Himachal Flood: 3280 लोग किए गए रेस्क्यू, 80 KM पैदल चलकर बचाई श्रद्धालुओं ने जान, हिमाचल में कैसे हैं हालात?
चंबा में बादल फटने और भारी वर्षा के बाद स्थिति सुधर रही है। इंटरनेट सेवा और चंबा-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग बहाल हो गए हैं लेकिन मणिमहेश यात्रा पर आए श्रद्धालु अभी भी फंसे हुए हैं। रावी नदी में बाढ़ से चंबा-भरमौर एनएच का नामोनिशान मिट गया है। प्रशासन ने 3280 लोगों को सुरक्षित निकाला है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया।

जागरण टीम, शिमला। बादल फटने व भारी वर्षा से प्रभावित हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थिति अब सुधरने लगी है। गुरुवार को चार दिन बाद चंबा में इंटरनेट सेवा और चंबा-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) बहाल हो गए।
हालांकि मणिमहेश यात्रा पर आए हजारों श्रद्धालु अब भी जगह-जगह फंसे हैं। रावी नदी में आई बाढ़ से चंबा-भरमौर एनएच का नामोनिशान मिट गया है।
मणिमहेश नाले में आई बाढ़ से रास्ते व पुल बह गए हैं। प्रशासन ने 3280 लोगों को सुरक्षित निकाला। इनमें 280 बच्चे शामिल हैं। तीन दिन में 11 श्रद्धालुओं की मणिमहेश यात्रा के दौरान मौत हुई है। भरमौर व हड़सर में फंसे कुछ लोग पैदल ही 70-80 किलोमीटर का पैदल सफर कर चंबा मुख्यालय पहुंचे। श्रद्धालु आरोप लगा रहे हैं कि प्रशासन की ओर से उनकी सुध नहीं ली जा रही है।
बनीखेत पहुंचे पंजाब के रूपनगर के श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन पर मदद न करने का आरोप लगाया। कहा कि स्थानीय लोगों व टैक्सी चालकों ने उनकी मदद की।
बार एसोसिएशन चंबा ने उपायुक्त के समक्ष बिजली, पानी व इंटरनेट सुविधाएं ठप पड़ने का मुद्दा रखा। वकीलों ने आरोप लगाया कि उपायुक्त ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद वकीलों ने चंबा शहर में चक्काजाम कर दिया।
हिमाचल में राष्ट्रीय आपदा घोषित करने का प्रस्ताव पारित
हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने मौजूदा मानसून के दौरान प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिए गुरुवार को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया।
इस प्रस्ताव का समर्थन विपक्षी दल भाजपा ने भी किया। भाजपा ने चर्चा के दौरान राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का विरोध किया, जिसके चलते सदन में नारेबाजी और हंगामा होता रहा।
यह प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने नियम 102 के तहत पेश किया था। नेगी ने कहा कि प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित करना आवश्यक है। भले ही केंद्र सरकार हिमाचल की प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित न करे, लेकिन यह संदेश जाना चाहिए कि हिमाचल सच में मदद का हकदार है।
चमोली में नीति मलारी हाईवे भूस्खलन से अवरुद्ध
उत्तराखंड के चमोली में चीन सीमा को जोड़ने वाला ज्योतिर्मठ-नीति मलारी हाईवे लाता के पास भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया है। हाईवे पर गुरुवार सुबह भूस्खलन के बाद बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा आ गया। इससे दर्जनों गांवों के लोगों के साथ ही सेना की आवाजाही बाधित हो गई है। उधर उत्तरकाशी के धराली व स्यानाचट्टी और चमोली के थराली में आपदा प्रभावित शिविरों में शरण लिए हैं।
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