झारखंड में अब एक ही यात्रा में निहारिए जंगल-झरने और पहाड़, मां छिन्नमष्तिका की पूजा के साथ आंकिए खदानों की गहराई
झारखंड में खनन पर्यटन की शुरुआत हो चुकी है जिससे यह देश का पहला राज्य बन गया है। लोग अब खदानों में घूमकर कोयला खनन प्रक्रिया को करीब से देख सकेंगे। रांची से शुरू होकर पतरातू होते हुए उरीमारी खदान तक की यात्रा में प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लिया जा सकेगा। पहले चरण में उरीमारी खदान दिखाई जाएगी बाद में धनबाद जैसे क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा।

नीरज अम्बष्ठ, रांची। झारखंड सिर्फ झाड़-जंगलों, झरनों और बड़े-बड़े जलाशयों की ही धरती नहीं है, यहां पूरे राष्ट्र को असीम ऊर्जा की आपूर्ति करने वाला कोयला भी है। साथ ही अन्य खनिजों का भी भंडार है।
हाल ही में झारखंड में खनन पर्यटन के नए प्रयोग की घोषणा हुई है। इसमें लोग प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेने के साथ ही गहरे खदानों में भी भ्रमण कर सकेंगे।
खनन पर्यटन शुरू कराने वाला झारखंड देश का पहला राज्य है। ऑनलाइन पोर्टल पर इसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है, जहां देशभर के लोगों की इस रोमांचक यात्रा का आनंद उठाने में रुचि दिख रही है।
रांची से शुरू होगी यात्रा, पतरातू होते हुए पहुंचेंगे उरीमारी खदान
खनन पर्यटन के पैकेज के तहत आपकी यात्रा राजधानी रांची से शुरू हाेगी। इसमें आपको सबसे पहले रांची के पास ही स्थित पतरातू की सुंदर घाटी ले जाया जाएगा, जहां रणणीय प्राकृतिक छटा के साथ ही सर्पीली घुमावदार सड़कों का भी आनंद लेने का अवसर प्राप्त होगा।
रास्ते में पलानी वाटर फाल की प्राकृतिक खूबसूरती को नजदीक से निहार सकेंगे। इसके बाद आप पतरातू में तैयार किए गए स्तरीय वाटर पार्क का आनंद ले सकते हैं।
यहां के रिजार्ट में दिन के भोजन के बाद आप पहुंचेंगे उत्तरी उरीमारी ओपन कास्ट खदान जो रांची से लगभग दो घंटे की ड्राइव (65 किमी) की दूरी पर रामगढ़ जिले के बरकाकाना के पास स्थित है।
इस खदान में अर्थमूवर, खुले कोयले की ऊंची दीवारें देख पाएंगे। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) द्वारा संचालित यह खदान झारखंड के सबसे सक्रिय कोयला क्षेत्रों में से एक है।
अभी पहले चरण में खनन पर्यटन के लिए इसी खनन क्षेत्र में यात्रा कराई जा रही है, बाद में इसका दायरा धनबाद समेत कई क्षेत्रों में बढ़ाया जाएगा।
खान के भीतर गाडड समझाएंगे खनन से लेकर डिस्पैच तक की प्रक्रिया
यात्रा की शुरुआत एक सुरक्षा ब्रीफिंग से होगी, जिसमें जानकारी देने के बाद आपको हेलमेट, रिफ्लेक्टिव जैकेट और मजबूत जूते पहना दिए जाएंगे। फिर आएगा विस्मय का क्षण। एक घर के आकार का डंपर जो कोयला ढोते हुए साइलो की ओर रेंगता हुआ दिखेगा।
गाइड इस प्रक्रिया को चरण-दर-चरण समझाएंगे कि कैसे कोयला धरती से काटा जाता है, लोड किया जाता है और देश भर में भेजा जाता है, जिससे आपके घरों की बिजली जलती है। यह एक भ्रमण कम और भारत के छिपे हुए इंजन कक्ष में कदम रखने जैसा ज़्यादा लगेगा।
यहां आपकी सुरक्षा के सारे प्रोटोकाल पालन किए जाएंगे। खदानों की गतिविधियों से रूबरू होने के बाद आपको वहां से वापस राजधानी रांची लाया जाएगा।
मां छिन्नमस्तिका के दर्शन करने हों तो रजरप्पा भी जाने की सुविधा
