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    जम्मू कश्मीर की सदन समितियों की बैठक अब 5 सितंबर के बाद, प्रदेश के मौजूदा हालत को देख लिया फैसला

    Updated: Thu, 28 Aug 2025 12:50 PM (IST)

    जम्मू कश्मीर विधानसभा ने खराब मौसम और बाढ़ के कारण सदन समितियों की बैठकों को 5 सितंबर तक स्थगित कर दिया है। प्रशासन प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में जुटा है जिससे अधिकारियों को समिति की बैठकों में भाग लेने में असुविधा हो सकती है। विधायकों ने मंत्री जावेद अहमद राणा से मुलाकात कर विकास कार्यों पर चर्चा की और जन कल्याण के मुद्दों पर ध्यान देने का आग्रह किया।

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    मंत्री ने समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, श्रीनगर। जम्मू कश्मीर विधानसभा ने सभी सदन समितियों की बैठकों को पांच सितंबर तक स्थगित कर दिया है। विधानसभा सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश में मौजूदा समय में खराब मौसम और बाढ़ से उपजे हालात को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

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    प्रशासन का ध्यान इस समय प्रभावित इलाकों मे हालात को सामान्य बनाने और पीड़ितों की मदद मे लगा हुआ है। इसलिए समिति की बैठकों का मौजूदा समय में आयोजन राहत एवं पुनर्वास संबंधी कार्याें में लगे प्रशासनिक अधिकारियों के लिए असुविधाजनक हो सकता है।

    सदन की सभी समितियों की बैठकों कोस्थगित किया गया है। उन्होंने बताया कि विधानसभा के स्पीकर अब्दुल रहीम राथर के निर्देशानुसार सभी बैठकें पां सितंबर, 2025 तक स्थगित कर दी गई हैं।

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    विधायकों ने जावेद राणा से की मुलाकात

    जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा से नागरिक सचिवालय में विधायक सैफुल्लाह मीर, जावेद इकबाल चैधरी, मुजफ्फर इकबाल खान, फैयाज अहमद मीर और इफ्तिखार अहमद ने मुलाकात की।

    बैठक के दौरान, विधायकों ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जन कल्याण और विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंत्री के साथ विस्तृत चर्चा की। जल आपूर्ति, वन संरक्षण, पारिस्थितिक स्थिरता और जनजातीय कल्याण से संबंधित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

    उन्होंने शिकायतों के समय पर निवारण और प्रमुख बुनियादी ढांचा एवं पर्यावरणीय परियोजनाओं के शीघ्र कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।

    मंत्री ने सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और प्रत्येक बिंदु पर उचित एवं समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि वे वास्तविक जन मुद्दों को उठाते रहें और जमीनी स्तर पर आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन के साथ सहयोग करें।

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    उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सार्थक प्रगति हासिल करने और लोगों की ज़रूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों और सरकार के बीच निरंतर संवाद अत्यंत महत्वपूर्ण है।