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    हिमाचल रतन सम्मान से नवाजे गए हिमाचली प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत, अभिनेत्री ईशा देओल ने दिया अवॉर्ड

    Updated: Sat, 28 Jun 2025 03:32 PM (IST)

    कुल्लू मनाली की वादियों में बसे डोगरी गांव से इंद्रजीत की आवाज की यात्रा शुरू हुई। 12 मार्च 1992 को जन्मे इंद्रजीत ने बिना किसी गुरु और संसाधन के संगीत में रुचि दिखाई। उन्होंने हिमाचल की लोकसंस्कृति को संजोया। 2016 में उनका गीत ‘हाड़े मेरे मामुआ’ सुपरहिट हुआ। हाल ही में उन्हें हिमाचली प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत को हिमाचल रतन सम्मान से नवाजा गया।

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    लोकगायक इंद्रजीत को मिला हिमाचल रतन अवार्ड

    दविंद्र ठाकुर, कुल्लू। कुल्लू मनाली की खूबसूरत वादियों में बसा एक छोटा सा गांव…दोगरी । यहीं से शुरू हुई एक आवाज़ की यात्रा जो आज न सिर्फ हिमाचल की पहचान है, बल्कि लोकसंस्कृति का एक वैश्विक प्रतीक बन चुकी है। एक नाम है इंद्रजीत। 12 मार्च 1992 को जन्मे इंद्रजीत ने बचपन से ही संगीत में रुचि दिखाई, पर न कोई गुरु, न संसाधन…फिर भी हौसला था बुलंद।

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    मात्र 16 साल की उम्र में, खुद लिखे और कंपोज किए गए 10 गीतों की पहली वीडियो एल्बम 'दिल का क्या कसूर' सीडी लांच की, वो दौर डिजिटल क्रांति से पहले का था पर इंद्रजीत की सोच बहुत आगे की थी। समय के साथ उन्होंने जो किया, वो किसी क्रांति से कम नहीं था उन्होंने फिल्मों या चमक-दमक की दुनिया से दूर रहकर, हिमाचल की मिट्टी, उसकी बोली, उसकी टोपी और संस्कृति को संजोया... और पूरे गर्व से दुनिया के सामने रखा। उन्होंने विलुप्त होती जा रही लोकसंस्कृति को एक नया जीवन दिया अपने शब्दों और सुरों के माध्यम से।

    2016 में आया उनका सुपरहिट गीत ‘हाड़े मेरे मामुआ’, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। इसके बाद ‘लाड़ी शाऊणी’, ‘पाखली माणू’, ‘बुधुआ मामा’, ‘साजा लागा माघे रा’ जैसे गीतों ने यूट्यूब पर करोड़ों दिलों को छू लिया और हिमाचल की विरासत को एक नए युग से जोड़ा। उनकी कलम केवल मनोरंजन नहीं करती, वह सामाजिक संदेश भी देती है। जहां एक ओर ‘अठारह करडू’ जैसे गीत देव संस्कृति को समर्पित हैं, वहीं ‘मता केरदे नशा’ युवाओं को नशे से दूर रहने की प्रेरणा देता है।

    जब इंद्रजीत ने हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह के जीवन पर आधारित गीत को अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया, तो उसे सुनकर स्वयं वीरभद्र सिंह की आंखें भी नम हो गई थीं। मुख्यमंत्री हो या राज्यपाल, सभी ने उनके गीतों को सम्मान दिया है।

    आज इंद्रजीत सिर्फ एक गायक नहीं, बल्कि एक मिशन हैं। हिमाचल की लोकसंस्कृति को जीवित रखना और उसे वैश्विक मंच पर स्थापित करना, इसी मिशन पर वह कार्य कर रहे हैं। 100 से अधिक गीत, देश-विदेश में अनेकों मंचों पर प्रस्तुति, और लाखों दिलों की धड़कन बन चुके हैं इंद्रजीत।

    उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तरीय मंचों पर सम्मानित किया है हाल ही देहरादून में थ्री फिंगर एंटरटेनमेंट लिमिटेड कंपनी द्वारा आयोजित एक्सीलेंस आईकॉनिक अवॉर्ड 2025 के तहत हिमाचली प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत को हिमाचल रतन सम्मान से नवाजा गया यह सामान बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री ईशा देओल के हाथों से दिया गया गया है।

    लोक गायक इंद्र जीत ने ये अवार्ड अपने सभी चाहने वालों और हिमाचल प्रदेश के सभी लोगों को समर्पित किया इस समारोह में देश के अलग अलग राज्य से आए हुए अपने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने बालों को भी सम्मानित किया गया। वे आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा हैं कि यदि आप अपनी जड़ों से जुड़े रहें, तो आप आसमान को भी छू सकते हैं। यह केवल संगीत नहीं, हिमाचल की मिट्टी की खुशबू है जो इंद्रजीत की आवाज़ के ज़रिए दुनिया तक पहुंचती है।