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    मोबाइल फोन पर गेम की लत बनने लगी बीमारी; बच्चे ही नहीं बुजुर्ग भी हुए आदी, इन 5 बिंदुओं पर अमल कर छुड़ाएं लत

    Mobile Game Addiction मोबाइल गेम की लत बढ़ती जा रही है जिससे युवा और बुजुर्ग प्रभावित हैं। आईजीएमसी शिमला में कई मामले सामने आए हैं जहाँ लोग लाखों रुपये हार चुके हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चे पढ़ाई से विमुख हो रहे हैं और बुजुर्ग पैसे के लालच में लत का शिकार हो रहे हैं।

    By Jagran News Edited By: Rajesh Kumar Sharma Updated: Mon, 25 Aug 2025 02:19 PM (IST)
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    युवा ही नहीं बुजुर्ग व अधेड़ को भी मोबाइल गेमिंग की लत लगी हुई है।

    शिखा वर्मा, शिमला। Mobile Game Addiction, राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही आनलाइन गेमिंग बिल अब अधिनियम बन गया है, यह राहत की बात है। हिमाचल में स्थिति यह है कि कई ने मोबाइल फोन गेम के चक्कर में करोड़ों रुपये गंवाए हैं और किशोर एवं युवा मोबाइल फोन के आदी होकर पढ़ाई से विमुख हो रहे हैं।

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    स्थिति यह है कि चिंतित अभिभावक बच्चों व बुजुर्गों को लेकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज व अस्पताल (आइजीएमसी) के साइकाइट्री विभाग में ही कुछ दिन में ऐसे पांच से छह मामले सामने आ चुके हैं।

    यही स्थिति कांगड़ा के टांडा व मंडी के नेरचौक मेडिकल कालेज की भी है। मोबाइल फोन पर गेम का असर दिमाग व आंखों पर भी पड़ रहा है।

    पढ़ने के लिए दिए मोबाइल पर बच्चे गेम खेलने में व्यस्त 

    कुछ अभिभावकों का कहना है कि कोरोना महामारी के समय बच्चों को पढ़ने के लिए मोबाइल फोन दिए थे, लेकिन वे अब इसकी गिरफ्त में आ गए हैं। बच्चे स्कूल से आने के बाद आनलाइन गेम खेलने में व्यस्त रहते हैं। अभिभावकों की चिंता यह है कि इसका उनके स्वास्थ्य, दिनचर्या व स्वभाव पर भी असर पड़ रहा है।

    बुजुर्ग व अन्य लोगों को भी लग रही लत

    ऐसी ही हालत बुजुर्गों व अन्य लोगों की भी है। पहले लोग मनोरंजन के लिए गेम खेलते हैं, लेकिन कब इसकी लत लग जाए उन्हें भी पता नहीं चलता। पैसे जीतने के चक्कर में कई लोगों ने अपने जीवनभर की कमाई भी गंवा दी है।

    डाक्टर बोले, युवा ही नहीं अधेड़ भी इससे ग्रस्त 

    आइजीएमसी के साइकाइट्री विभाग में कारोबारी, युवा व कर्मचारी इलाज करवाने पहुंचे हैं। डाक्टरों की मानें तो गेम का युवाओं में अलग क्रेज है, लेकिन अधेड़ आयु के लोग भी पैसे के लालच में इससे ग्रस्त हैं। 

    केस स्टडी

    • बीस लाख रुपये गंवाने के बाद पहुंचे अस्पताल

    शिमला शहर का एक कारोबारी लगभग 20 लाख रुपये गंवाने के बाद इलाज के लिए आइजीएमसी पहुंचा है। पैसा गंवाने के बावजूद स्वजन इस बात से संतुष्ट हैं कि उनके परिवार का सदस्य ठीक है। डाक्टरों के मुताबिक पीड़ित व्यक्ति पहले शौक और बाद में रिकवरी के लिए गेम खेलता रहा। लगभग 20 लाख रुपये गंवाने के बाद स्वजन को जब सच्चाई पता चली तो वे उन्हें आइजीएमसी लेकर पहुंचे। 

