कांग्रेस के कद्दवार नेता को हराने के लिए जब बूथ एजेंट बने थे 'गुरुजी', सुमृत मंडल को दिलवाई थी जीत
गोड्डा से एक किस्सा सामने आया है जिसमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन 1985 के विधानसभा चुनाव में झामुमो प्रत्याशी सुमृत मंडल के लिए बूथ एजेंट बने थे। उस समय कांग्रेस विधायक हेमंत झा का दबदबा था और बूथ लूटना आम बात थी। पुनर्मतदान में शिबू सोरेन और सूरज मंडल ने मतपेटियों की सुरक्षा की। सुमृत मंडल ने हेमंत झा को हराया।

विधु विनोद, गोड्डा। जमींदारों और सूदखोरों के खिलाफ त्वरित न्याय करने के लिए जाने जाने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन अब हमलोगों के बीच नहीं रहे। संताल परगना में उनकी यादें जन-जन में बसी हैं।
झामुमो कार्यकर्ता अपने बाबा के निधन से मर्माहत हैं। शिबू सोरेन को लेकर कई दिलचस्प किस्से अब लोगों के जुबान पर हैं। इस कड़ी में वर्ष 1985 में गोड्डा विधान सभा चुनाव का एक वाकया खूब चर्चा में है।
जी हां, 1985 के विस चुनाव में यहां शिबू सोरेन झामुमो प्रत्याशी सुमृत मंडल के लिए बूथ एजेंट बने थे। एकीकृत बिहार में तब गोड्डा में तत्कालीन कांग्रेस विधायक हेमंत झा की तूती बाेलती थी।
हेमंत झा का था दबदबा
चुनाव में बूथ लूट की घटना तब आम थी। गोड्डा सदर प्रखंड के रमला और पथरगामा प्रखंड के फुलवड़िया गांव में बूथ लूट की शिकायत पर चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान कर फैसला लिया था। यह इलाका तत्कालीन कांग्रेस विधायक हेमंत झा का प्रभाव वाला क्षेत्र हुआ करता था।
चुनाव में झामुमो और कांग्रेस में सीधी भिड़ंत थी। लिहाजा दोनों ही दल के प्रत्याशी जानते थे कि दो बूथ में मिले वोट से ही हार जीत का फैसला होगा। सो, करो या मरो की स्थिति थी। फुलबड़िया बूथ हेमंत झा के पैतृक गांव महेशपुर से महज दो किमी की दूरी पर था वहीं, रमला बूथ सुमृत मंडल के पैतृक गांव कोरका के निकट।
फुलवड़िया आदिवासी बहुल गांव है वहीं, रमला मंडल बहुल। उक्त दोनों बूथ पर जातीय समीकरण को साधने के लिए शिबू सोरेन और सूरज मंडल ने रणनीति बनाई। फुलबड़िया बूथ पर शिबू सोरेन और रमला बूथ पर सूरज मंडल झामुमो का बूथ एजेंट बनकर बैठ गए।
पुनर्मतदान में दोनों प्रत्याशियों ने ताकत झाेंकी। रमला के अंगद प्रसाद और फुलवड़िया के नासिद लाल हांसदा बताते हैं कि दोनों प्रत्याशी मजबूत थे। सुमृत बाबू ने तो वोट देने के लिए गांव के वैसे सभी लोगों को बुला लिया था जो दूसरे प्रदेशों में नौकरी करते थे।
प्रसाद कहते हैं कि इस समय मनोहर विद्या, हेमलाल मुर्मू, अरुण सहाय, श्रीधर मंडल आदि वामपंथी नेताओं ने भी चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाई थी। हेमंत झा की प्रशासन में अच्छी पकड़ थी। पुनर्मतदान के बाद बैलेट बाक्स को स्ट्रांग रूम में सील करना भी कड़ी चुनौती थी।
रास्ते में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए शिबू सोरेन और सूरज मंडल मतपेटियों को सुरक्षित पहुंचाने तक प्रशासन की गाड़ियों का पीछा किया। रात भर झामुमो के सैकड़ों कार्यकर्ता वज्रगृह में पहरा देते रहे। दूसरे दिन मतगणना हुई तो झामुमो के सुमृत मंडल ने हेमंत झा को 6638 मतों से हरा कर चुनाव जीता।
अलग राज्य के आंंदोलन में संताल परगना रहा गुरुजी का गढ़
झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में संताल परगना गुरुजी की राजनीतिक सक्रियता का गढ़ रहा। झामुमो नेता प्रो. प्रेमनंदन मंडल बताते हैं कि 1992 में गुरुजी ने गोड्डा में झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ सम्मेलन कर अलग राज्य की लड़ाई को धार दी थी।
बाहरी लोगों को भगाने के लिए अभियान चलाया गया था। वहीं, झामुमो नेता राजेश मंडल ने कहा कि वर्ष 2014 के विस चुनाव में जब वे गोड्डा सीट से झामुमो के प्रत्याशी के तौर चुनाव लड़ रहे थे तो गुरुजी ने पथरगामा के गांधीग्राम, बाराबांध और तेलनी में चुनावी सभा कर क्षेत्र में रोड शो भी किया था।
राजेश मंडल बताते हैं कि बाबा संताल परगना के पकौड़े के शौकीन थे। रात्रि विश्राम के बाद सुबह स्नान के लिए पीयर्स साबुन मंगवाते थे। कार्यकर्ताओं के साथ उनका स्नेह और प्यार अभिभावक जैसा रहता था।
शोक में डूबा गोड्डा, संवेदनाओं का तांता
81 वर्षीय शिबू सोरेन के निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। झामुमो, कांग्रेस, भाजपा, राजद, आजसू, सीपीआई नेताओं ने शिबू सोरेन की मौत को राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
गोड्डा जिले के तीनों विधायक क्रमश: प्रदीप यादव, दीपिका पांडेय सिंह और संजय प्रसाद यादव ने कहा कि गुरुजी का निधन उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है। इसकी भरपाई नहीं की जा सकती।
वहीं, झारखंड आंदोलनकारी शिवेंद्र कुमार सिंह, विलास मंडल, मजदूर नेता डॉ. राधे श्याम चौधरी, विभूति मंच के राजेश कुमार झा, भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव मिश्रा, सुभाष चंद्र यादव, आशीष यादव आदि ने कहा कि झारखंडी गौरव दिशोम गुरु शिबू सोरेन का छोड़कर चला जाना प्रत्येक झारखंडी के लिए पीड़ादायी है।झामुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष वासुदेव सोरेन ने कहा कि बाबा के निधन से झारखंड ने धरती सपूत खो दिया।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।