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    'कल्पना से परे थी घटना...', वैष्णो देवी पर आपदा को लेकर श्राइन बोर्ड का आया रिएक्शन, अब तक 35 की मौत

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 06:35 AM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस ने प्रशासन को घेरा है। उमर अब्दुल्ला ने यात्रा जारी रखने पर सवाल उठाए। उपराज्यपाल ने कहा कि वह निर्वाचित सरकार के काम में दखल नहीं देते। श्राइन बोर्ड ने लापरवाही से इनकार किया और बताया कि यात्रा पहले ही रोक दी गई थी।

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    प्राकृतिक आपदाओं पर सियासत, श्राइन बोर्ड के सीईओ सचिन वैश्य। (फाइल फोटो)

    नवीन नवाज, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में हाल ही में आई बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं के मुद्दे पर सत्ताधारी दल नेशनल कान्फ्रेंस ने राज्य प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। आपदा के बहाने राजनीतिक स्कोर का अवसर खोजा जा रहा है।

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    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को चेतावनी के बावजूद यात्रा जारी रखने पर सवाल उठाए थे। गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने इसी एजेंडे को आगे बढ़ाया और उपराज्यपाल पर सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि खराब मौसम के बावजूद यात्रा जारी रखने के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।

    श्राइन बोर्ड ने लापरवाही से किया इनकार

    उपराज्यपाल मनोज सिन्हा कई बार कह चुके हैं कि वह निर्वाचित सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं करते। उनके पास केवल कानून-व्यवस्था से संबंधित अधिकार हैं।

    श्राइन बोर्ड ने किसी प्रकार की लापरवाही से इन्कार किया है कि बादल फटने से अचानक यह हादसा हुआ। साथ ही बताया कि ताराकोट मार्ग पर यात्रा पहले से बंद थी और पुराने ट्रैक पर भी 12 बजे यात्रा निलंबित कर दी गई।

    ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार और राजभवन के बीच अधिकारों और शक्तियों के विभाजन को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो चुका है।

    किश्तवाड़ में 70 लोगों की गई जान

    अब आपदा के बहाने उमर सरकार फिर राजभवन को घेरने के प्रयास में जुट गई है। 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले में बादल फटने से आई बाढ़ में लगभग 70 लोग मारे गए, जबकि पिछले मंगलवार को माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन में 35 लोगों की जान गई।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि यह दुखद हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मौसम खराब था, तो क्या लोगों की जान बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाने चाहिए थे? उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने गुरुवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लगातार बारिश और बादल फटने की चेतावनी के बावजूद यात्रा की अनुमति को अपराध बताया।

    उपराज्यपाल पर दबाव बनाना चाहती है नेकां

    विशेषज्ञ सैयद अमजद शाह ने कहा कि उपराज्यपाल के खिलाफ बयानबाजी हो रही है, वह लोगों के दर्द दूर करने के प्रयास से ज्यादा राजनीति है।

    नेकां इन घटनाओं का उपयोग कर उपराज्यपाल पर दबाव बनाना चाहती है, क्योंकि वह उन्हें अपनी सत्ता में सबसे बड़ी रुकावट मानते हैं। इस प्रकार, जम्मू कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं के बीच सियासत का यह नया दौर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना रहा है।

    12 बजे रोक दी गई यात्रा :श्राइन बोर्ड

    श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने आपदा में तीर्थयात्रियों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु पर दुख व्यक्त करते कहा कि श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।

    बोर्ड के अनुसार यात्रा के सबसे सुरक्षित क्षेत्र माने लाने वाले क्षेत्र में बादल फटने से यह हादसा हुआ और्र आपदा के बाद त्वरित कार्रवाई की गई।

    बोर्ड ने हादसे के बाद पहली बार प्रतिक्रिया दी है। बोर्ड के अनुसार भूस्खलन के लिए संवेदनशील ताराकोट मार्ग को 24 अगस्त से ही बंद कर दिया गया था। सामान्य तौर पर सुरक्षित पुराने ट्रैक से यात्रा जारी रखी गई।

    '26 अगस्त तक साफ था मौसम'

    अधिकारी ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह मौसम की स्थिति साफ और तीर्थयात्रा के अनुकूल थी और सुबह 10 बजे तक यात्रा सामान्य चल रही थी और हेलीकाप्टर सेवाएं भी सुचारू चल रही थीं।

    उन्होंने बताया कि बोर्ड ने मौसम अपडेट्स की बारीकी से निगरानी की और जैसे ही मध्यम बारिश का पूर्वानुमान प्राप्त हुआ, यात्रा निलंबित कर दी गई। अधिकांश यात्री पवित्र गुफा मंदिर में दर्शन करने के बाद नीचे की ओर बढ़ रहे थे। हजारों यात्री उस समय तक यात्रा पूरी कर चुके थे।

    उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण आपदा उस स्थान पर हुई थी जो पुराने ट्रैक पर इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास है। यह ट्रैक के सबसे सुरक्षित स्थानों में से एक है। हालांकि, बादल फटने के लगभग 50 मीटर क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ। दोपहर बाद 2:40 बजे यह अप्रत्याशित घटना हुई।

    अतीत में कभी भी इस क्षेत्र में भूस्खलन की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है। श्राइन बोर्ड के अनुसार बोर्ड के आपदा प्रबंधन कार्य बल के साथ जिला प्रशासन, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्वयंसेवकों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया और घायलों को तुंरत अस्पताल पहुंचाया गया।