    पढ़ाई छोड़ सालभर गेम ही खेलता रहा 

    शिमला शहर के एक निजी स्कूल का छात्र पढ़ाई के बजाय एक साल लगातार गेम खेलता रहा। इसका असर बच्चे की पढ़ाई, आंखों व सेहत सभी पर पड़ा। स्वजन को जब शिक्षकों ने बच्चे के लगातार कक्षा में न आने व होमवर्क न करने की बात बताई तो उन्हें इसके बारे में पता चला।

    रात तीन बजे तक वेब सीरीज देख रहा

    बच्चा रात तीन बजे तक मोबाइल फोन पर वेब सीरीज देखता रहता था। सुबह जल्दी नहीं उठने के कारण समय पर स्कूल नहीं पहुंच पा रहा था। माता-पिता कहते तो झगड़ा करता। बच्चे की हरकतों से परेशान माता-पिता उसे टांडा मेडिकल कालेज के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे। काउंसिलिंग के बाद अब धीरे-धीरे उसकी आदतों में सुधार हो रहा है।

    दोस्त न होने पर मोबाइल फोन में खोया

    परिवार पहले पंजाब में रहता था। हिमाचल आए तो यहां दोस्त नहीं होने के कारण बच्चा अकेलापन महसूस करने लगा। इस कारण मोबाइल फोन पर ज्यादा समय व्यतीत करने लगा और उदास रहने लगा। टांडा मेडिकल कालेज के मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में उसकी काउंसिलिंग की गई। अब यहां उसके दोस्त भी बन गए हैं तो मोबाइल फोन की लत कुछ हद तक छूट गई है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    मोबाइल फोन पर गेम की लत छुड़ाने के लिए लोग परिवार के सदस्यों को इलाज के लिए ला रहे हैं। हालांकि अभी तक इनकी संख्या कम है। पांच से छह मामले अभी तक आ चुके हैं।

    -डा. दिनेश दत्त शर्मा, अध्यक्ष मनोरोग विभाग आइजीएमसी।

    हर तीसरा व्यक्ति मोबाइल फोन का अत्यधिक प्रयोग कर मानसिक तनाव, अनिद्रा और चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहा है। काफी समय तक स्क्रीन देखने से न सिर्फ आंखों और दिमाग पर असर पड़ता है, बल्कि पारिवारिक व सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है। मेडिकल कालेज में हर माह दो से तीन रोगी मोबाइल फोन की लत से जुड़ी परेशानियों के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

    -डा. विनीत शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर मनोचिकित्सा विभाग नेरचौक मेडिकल कालेज।

    मोबाइल फोन की लत के 10वीं, जमा एक व दो में पढ़ने वाले यानी 16 से 20 आयु वर्ग के बच्चे ज्यादा शिकार होते हैं। घर वाले मना करते हैं तो बच्चे झगड़ालू हो जाते हैं। मनोचिकित्सा विभाग की ओपीडी में हर माह तीन-चार ऐसे बच्चों को लेकर स्वजन पहुंचते हैं। स्वजन बच्चों को प्यार से समझाएं। उनके साथ समय बिताएं तभी इस लत से छुटकारा मिल सकता है।

    -डा. मेजर सुखजीत सिंह, विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा, टांडा मेडिकल कालेज।

    मोबाइल फोन पर गेम की लत के दुष्परिणाम

    • तनाव, चिंता, अवसाद, मोटापा, आंखों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं।
    • सामाजिक जीवन पर प्रभाव सहित ध्यान और एकाग्रता में कमी आ सकती है।
    • नींद की कमी सहित व्यक्ति की दिनचर्या और उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है।
    • आर्थिक समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि गेम पर अधिक पैसा खर्च करना।

    इस तरह छोड़ सकते हैं आदत

    1. मोबाइल गेम खेलने के समय को सीमित करने के लिए लक्ष्य निर्धारित करें।
    2. गेमिंग एप को ब्लाक करने के लिए एप ब्लाकर्स का उपयोग करें।
    3. खेल, पढ़ाई, संगीत या अन्य गतिविधियों में शामिल हों जो आपको पसंद हों।
    4. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के साथ मोबाइल फोन को दूर रखें। 
    5. यदि मोबाइल गेम की लत गंभीर है, तो प्रोफेशनल मदद लेना उचित रहेगा।

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