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    मकर संक्रांति के त्योहार पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग? दिलचस्प हैं इसके पीछे छिपे कारण

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 04:24 PM (IST)

    मकर संक्रांति का त्योहार भारत में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन सिर्फ तिल-गुड़ खाने का रिवाज ही नहीं है, बल्कि पतंग भी उड़ाई जाती है। ले ...और पढ़ें

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    (Picture Courtesy: Freepik)

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) भारत के सबसे महत्वपूर्ण और हर्षोल्लास से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इसे 'मकर संक्रांति' कहा जाता है। इस दिन दान, स्नान और पूजा-पाठ का जितना महत्व है, उतना ही पतंगबाजी का भी है। 

    गुजरात से लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक, आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से पट जाता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक हर किसी को पतंग उड़ाने में खूब मजा आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा (Kite Flying on Makar Sankranti) क्यों शुरू हुई? आइए जानें इसके पीछे के कारण।

    वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण

    मकर संक्रांति के समय पतंग उड़ाने का सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य से जुड़ा है। संक्रांति का त्योहार सर्दियों के मौसम में आता है, जब उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड होती है। इस समय शरीर को गर्माहट और विटामिन-डी की सख्त जरूरत होती है।

    पतंग उड़ाने के बहाने लोग घंटों अपनी छतों पर या खुले मैदानों में धूप में बिताते हैं। सुबह की कोमल धूप शरीर के लिए औषधि का काम करती है। यह त्वचा की समस्याओं को दूर करने और शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती है। 

    Kite Flying on Makar Sankranti (1)

    (Picture Courtesy: Freepik)

    धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं

    मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की कुछ धार्मिक मान्यताएं भी हैं। ऐसी मान्यता है कि पतंग उड़ाने की शुरुआत श्रीराम ने की थी और उनकी पतंग इंद्रलोक तक चली गई थी। तभी से मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू हुई। 

    खुशी और आजादी का प्रतीक

    पतंग का ऊंचा उड़ना मानवीय आकांक्षाओं और प्रगति का प्रतीक है। जिस तरह पतंग हवा के विपरीत जाकर ऊंचाई छूती है, वैसे ही यह त्योहार हमें विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

    ‘काई पो छे!’ के शोर के बीच लोग ऊंच-नीच और भेदभाव भूलकर एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं। यह खेल लोगों को जोड़ने का काम करता है।

    सावधानी भी है जरूरी

    पतंगबाजी का आनंद लेते समय हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए-

    • पक्षियों की सुरक्षा- चीनी मांझा या कांच लगे मांझे का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे निर्दोष पक्षियों के पंख कट जाते हैं।
    • सुरक्षित स्थान- हमेशा खुली और सुरक्षित जगह पर ही पतंग उड़ाएं, ताकि गिरने का डर न रहे।