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    'महबूबा ने दिल्ली में मुद्दा उठाया होता तो बेहतर...', श्रीनगर में पीडीपी के विरोध प्रदर्शन पर बोले सीएम उमर

    पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राजनीतिक बंदियों की रिहाई और जमाते इस्लामी से जुड़े स्कूलों पर नियंत्रण हटाने की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन किया जिसे पुलिस ने विफल कर दिया। लालचौक जाने की कोशिश में उन्हें रोक दिया गया। उन्होंने सरकार पर कश्मीरी जनादेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।

    By naveen sharma Edited By: Rahul Sharma Updated: Mon, 25 Aug 2025 02:16 PM (IST)
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    उमर अब्दुल्ला ने इसे ड्रामा बताया और दिल्ली में प्रदर्शन करने की सलाह दी।

    राज्य ब्यूरो, जागरण, श्रीनगर। राजनीतिक बंदियों की रिहाई प्रतिबंधित जमाते इस्लामी से संबधित स्कूलों के प्रबंधन पर सरकारी नियंत्रण हटाने की अपने साथियों संग मांग कर रही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने विफल बना दिया।

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    वह लालचौक जाना चाहती थी,लेकिन कार्यालय से आगे नहीं जा पाई। उन्होंने प्रदेश सरकार पर कश्मीरियों के जनादेश का उल्लंघन करने और कुर्सी के लिए भाजपा के साथ समझौता करने का भी आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अब राज्य के दर्जे की बहाली पर भी चुप हो गए हैं।

    इस बीच, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महबूबा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वह विरोध प्रदर्शन के नाम पर ड्रामा कर रही हैं, करने दीजिए। उन्हें यह विरोध प्रदर्शन तो दिल्ली में करना चाहिए था,जहां उनकी मांगों से संबधित मुदृदों पर फैसले लिए जाते हैं।

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    लाल चौक जुलूस निकालने का किया प्रयास

    आज सुबह पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती अपने वरिष्ठ साथियों और कार्यकर्ताओं संग पार्टी मुख्यालय में जमा हुई। उन्होंने वहां से लालचौक तक एक जुलूस निकालने का प्रयास किया। हाथों में जेल नहीं बेल, हमारा हक-हमारा रियासत जैसे नारे लिखे पोस्टर व तख्तियां उठाए पीडीपी के कार्यकर्ता जैसे ही पार्टी मुख्यालय से बाहर निकले, पुलिस ने उन्हें रोक लिया।

    सरकार के खिलाफ खूब हुई नारेबाजी

    वहां जोरदार नारेबाजी शुरू हो गई। जेल नहीं बेल, कश्मीरी कैदियों को रिहा करो-रिहा करो, जमात के स्कूलों पर पाबंदी हटाओ के नारे गूंजे। कुछ देर तक दोनों पक्ष वहीं डटे रहे और उसके बाद महबूबा मुफ्ती व उनके साथ वापस पार्टी कार्याीलय में लौट गए। संबधित पुलिस अधिकारियों नेबताया कि रेजिडेंसी रोड और लालचौक के इलाके में बिना अनुमति जुलूस निकालने पर रोक है, इस इलाके में निषेधाज्ञा लागू है। इसलिए रोकागया है।

    महबूबा बोली सैंकड़ो कश्मीरी नौजवान जेलों में बंद

    अलबत्ता, पार्टी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में महबूबा मुफ्ती ने कहाकि हमारे सैकंड़ों की तादाद में कश्मीरी नौजवान देश की विभिन्न जेलों में बंद हैं। उनमें से कई अत्यंत गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं और उनके परिजन उनसे मिलने भी नही जा सकते, उनके मामलो की पैरवी भी नहीं कर सकते।

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    उन्होंने कहा कि जेल में बंद शब्बीर शाह और प्रतिबंधित जमाते इस्लामी के नेताओं की हालत देखो, उन्हें वहां इलाज तक की सुविधा नहीं मिलती, ऐसे में आम कश्मीरी कैदियों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई नौजवानों पर कोई गंभीर मामला नहीं है,कईयों को बिना सुबूत के ही जेल में रखा गया है। कईयो केा दस-बीस साल हो गए हैं,जेल में बंद हैं।

    अपने चुनावी वादों को भूली नेकां

    उन्होंने कहा कि नेशनल कान्फ्रेंस की सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है। न कश्मीरी कैदियों की रिहाई पर वह बोलती है और न अब राजय के दर्जे की बहाली को लेकर कोई ठोस कदम उठाती है। उसने यहां जमाते इस्लामी के स्कूलों पर सरकारी नियंत्रण की आड़ में पाबंदी लगाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सत्ता के लए भाजपा के एजेंडे और केंद्र सरकार की कश्मीर नीतियो के साथ समझौता कर रलिया है। वह जनादेश के साथ धोखा कर रहे हैं।

    जमात स्कूलों पर लिए फैसले को वापस ले सरकार

    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि सरकार को जमाते इस्लामी के स्कूलों के संदर्भ में लिए गए फैसले को वापस लेना चाहिए। इसके साथ ही कश्मीरी कैदियो को प्रदेश की विभिन्न जेलों में ही रखा जाए। उनके मामलों की समयबद्ध सुनवाई हो और प्रत्येक सुनवाई में उनकी उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए । जेल नहीं जमानत के सिद्धांत को लागू किया जाए।आजीवन कारावास के मामलों में बिना किसी पक्षपात या भेदभाव के पैरोल की सुविधा होनी चाहिए। 

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