आप अगर झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित रजरप्पा के मां छिन्नमस्तिका दरबार जाना चाहते हैं तो आप दूसरा पैकेज चुन सकते हैं। इसमें आप रांची से सीधे रजरप्पा जाएंगे और वहां से आपको पतरातू होते हुए उत्तरी उरीमारी खदान ले जाया जाएगा।
पर्यटक झारखंड अक्सर झरनों, जंगलों और आदिवासी कला-संस्कृति को जानने-समझने के लिए आते हैं। खनन पर्यटन आपको यह देखने के लिए प्रेरित करेगा कि राज्य की ज़मीन के नीचे की संपदा उसकी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और पहचान को कैसे आकार देती है। आप यहां खुली खदान, प्रकृति तथा आस्था के संगम में डुबकी लगा सकते हैं।
पतरातू घाटी देखकर आ जाएगी मनाली की याद
वैसे तो पतरातू थर्मल पावर के लिए शुरू से ही प्रसिद्ध रहा है, लेकिन अब यह पर्यटकों का पसंदीदा स्थल बन चुका है। राजधानी रांची से रामगढ़ जिले के पतरातू के बीच 32 किलोमीटर का सफर हर किसी को रोमांच से भर देता है।
पिठोरियाघाटी की घुमावदार सड़कों के बीच जगह-जगह पर बने सेल्फी प्वाइंट पर फोटो सेशन करने से खुद को रोक पाना मुश्किल होता है।
चारों ओर फैली हरियाली और पहाड़ों से घिरी इस घाटी को देखकर आपको मनाली की याद आ जाएगी। यहां आप पतरातू डैम में बोटिंग, ट्रैकिंग और कैंपिंग का भी मजा ले सकते हैं।
भैरवी और दामोदर नदियों के संगम पर है रजरप्पा मंदिर
रांची से 70 किलोमीटर दूर और खनन क्षेत्र के पास स्थित रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिका मंदिर के दर्शन के बिना रामगढ़ की कोई भी यात्रा पूरी नहीं होती।
यह मंदिर भैरवी और दामोदर नदियों के संगम पर है जो भारत के शक्तिपीठों में से एक है। ऊबड़-खाबड़ चट्टानें, बहता पानी और मंदिर की घंटियां यहां अद्धभुत वातावरण बनाते हैं।
कैसे शुरू करें यात्रा
आप रजरप्पा मंदिर या पतरातू घाटी, पलानी फाल या रिजार्ट का भ्रमण स्वयं कर सकते हैं, लेकिन खनन पर्यटन का आनंद लेना चाहते है तो आपको सीसीएल के सहयोग से राज्य सरकार के पर्यटन विभाग की कंपनी झारखंड पर्यटन विकास निगम द्वारा शुरू किए गए खनन पर्यटन से जुड़ना होगा।
निगम दो पैकेजों में आपको यह यात्रा 10-15 लोगों की समूह में कराएगा। आप पूरे परिवार के साथ भी इस यात्रा का आनंद उठा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए पोर्टल का निर्माण कराया जा रहा है। फिलहाल आप जेटीडीसीएलटीडी एट द रेट जीमेल डॉट काम के माध्यम से इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
प्रति व्यक्ति 2500 से 2800 रुपये लगेगा शुल्क
पतरातू घाटी के नजारों का आनंद लेते हुए इस रास्ते से होकर उरीमारी माइंस जाने पर प्रति व्यक्ति 2500 रुपये का भुगतान करना होगा। वहीं रजरप्पा के छिन्नमस्तिका मंदिर के दर्शन के साथ माइनिंग टूरिज्म का उठाने के लिए प्रति व्यक्ति 2800 रुपये शुल्क निर्धारित है।
हर ग्रुप में होंगे 10 से 20 लोग, गाइड रहेंगे साथ
झारखंड पर्यटन विकास निगम (जेटीडीसी) ने शुरुआती चरण में सप्ताह में दो दिन पर्यटकों को उरीमारी माइंस का भ्रमण कराने की योजना बनाई है। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था की गई है।
पर्यटकों के प्रत्येक ग्रुप में 10 से 20 लोग सम्मिलित होंगे, जबकि खनन के बारे में जानकारियां देने के लिए सीसीएल की ओर से हर समूह में गाइड भी उपलब्ध कराए जाएंगे। सभी पर्यटकों को खान में प्रवेश से पूर्व सीसीएल के नियमों, सुरक्षा निर्देशों एवं स्वास्थ्य मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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