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    Himachal News: मंडियों में पहुंचा कश्मीरी सेब, हिमाचली के दाम गिरने से बागबानों को नुकसान

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 12:39 PM (IST)

    दिल्ली गुजरात और सूरत की मंडियों में कश्मीरी सेब के आने से शिमला के सेब के दाम गिर गए हैं। बागबानों को त्योहारी सीजन में उछाल की उम्मीद थी पर प्रतिस्पर्धा बढ़ने से संभावना नहीं है। पराला मंडी में सेब की पेटी 1200 से1500 रुपये में मिल रही है। कश्मीरी सेब की गुणवत्ता बेहतर होने से खरीदार उधर आकर्षित हो रहे हैं। शिमला के बागबानों को नुकसान हो रहा है।

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    बाजारों नें पहुंचे कश्मीरी सेब और शिमला के सेब

    जागरण संवाददाता, शिमला। दिल्ली, गुजरात और सूरत की बड़ी मंडियों में कश्मीरी सेब की दस्तक के साथ ही शिमला की मंडियों में दाम गिर गए हैं। बागबानों को उम्मीद थी कि त्योहारी सीजन पर सेब के दाम में उछाल आ सकता है, लेकिन कश्मीरी सेब आने से मंडियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। ऐसे में सेब के दाम में उछाल आने की कोई संभावना नहीं है।

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    पराला फल मंडी के आढ़ती सुशील ठाकुर का कहना है कि पराला एवं ढली मंडी में सेब की 20 किलो की पेटी का औसतन दाम 1200 से 1500 रुपये मिल रहा है। वहीं पिंजौर सहित अन्य मंडियों में भी शिमला के सेब को दाम कम मिल रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले खरीदार अब शिमला के बजाय कश्मीरी सेब की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि कश्मीरी सेब गुणवत्ता में शिमला के सेब से इस बार बेहतर है।

    इससे मंडियों में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है। इससे शिमला के बागबानों को इस बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। अन्य राज्यों की मंडियों में कश्मीर के गाला किस्म के सेब को 1400 से 1500 रुपये प्रति पेटी दाम मिल रहे हैं। पिंजौर मंडी के आढ़ती ज्ञान सिंह का कहना है कि देश की बड़ी मंडियों में कश्मीर से गाला किस्म का सेब पहुंचना आरंभ हो गया है।

    इसके अलावा रायल सेब भी पहुंच रहा है। दिल्ली, गुजरात और सूरत सहित अन्य मंडियों में कश्मीरी सेब दस्तक दे चुका है। हालांकि अभी कश्मीर से आवक कम है, लेकिन आने वाले दिनों में जैसे ही कश्मीरी सेब तेजी पकड़ेगा, शिमला के सेब पर भी इसका असर पड़ेगा।

    वहीं अदाणी, देवभूमि सहित विभिन्न कंपनियों ने सेब के दाम तय कर दिए हैं। इससे भी प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इससे उन बागबानों पर मार पड़ेगी, जिनके पास इस बार उच्च गुणवत्ता का सेब नहीं बन पाया है। हिमाचल की मंडियों में अभी तक लगभग दो करोड़ पेटियां पहुंची हैं। इनमें से गाला किस्म की कितनी पेटियां मंडियों में पहुंची हैं, इसका सही अनुमान लगाना अभी मुश्किल है।

    प्रदेश में लगभग 40 किस्म का सेब उगाया जा रहा है। कृषि उपज विपणन समिति की ओर से मंडियों में पेटियों की गणना की जाती है। किस्मों के आधार पर गणना नहीं की जाती। कश्मीर की जलवायु सेब के लिए हिमाचल की तुलना में बेहतर मानी जाती है। ज्यादा ऊंचाई होने से कश्मीरी सेब हिमाचल की तुलना में देरी से आता है।