जम्मू-कश्मीर: हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों को आजीवन कारावास, 18 साल पुराने मामले में मिली सजा
जम्मू में हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों मोहम्मद मुमताज और फारूक अहमद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इन आतंकियों पर 2003 में मुश्ताक अहमद की हत्या और जहीर अहमद हाफिजुल्लाह और मोहम्मद यासीन के अपहरण का आरोप था। न्यायालय ने उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए मृत्युदंड नहीं दिया। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

जेएनएफ, जम्मू। प्रिंसिपल सेशन जज रामबन दीपक सेठी ने आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के दो आतंकियों मोहम्मद मुमताज और फारूक अहमद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इन दोनों के खिलाफ पिछले बाइस वर्षों से न्यायालय में मुकदमा जारी था।
मामले के अनुसार, 17 दिसंबर 2003 को पुलिस स्टेशन गूल को सूचना मिली थी कि 16 व 17 दिसंबर की सुबह अज्ञात आतंकियों ने मुश्ताक अहमद निवासी गगरसुल्ला दरम गूल को उसके घर से बंदूक की नोक पर बाहर निकाला और हत्या कर दी।
इसके अलावा आतंकियों ने जहीर अहमद, हाफिजुल्लाह और मोहम्मद यासीन का अपहरण भी किया था।गूल पुलिस ने इस संदर्भ में विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था।
जांच के बाद पुलिस ने मोहम्मद मुमताज निवासी हारा गूल, रियाज अहमद, शाहजहां निवासी गगरसुल्ला दरम गूल, मोहम्मद रफीक निवासी सुमद, रामबन को इन मामलों में संलिप्त पाया और उनके खिलाफ हत्या, अपहरण व आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।वहीं वारदात के बाद सभी आरोपित फरार हो गए थे जबकि पुलिस ने उनको भगौड़ा घोषित करवा कोर्ट में चालान पेश कर दिया था।
वहीं प्रिंसिपल सेशन जज रामबन दीपक सेठी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि दोनों आरोपितों ने आत्मसमर्पण किया था और वे समाज में वापस लौटना चाहते हैं। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए न्यायालय उन्हें मृत्यूदंड नहीं दे रहा।
न्यायालय ने मोहम्मद मुमताज और फारूक अहमद को हत्या के मामले में आजीवन कारावास जबकि अपहरण के मामले में दस साल की सजा सुनाई। यह दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी और इनकी अविध उनकी गिरफ्तारी की तारीख से प्रभावी होगी।
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