जम्मू-कश्मीर सरकार के ढुलमुल रवैये की पीठ ने की आलोचना, रोके गए वेतन पर ट्रिब्यूनल का आदेश बरकरार
जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन को फटकार लगाई। गुलाम मुस्तफा मंटू के वेतन रोकने के मामले में कैट ने अधिकारियों को वेतन जारी करने का निर्देश दिया था। न्यायालय ने कहा कि अधिकरण के निर्देशों का पालन करने के बाद सरकार अब उसे चुनौती नहीं दे सकती। न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।

जेएनएफ, जम्मू। जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश प्रशासन को फटकार लगाई है।
न्यायालय ने उस रिट याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश सरकार और जम्मू-कश्मीर विशेष अधिकरण ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती दी थी।
मामले के अनुसार गुलाम मुस्तफा मंटू निवासी काजीगुंड का वेतन उनके फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र के आरोप के चलते रोक दिया गया था।
इस मामले की सुनवाई करते हुए कैट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि लंबित कार्यवाही के परिणाम के अधीन रहते हुए चार सप्ताह के भीतर उनकी "वैध रूप से अर्जित तनख्वाह" जारी करने पर विचार किया जाए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के निर्देशों का पालन करते हुए विचार आदेश पारित किया था और अब उसे चुनौती नहीं दे सकती है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली व न्यायाधीश रजनेश ओसवाल के नेतृत्व में गठित पीठ ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के निर्देशों को स्वीकार करने और उनके अनुसार कार्य करने के बाद याचिकाकर्ता अब उसी आदेश को चुनौती नहीं दे सकते हैं।न्यायालय ने कहा कि याचिका "गलत धारणा" पर आधारित है और इसे खारिज किया जाता है।
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