक हो उठा। श्रद्धालु कहते नजर आए कि भले ही डल तक पहुंच न सके, लेकिन भगवान शिव हर जगह विद्यमान हैं। चौगान ही आज मणिमहेश डल बन गया है।

    यह भी पढ़ें- Manimahesh Yatra: कुगती परिक्रमा मार्ग से SDRF ने 8 श्रद्धालु किए रेस्क्यू, एक और शव मिला; अब तक 23 की मौत व आठ लापता

    श्रद्धालुओं का दर्द और भक्ति

    अनेक श्रद्धालु इस परंपरा को चौगान में निभाते देख भावुक हो गए। कुछ की आंखों से अश्रुधार बह निकली। श्रद्धालुओं का कहना था कि जीवन में पहली बार ऐसा देखने को मिला कि छड़ियां डल तक न पहुंच पाईं। लेकिन आस्था इतनी प्रबल रही कि सभी ने चौगान को ही पवित्र तीर्थ मानकर भगवान शिव को नमन किया।

    यह भी पढ़ें- Manimahesh Yatra: तबाही ने तोड़ दी परंपरा, मणिमहेश रवाना हुए संचुई के शिव चेले नहीं पहुंच सके डल झील तक

    यह भी पढ़ें- Manimahesh Yatra: 30 साल बाद डल झील से चंबा तक फिर वही तबाही, 10 हजार लोग फंसे हैं यात्रा मार्ग पर, सड़कें व पुल बहे