नहर के प्रकोप से बचने के लिए अब इसका स्वरूप बदलना समय की जरूरत, सिंधु जल समझौता निलंबित होने से राह हुई है आसान
जम्मू में रणबीर नहर के बार-बार टूटने से हुए नुकसान के बाद सिंधु जल समझौते के निलंबन का लाभ उठाते हुए नहर के स्वरूप में बदलाव की मांग उठ रही है। 19वीं सदी में बनी इस नहर की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाने का प्रस्ताव है जिससे सिंचाई और जल प्रवाह क्षमता में सुधार होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को इस योजना पर जल्द काम शुरू करना चाहिए।

जागरण संवाददाता, जम्मू। पिछले एक सप्ताह में जिस तरह दो बार रणबीर नहर ने जम्मू पश्चिम इलाके में तबाही मचाई है, उससे इसके स्वरूप में बदलाव को लेकर चली आ रही मांगो को बल मिला है।
हालांकि इस तबाही का एक मुख्य कारण सिंचाई विभाग का समय पर उचित कार्रवाई न करना रहा लेकिन अब समाज के विभिन्न वर्ग भारत-पाक के बीच हुए सिंधु जल समझौते के निलंबन का लाभ उठाते हुए इसके स्वरूप में बदलाव की मांग उठाने लगे हैं।
दरिया चिनाब से निकलने वाले रणबीर नहर को 19वीं सदी में बनाया गया था और इसके किनारों पर काफी आबादी हो चुकी है, ऐसे में इस जलप्रवाह बढ़ाने के साथ इसकी लंबाई और चौड़ाई को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने गत दिनाें जो प्रस्ताव बनाया था, उस पर जल्द से जल्द काम शुरू करने की मांग उठने लगी है।
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बुद्धिजीवियों का मानना है कि सरकार को अब अपनी योजना को शुरू करने में विलंब नहीं करना चाहिए और जल्द से जल्द इस पर काम शुरू करना चाहिए ताकि जम्मू के सीमांत क्षेत्रों में पर्याप्त सिंचाई जल पहुंच सके और शहरी इलाके ऐसी आपदा से भी बच सके।
यह है प्रस्ताव
दरिया चिनाब से निकलने वाली रणबीर नहर की लंबाई को वर्तमान लगभग 60 किलोमीटर से दोगुना करके 120 किलोमीटर करने की योजना बनाई गई है।
चौड़ाई को दोगुनी करने की बात सीधे तौर पर नहीं कही गई है, बल्कि योजना का उद्देश्य जल प्रवाह क्षमता बढ़ाना है, जिससे जम्मू और कश्मीर में सिंचाई में सुधार होगा और 19वीं सदी की इस नहर का अधिक उपयोग हो सकेगा।
माना जा रहा है कि रणबीर नहर विस्तार से कृषि और ऊर्जा दोनों ही क्षेत्रों को फायदा मिलेगा। रणबीर नहर जम्मू से 25 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में चिनाब नदी से निकलती है।
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यह लगभग 16,460 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। अब इसे 120 किमी तक बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे पानी की निकासी क्षमता 40 क्यूसेक से बढ़ाकर 150 क्यूसेक तक की जा सकती है।
यह नहर जम्मू के अखनूर क्षेत्र से होकर बहती है और इसके विस्तार से न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की कृषि को फायदा होगा, बल्कि बिजली उत्पादन के लिए भी पानी का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे पाकिस्तान को जाने वाले पानी की मात्रा में कमी आएगी, जिससे वहां की कृषि व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
भारत और जम्मू-कश्मीर सरकार के पास रणबीर नहर का स्वरूप बदलने का यहीं सहीं अवसर है। इस समय सिंधू जल समझौता निलंबित है जिसका लाभ उठाकर अपनी आवश्यकता के हिसाब से सरकार नहर को लंबा कर सकती है और जलप्रवाह बढ़ा सकती है। इससे किसानों को भी फायदा होगा और शहरी इलाकों में होने वाले नुकसान से भी बचा जा सकेगा। -प्रो. हरिओम, राजनीतिक विशेषज्ञ
शहरी इलाकों में तो नहर को चौड़ा करना संभव नहीं होगा लेकिन इसकी लंबाई बढ़ाकर और इससे छोटीे-छोटी नहरें निकाल कर फायदा उठाया जा सकता है। इससे भविष्य में इसके बाहर उछलने की संभावनाएं भी कम हो जाएगी क्योंकि इस बार नहर से पानी उछलकर रिहायशी इलाकों में घुसा है जिससे लोगों का भारी नुकसान हुआ है। -अजेश गुप्ता, रिटायर्ड इंजीनियर
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